
रायपुर/नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए साल 2026 उम्मीदों और गणनाओं का साल बन गया है। जहां एक ओर महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) 60% के आंकड़े को छू चुका है, वहीं दूसरी ओर 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। लेकिन इस नई चमक के पीछे कोरोना काल की वह ‘पुरानी टीस’ आज भी बरकरार है, जिसे कर्मचारी भूल नहीं पाए हैं। सवाल यह है कि क्या आगामी वेतन वृद्धि उस 18 महीने के रुके हुए एरियर (Arrears) की भरपाई कर पाएगी?
एक छोटे कर्मचारी का ‘बड़ा त्याग’: ₹25,224 करोड़ का आधिकारिक हिसाब
सरकारी आंकड़ों और हालिया रिपोर्टों के विश्लेषण से पता चलता है कि कोरोना महामारी के दौरान 18 महीनों (जनवरी 2020 से जून 2021) तक महंगाई भत्ते पर लगाई गई रोक ने कर्मचारियों की जेब पर गहरा असर डाला है।
आंकड़ों के मुताबिक, एक Group C, Level 1 कर्मचारी, जिसकी बेसिक सैलरी ₹18,000 है, उसे उस अवधि में कुल ₹25,224 का नुकसान उठाना पड़ा। इसमें DA के ₹24,090 और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TPTA) पर मिलने वाले DA के ₹1,134 शामिल हैं। जब देश भर के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के इस ‘मौन योगदान’ को जोड़ा जाता है, तो यह राशि अरबों में पहुँचती है। अब कर्मचारी इसी नुकसान की भरपाई नए वेतन आयोग के जरिए चाहते हैं।
नीचे दी गई तालिका से समझिए कि हर 6 महीने में कर्मचारियों का कितना पैसा फ्रीज किया गया:

क्या फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) करेगा भरपाई?
कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग यह है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को 3.68 रखा जाए। उनका तर्क है कि अगर सरकार पिछला बकाया (Arrears) नहीं दे रही है, तो कम से कम भविष्य की सैलरी में इतनी सम्मानजनक बढ़ोतरी होनी चाहिए जो उस पुराने घाटे की भरपाई कर सके।
यदि सरकार इस मांग को मानती है, तो लेवल 1 के सबसे छोटे कर्मचारी की सैलरी में आने वाला उछाल कुछ इस प्रकार होगा:
| विवरण | वर्तमान स्थिति (7th CPC) | प्रस्तावित (8th CPC – 3.68 FF) |
| न्यूनतम बेसिक पे | ₹18,000 | ₹66,240 |
| फिटमेंट फैक्टर | 2.57 | 3.68 |
| अनुमानित वृद्धि | – | लगभग 2.6 गुना |
चतुर नज़रिया: क्या यह संभव है?
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में 60% तक पहुँच चुके DA के बाद बेसिक सैलरी को रिवाइज करना सरकार की मजबूरी भी है और जरूरत भी। यदि सरकार फिटमेंट फैक्टर को 3 के ऊपर ले जाती है, तो यह उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत होगी जिन्होंने आपदा के समय अपने हक का पैसा देश हित में छोड़ा था। छत्तीसगढ़ सहित देश भर के केंद्रीय कर्मचारी अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या आगामी बजट सत्रों में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को कर्मचारियों के पक्ष में झुकाया जाएगा या नहीं।
समझिए नुकसान का गणित
| वर्ष/अवधि | बेसिक पे (₹) | महंगाई भत्ता (DA) | ट्रांसपोर्ट भत्ता (TPTA) | कुल नुकसान (₹) |
|---|---|---|---|---|
| जनवरी 2020 (6 माह) | 18,000 | 720 | 900 | 4,482 |
| जुलाई 2020 (6 माह) | 18,000 | 1,260 | 900 | 7,938 |
| जनवरी 2021 (6 माह) | 18,500 | 2,035 | 900 | 12,804 |
| कुल अनुमानित नुकसान (Grand Total) | ₹ 25,224 | |||







