
DGP ki niyukti kaise hoti hai रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस करीब 13 महीने के इंतजार के बाद आज फुलटाइम डीजीपी मिल गया है। राज्य के सीनियर आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम को फुलटाइम (स्थायी) डीजीपी (DGP) नियुक्त कर दिया गया है। बता दें कि गौतम फरवरी 2025 से राज्य के कार्यवाहक डीजीपी (चालू प्रभार) के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
डीजीपी गौतम जुलाई 2027 में 60 साल के हो जाएंगे, लेकिन अब वे 2028 तक पद पर रहेगें। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि कोई अधिकारी लंबे समय तक कार्यवाहक (Acting DGP) क्यों रहता है और उसे फुलटाइम डीजीपी बनाने की क्या प्रक्रिया है? दरअसल, इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के कड़े नियम हैं…
कौन करता है डीजीपी की नियुक्ति और क्या है प्रक्रिया? DGP ki niyukti kaise hoti hai
डीजीपी की नियुक्ति अंतिम रूप से राज्य सरकार ही करती है, लेकिन वह अपनी मर्जी से किसी भी अधिकारी को नहीं चुन सकती। इसके लिए एक तय प्रक्रिया का पालन करना होता है:
- पैनल तैयार करना: राज्य सरकार अपने राज्य के सबसे सीनियर आईपीएस (IPS) अधिकारियों के नामों की एक सूची संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजती है। यह सूची डीजीपी का पद खाली होने से कम से कम तीन महीने पहले भेजनी होती है।
- UPSC की भूमिका: UPSC इन नामों पर विचार करने के लिए एक कमेटी बनाती है। यह कमेटी अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड, अनुभव, ईमानदारी और वरिष्ठता (Seniority) को देखती है।
- तीन नामों की शॉर्टलिस्ट: UPSC पूरी जांच-परख के बाद राज्य सरकार को 3 सबसे योग्य अधिकारियों के नामों का एक पैनल (Empanelment) वापस भेजती है।
- अंतिम चयन: राज्य सरकार को UPSC द्वारा भेजे गए उन्हीं 3 नामों में से किसी एक को राज्य का डीजीपी चुनना होता है।
डीजीपी की नियुक्ति के लिए क्या योग्यताएं जरूरी हैं?
UPSC और राज्य सरकारें नाम तय करते समय मुख्य रूप से तीन शर्तों को देखती हैं:
- अधिकारी भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का होना चाहिए।
- वह राज्य कैडर में महानिदेशक (DG) या उसके समकक्ष रैंक पर काम कर रहा हो।
- सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक, अधिकारी की नौकरी के कम से कम 6 महीने बाकी होने चाहिए, तभी उसके नाम पर विचार किया जा सकता है।
कैसे तय होता है डीजीपी का कार्यकाल?
डीजीपी के कार्यकाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट के बेहद सख्त निर्देश हैं ताकि पुलिस पर राजनीतिक दबाव कम किया जा सके:
- न्यूनतम 2 वर्ष का कार्यकाल: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, एक बार डीजीपी की नियुक्ति होने के बाद उन्हें कम से कम 2 साल का कार्यकाल मिलना अनिवार्य है।
- रिटायरमेंट के बाद भी सेवा: अगर कोई अधिकारी डीजीपी बनता है और उसकी सेवानिवृत्ति (Retirement) की तारीख 2 साल पूरा होने से पहले ही आ जाती है, तब भी वह 2 साल का कार्यकाल पूरा होने तक पद पर बना रहेगा (उन्हें सेवा विस्तार यानी Extension दिया जाता है)।
- समय से पहले हटाने के नियम: राज्य सरकार किसी डीजीपी को 2 साल से पहले सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में ही हटा सकती है, जैसे:
- गंभीर रूप से बीमार होने पर।
- किसी भ्रष्टाचार या आपराधिक मामले में दोषी पाए जाने पर।
- अदालत द्वारा सजा मिलने या सस्पेंड होने पर।
- खुद अधिकारी द्वारा पद छोड़ने की इच्छा जताने पर।
इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि राज्य के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी को काम करने की स्वतंत्रता मिले और वह बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के कानून व्यवस्था संभाल सकें।
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