
बिजली क्षेत्र के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संगठित करने और उनकी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के उद्देश्य से बने अखिल भारतीय विद्युत् सेवानिवृत्त कर्मचारी महासंघ ने छत्तीसगढ़ में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण कुमार देवांगन ने chaturpost.com से विशेष बातचीत में बिजली कंपनी के प्रबंधन, बिजली बिल छूट विवाद और अपनी 42 साल की संघर्षपूर्ण यात्रा पर खुलकर बात की।
42 साल की नौकरी में ट्रांसफर का दंश, पर नहीं झुका संघर्ष का जज्बा
सवाल: आपकी 42 वर्षों की शासकीय सेवा और संगठन में यात्रा कैसी रही?
अरुण कुमार देवांगन: मेरी नौकरी सिर्फ एक सेवा नहीं, बल्कि कर्मचारियों के हक की लड़ाई का गवाह रही है। विद्युत मंडल कंपनी की सेवा के साथ मैं हमेशा कर्मचारी हितों के लिए मुखर रहा। इसी संघर्षशीलता के कारण मुझे दो बार पूर्ववर्ती मंडल चेयरमैन के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा। मेरा एक बार सुदूर नारायणपुर और दूसरी बार कोंडागांव तबादला किया गया, ताकि मेरी आवाज दबाई जा सके। लेकिन इस दमनकारी नीति से मेरा जज्बा नहीं टूटा।
संगठन में मैंने छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी महासंघ में तीन बार महामंत्री और दो बार कार्यवाहक अध्यक्ष का दायित्व निभाया। राष्ट्रीय स्तर पर अखिल भारतीय विद्युत् मजदूर महासंघ में तीन बार कार्यालय मंत्री, एक बार उप महामंत्री और उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, व DVC (दामोदर घाटी निगम) के प्रभारी के रूप में काम किया। अब नौकरी से विराम मिला है, सेवा से नहीं। अब अपनी ऊर्जा देश और समाज हित में लगा रहा हूँ।
बिजली छूट विवाद: “अपनो पे जुलुम, गैरो पे मेहरबान” हो रहा प्रबंधन
सवाल: वर्तमान में सेवानिवृत्त बिजली कर्मचारियों के सामने बिजली छूट (Electricity Rebate) का क्या विवाद है?
अरुण कुमार देवांगन: यह पूरा विवाद प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा है, जिसका खमियाजा रिटायर्ड कर्मचारी भुगत रहे हैं। बिजली बिल में छूट की यह विसंगति 2012 से पहले ही कंपनी के ध्यान में आ गई थी। EITC ने 2012 में ही पत्र जारी कर सभी मैदानी अधिकारियों का ध्यान खींचा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
EITC को सिर्फ इतना करना था: कर्मचारी संख्या, जन्म तिथि और सेवानिवृत्ति तिथि को कर्मचारी के बीपी (BP) नंबर से लिंक कर देना था। ऐसा होने पर सेवानिवृत्ति के बाद 50% की छूट ऑटोमैटिक लॉक होकर 25% में बदल जाती।
अब कंपनी कह रही है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी गलत छूट ले रहा था, जबकि यह तकनीकी काम कर्मचारी के वश में ही नहीं था। जब सरकार की ‘हाफ बिजली माफ योजना’ का लाभ आम उपभोक्ताओं को रातों-रात बिना किसी आवेदन के सॉफ्टवेयर में बदल कर दे दिया गया, तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए ऐसा क्यों नहीं किया गया? अगर ऐसा होता, तो कंपनी राजस्व का पैसा सरकार से स्वयंमेव क्लेम कर लेती। जिम्मेदार अधिकारी अपनी गलती छिपाने के लिए कंपनी की लुटिया डुबो रहे हैं।
सवाल: क्या आपको लगता है कि नियमों में पक्षपात किया जा रहा है?
अरुण कुमार देवांगन: बिल्कुल! IAS एसोसिएशन को गलत ढंग से समाधान योजना का लाभ दिया गया, जबकि यह योजना कोरोना काल के गरीब और मजबूर लोगों के लिए थी जो बिल नहीं पटा पाए थे। अपात्र और सक्षम लोगों को अनुचित लाभ दिया जा रहा है। यहाँ वही कहावत चरितार्थ होती है— “अपनो पे जुलुम, गैरो पे मेहरबान।”
इस तानाशाही के खिलाफ हमने मोर्चा खोल दिया है:
- वर्तमान में 1920 कर्मचारियों और अधिकारियों से लाखों रुपये की अवैध रिकवरी निकाली जा रही है, जिसका हम पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
- हमने रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर उपभोक्ता फोरम में प्रकरण दायर किए हैं।
- नियामक आयोग और लोकपाल में सामूहिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी है।
- बड़ी राहत: बिलासपुर फोरम ने एक मामले में एरियर्स राशि को राज्य सरकार की हॉफ बिजली योजना में एडजस्ट करने का आदेश भी दे दिया है।
छत्तीसगढ़ में पहली बार ट्रेड यूनियन एक्ट के तहत संगठन का गठन

सवाल: छत्तीसगढ़ में इस नए महासंघ की नींव कैसे पड़ी और इसकी क्या प्राथमिकताएं हैं?
