कर्मचारी हलचल

छत्तीसगढ़ पावर कंपनी में ‘संविदा नियुक्ति’ पर रार: स्टाफ ऑफिसर को एक्सटेंशन देने की तैयारी, संगठन ने दी कोर्ट जाने की चेतावनी

Chhattisgarh State Power Company, Staff Officer Contract,

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी (CSPC) में इसी महीने सेवानिवृत्त हो रहे एक स्टाफ ऑफिसर को संविदा नियुक्ति देने की सुगबुगाहट ने विवाद का रूप ले लिया है। इस संभावित फैसले के खिलाफ ‘अखिल भारतीय प्रशासनिक सुधार परामर्शी संगठन’ ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि नियम विरुद्ध नियुक्ति दी गई, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

चेयरमैन को लिखा कड़ा पत्र

संगठन के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष रजनीकांत अग्रवाल ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव और पावर ट्रांसमिशन कंपनी के चेयरमैन सुबोध सिंह को इस संबंध में एक औपचारिक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने स्टाफ ऑफिसर को संविदा नियुक्ति देने के प्रयासों पर गंभीर आपत्ति जताई है।

विरोध के मुख्य कारण: पदोन्नति पर संकट

संगठन ने अपने पत्र में संविदा नियुक्ति के खिलाफ निम्नलिखित तर्क दिए हैं:

  • दोहरा मापदंड: जिस अधिकारी को संविदा नियुक्ति देने की तैयारी चल रही है, उन्होंने खुद अतीत में स्टाफ ऑफिसर के सेवा विस्तार का कड़ा विरोध किया था। अब खुद के लिए उसी पद की चाहत पर सवाल उठ रहे हैं।
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  • पदोन्नति में बाधा: संविदा नियुक्ति से निचले क्रम में कार्यरत कर्मचारियों की पदोन्नति (Promotion) प्रभावित होगी। जो कर्मचारी अपने रिटायरमेंट के करीब हैं, वे प्रमोशन के हक से वंचित रह जाएंगे।

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  • वित्तीय बोझ: संगठन का तर्क है कि संविदा नियुक्ति से कंपनी पर अतिरिक्त वार्षिक स्थापना व्यय (Establishment Expenses) बढ़ेगा, जबकि कार्यालय में कई वरिष्ठ और सक्षम कर्मचारी मौजूद हैं जो इस जिम्मेदारी को निभाने के योग्य हैं।
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  • देरी से प्रमोशन: इस संवर्ग में पहले ही पदोन्नति काफी विलंब से होती रही है। कई कर्मचारी बिना उच्च पद का लाभ पाए ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

निचले स्तर पर भी ‘संविदा’ की तैयारी!

खबरों के मुताबिक, पावर कंपनी में अब उच्च पदों के साथ-साथ निचले क्रम के पदों पर भी सेवानिवृत्त अधिकारियों को संविदा पर रखने की जमीन तैयार की जा रही है। कई पूर्व अधिकारी अपने रसूख का इस्तेमाल कर दोबारा कुर्सी पाने की जुगत में लगे हैं, जिससे वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष है।

अगर प्रबंधन ने योग्य कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी कर संविदा नियुक्ति का फैसला लिया, तो संगठन के पास कोर्ट जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

रजनीकांत अग्रवाल, कार्यकारी प्रांताध्यक्ष

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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