
Cashless Medical रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी में मौजूदा और सेवानिवृत्त स्टाफ के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू है। इसको लेकर मंगलवार को एक बैठक हुई, जिसमें सभी पक्षों ने अपनी बात रखी।
दो साल बाद हुई समीक्षा
बिजली कंपनियों में कैशलेस स्वास्थ्य योजना अक्टूबर 2023 से लागू की गई थी। इस योजना को लेकर स्टाफ को कई तरह की शिकायतें और दिक्कतें थी। समय- समय पर कर्मचारी संगठनों की तरफ से इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा गया है। इसी वजह से यह बैठक रखी गई थी। एक तरह से योजना की समीक्षा की गई। बैठक में कंपनी के इंजीनियर्स, अधिकारी और कर्मचारी के साथ पेंशनर्स भी शामिल हुए।
योजना के क्रियान्वयन की पूरी रिपोर्ट
बैठक में कंपनी की तरफ से कैशलेस योजना को लेकर डिटेल में जानकारी दी गई। इस योजना में शामिल अस्पतालों से लेकर अब तक हुए इलाज आदि की विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान बैठक में मौजूद कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने कई सुझाव भी दिए।
Cashless Medical कर्मचारी संगठनों की तरफ से दिए गए 10 सुझाव
करीब दो वर्ष से योजना में शामिल कंपनी के स्टाफ ने योजना में बदलाव को लेकर कई सुझाव दिए। इसमें योजना के संचालन के लिए अलग ट्रस्ट बनाने का सुझाव भी शामिल है। इसी तरह पेंशनर्स के लिए परिवार की परिभाषा बदलने की भी मांग की गई। बता दें कि अभी पेंशनर्स के माता पिता को इस योजना से बाहर कर दिया गया है।
तो अस्पताल को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि बैठक के दौरान कुछ अस्पतालों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने शिकायत की। इस पर कंपनी प्रबंधन की तरफ से कहा गया कि योजना में शामिल कोई अस्पताल यदि CGHS rate पर बिलिंग नहीं करता है तो दूसरे अस्पताल जा सकते हैं। इसके साथ ही कंपनी के एप में फीडबैक डाल दें। यदि किसी अस्पताल के खिलाफ ज्यादा शिकायत आती है तो उसे ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा।
20 प्रतिशत बढ़ोतरी संभावित
बैठक में कैश लेस योजना के लागू होने के बाद दो वर्षों में कुल प्राप्त अंशदान और मेडिकल पर हुए व्यय का ब्यौरा रखा गया, योजना के तीसरे वर्ष में लगभग 20% बढ़ोतरी संभावित है। इससे अंशदान की राशि रुपए 1000 को 1200 और 500 को 600 करने का प्रस्ताव रखा गया है । योजना अंतर्गत नियमित एवं सेवानिवृत्त पर हुआ व्यय लगभग एक समान है ।
Cashless Medical ये हैं बदलाव के प्रमुख सुझाव
1. कैशलेस क्रियान्वयन के लिए अलग ट्रस्ट बने, जिसमें कंपनी भी कम से कम अंशदान के बराबर राशि भुगतान करे।
2. परिवार परिभाषा में पेंशनर्स के माता/पिता को पुनः शामिल किया जाए।
3. योजना में शामिल होने के लिए पिछली अवधि का अंशदान न लिया जाए।
4. किसी भी समय तुरंत शामिल होने/बाहर जाने की सुविधा हो।
5. प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप की सुविधा प्रतिवर्ष मिले।
6. दंत उपचार सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 किया जाए।
7. OPD उपचार की सुविधा कैशलेस आधार पर प्रारंभ की जाए।
8. नियमित कर्मियों से कोई अंशदान न लिया जाए।
9. 25 लाख तक बीमा का विकल्प उपलब्ध हो।
10. मोतियाबिंद उपचार में जो अस्पताल कैशलेस सुविधा नहीं दे रहे हैं उनपर नियमानुसार कार्यवाही की जाए।







