
CERC नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश के ऊर्जा क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने 20 मार्च, 2026 को नई अधिसूचना जारी करते हुए ‘टैरिफ के नियम और शर्तें (दूसरा संशोधन) विनियम, 2026’ को लागू कर दिया है। इस नए कानून का सबसे बड़ा आकर्षण Integrated Energy Storage Systems (IESS) को औपचारिक मान्यता देना है।
अब बिजली स्टोर करना होगा आसान
अब तक भारत में उत्पादित बिजली को तुरंत ग्रिड में भेजना पड़ता था, लेकिन नए नियमों के बाद अब थर्मल पावर प्लांट और ट्रांसमिशन नेटवर्क के साथ बड़े पैमाने पर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाए जा सकेंगे।
ग्रिड स्थिरता: यह सिस्टम जरूरत से ज्यादा बिजली को स्टोर करेगा और पीक ऑवर्स (जब मांग सबसे ज्यादा हो) में उसे रिलीज करेगा।
लागत में कमी: विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में महंगे ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की जरूरत कम होगी, जिससे अंततः बिजली की लागत में स्थिरता आएगी।
विशेष आकर्षण: CERC नए नियम 2026
- ✅ लिथियम-आयन बैटरी: अब 15 साल की होगी वैलिडिटी।
- ✅ बंपर रिटर्न: कंपनियों को मिलेगा 14% बेस रिटर्न ऑन इक्विटी।
- ✅ ग्रिड मजबूती: बिजली स्टोर करने से लोड शेडिंग में आएगी कमी।
भारत के पावर सेक्टर में एक नए युग की शुरुआत हुई है। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने 20 मार्च, 2026 को अपनी नई अधिसूचना के जरिए ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) को मुख्यधारा से जोड़ दिया है।
IESS: बिजली सहेजने का आधुनिक तरीका
नए नियमों के तहत Integrated Energy Storage Systems (IESS) को थर्मल प्लांट और ट्रांसमिशन नेटवर्क के साथ जोड़ा जाएगा। इससे बिजली की बर्बादी रुकेगी और पीक ऑवर्स में सप्लाई स्थिर रहेगी।
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| बैटरी लाइफ | 15 साल (लिथियम-आयन) |
| दक्षता (Efficiency) | न्यूनतम 85% जरूरी |
| टैरिफ आवेदन | ऑपरेशन शुरू होने के 90 दिन के भीतर |
स्त्रोत: CERC आधिकारिक अधिसूचना (मार्च 2026) | खबर: ChaturPost.com
लिथियम-आयन बैटरी को मिला 15 साल का ‘ग्रीन सिग्नल’
नियमों में स्पष्ट किया गया है कि लिथियम-आयन बैटरी आधारित स्टोरेज सिस्टम अब पावर ग्रिड का अभिन्न हिस्सा होंगे।
सरकार ने इन प्रणालियों की कार्य अवधि (Useful Life) 15 साल तय की है।
इससे निवेशकों और निजी कंपनियों को स्पष्टता मिलेगी कि वे लंबे समय तक अपनी लागत वसूल कर सकते हैं।
कमाई का नया मॉडल: 14% रिटर्न की गारंटी
कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए CERC ने एक आकर्षक वित्तीय ढांचा (Supplementary Tariff Structure) तैयार किया है:
फिक्स्ड चार्जेस: सालाना खर्चों की गणना 14% बेस रिटर्न ऑन इक्विटी के आधार पर होगी।
सप्लीमेंट्री एनर्जी चार्जेस: इसमें बैटरी चार्ज करने में लगने वाली बिजली की लागत शामिल होगी।
दक्षता की शर्त: सिस्टम की ‘राउंड ट्रिप एफिशिएंसी’ कम से कम 85% होनी अनिवार्य है।

कंपनियों को बिजली चुनने की आजादी
बिजली बनाने वाली कंपनियां अब अपने स्टोरेज सिस्टम को चार्ज करने के लिए:
अपने प्लांट की बची हुई बिजली का उपयोग कर सकेंगी।
खुले बाजार (Open Market) से सस्ती बिजली खरीद सकेंगी।
अन्य बिजली स्टेशनों से भी संपर्क कर सकेंगी।
पारदर्शिता और पुराने प्रोजेक्ट्स के लिए नियम
अगर कोई पुरानी कंपनी नया स्टोरेज सिस्टम जोड़ना चाहती है, तो उसे अपने लाभार्थियों (Discoms) को 30 दिन पहले सूचित करना होगा। इसके अलावा, कोयला और लिग्नाइट खदानों से जुड़े कुछ नियमों को 1 अप्रैल, 2024 से पिछली तारीख (Retrospective) से लागू किया गया है, ताकि मुनाफे का सही बंटवारा हो सके।