अरुण कुमार देवांगन: वर्ष 2016 में उदयपुर के राष्ट्रीय अधिवेशन में यह तय हुआ था कि रिटायर्ड कर्मचारियों की सामूहिक ऊर्जा का उपयोग राष्ट्रहित में किया जाए। नागपुर के के.के. हरदास (अध्यक्ष) और जयपुर के प्रहलाद सिंह अवाना (महामंत्री) के साथ संगठन विस्तार शुरू हुआ। वर्ष 2025 में रामेश्वरम के तृतीय अधिवेशन में मुझे राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिली।
छत्तीसगढ़ में कोई मजबूत सेवानिवृत्त संगठन नहीं था, इसलिए 22 जून 2025 को रायपुर में 150 से अधिक रिटायर्ड कर्मियों की उपस्थिति में “छत्तीसगढ़ विद्युत सेवानिवृत्त कर्मचारी अधिकारी संघ महासंघ” का गठन किया गया। महासमुंद के अश्वनी तिवारी को अध्यक्ष और धमतरी-रायपुर के पूनारद राम साहू को महामंत्री बनाया गया।
- विशेष बात: यह छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा सेवानिवृत्त बिजली संगठन बना, जिसका पंजीयन ट्रेड यूनियन एक्ट (पंजीयन क्रमांक 116620) के तहत हुआ है। बाकी पुराने संगठन सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत हैं।
सिर्फ 8 दिन में आंदोलन और बड़ी उपलब्धियां
सवाल: गठन के बाद संगठन ने अब तक क्या काम किए हैं?
अरुण कुमार देवांगन: संगठन बनने के महज 8 दिन बाद ही हमने कंपनी मुख्यालय के सामने प्रदर्शन कर 11 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। हमारी प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
- चिकित्सालयों में दवाई और पैथोलॉजी उपकरण उपलब्ध करवाए।
- ईसीजी (ECG) मशीन की सुविधा सुनिश्चित कराई।
- सैकड़ों कर्मचारियों को प्रोफार्मा पदोन्नति दिलवाई।
- दंतेवाड़ा के एक कर्मचारी की रुकी हुई पेंशन बहाल करवाई।
- ई-परिचय पत्र और कैशलेस चिकित्सा सुविधा का विस्तार कराया।
‘भेंट-मुलाकात अभियान’: भृत्य और लाइनमैन हमारी प्राथमिकता

सवाल: संगठन का ‘भेंट-मुलाकात अभियान’ क्या है?
अरुण कुमार देवांगन: यह हमारी एक बेहद भावुक और अनूठी पहल है। इसके तहत हम सेवानिवृत्त कर्मचारियों के घर जाकर गमछा पहनाकर उनका सम्मान करते हैं और परिवार से मिलते हैं। संगठन पद देखकर काम नहीं करता; हमारे लिए हेल्पर, भृत्य और लाइनमैन जैसे छोटे कर्मचारी पहली प्राथमिकता हैं, क्योंकि रिटायरमेंट के बाद अक्सर इनसे कोई संपर्क नहीं रखता। अकेले रायपुर में ऐसे 300 कर्मचारियों की सूची तैयार कर हम उनसे संपर्क कर रहे हैं।
पारिवारिक स्थिरता ही मेरी असली कमाई: न लालच, न राजनीति से लगाव
सवाल: इस उम्र में भी आप बिना किसी स्वार्थ के सक्रिय हैं, आपकी प्रेरणा क्या है?
अरुण कुमार देवांगन: मैं अपने 42 साल के अनुभव को नई पीढ़ी को सौंपना चाहता हूं। इसीलिए मैं केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान में बिना किसी मानदेय (सैलरी) के स्वेच्छा से नई पौध को ट्रेनिंग दे रहा हूँ।
जहां तक निजी जीवन की बात है, मेरी दो बेटियां हैं। दोनों ने स्कॉलरशिप लेकर मुंबई से एम.टेक (M.Tech) किया। बड़ी बेटी बेंगलुरु में एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत है और दो बच्चों की मां है। छोटी बेटी चंडीगढ़ में सेटल है और एक बेटी की मां है। मेरा एक छोटा सा मकान है, मुझे बड़े या ज्यादा की ख्वाहिश नहीं है। यह पारिवारिक स्थिरता ही मेरी असली कमाई है। मेरे भीतर न कोई लालच है, न प्रसिद्धि की कामना और न ही राजनीति में आने का कोई लगाव है। मेरा एकमात्र संकल्प सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सम्मान की रक्षा करना है।







