Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में निगम कमिश्नर और MIC के पावर बदले! अब जनसंख्या तय करेगी वित्तीय अधिकार, सचिव का कड़ा आदेश जारी

Chaturpost News Desk | नवा रायपुर

छत्तीसगढ़ के सभी नगर पालिक निगमों के भीतर होने वाले करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की प्रशासनिक मंजूरी को लेकर राज्य सरकार ने एक बेहद बड़ा और नीतिगत बदलाव किया है । नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (Urban Administration and Development Department) की सचिव आर. शंगीता ने एक नया आदेश जारी कर नगर पालिक निगम के आयुक्तों (Commissioners) और मेयर-इन-कौंसिल (MIC) के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों का नया दायरा तय कर दिया है ।

इस नए आदेश के बाद अब Municipal Corporation Financial Powers पूरी तरह से संबंधित शहर की जनसंख्या के फार्मूले पर काम करेंगी । यानी, किस शहर की आबादी कितनी है, इसी से तय होगा कि वहां के कमिश्नर या एमआईसी कितने करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट को अपने स्तर पर मंजूरी दे सकते हैं । सरकार के इस कदम का सीधा असर प्रदेश के बड़े नगर निगमों जैसे रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई और अन्य निकायों के कामकाज पर पड़ेगा।

पावर गेम: जानिए 3 लाख से 10 लाख तक की आबादी वाले शहरों का गणित

नए नियमों के मुताबिक, जिन नगर निगमों की जनसंख्या 3 लाख से अधिक लेकिन 10 लाख से कम है, वहां प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों (Administrative and Financial Powers) का वर्गीकरण बेहद स्पष्ट कर दिया गया है:

  • नगरपालिक आयुक्त का पावर: ऐसे शहरों में निगम कमिश्नर अब अपने स्तर पर अधिकतम 1.00 करोड़ रुपये तक के निर्माण कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति (Administrative Approval) दे सकेंगे ।
  • मेयर-इन-कौंसिल (MIC) की ताकत: यदि कार्य की लागत 1 करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 6.00 करोड़ रुपये तक है, तो इसकी मंजूरी के लिए फाइल को एमआईसी की बैठक में पास कराना अनिवार्य होगा ।
  • निगम सामान्य सभा (Corporation Board): 6.00 करोड़ रुपये से अधिक और 10.00 करोड़ रुपये तक के बड़े प्रोजेक्ट्स को स्वीकृत करने का अधिकार निगम की सामान्य सभा के पास सुरक्षित रहेगा ।

मेट्रो शहरों (10 लाख से अधिक आबादी) में कमिश्नर और MIC के अधिकार सीमित!

हैरान करने वाली बात यह है कि जिन शहरों की आबादी 10 लाख से अधिक है (जैसे राजधानी रायपुर व अन्य बड़े क्लस्टर), वहां निचले स्तर पर वित्तीय शक्तियों को थोड़ा नियंत्रित किया गया है ताकि बड़े प्रोजेक्ट्स की सीधे मॉनिटरिंग हो सके:

  • कमिश्नर का पावर डाउन: 10 लाख से अधिक आबादी वाले निगमों में आयुक्त केवल 50.00 लाख रुपये तक के कार्यों की ही प्रशासनिक मंजूरी दे पाएंगे ।
  • MIC का दायरा: यहाँ मेयर-इन-कौंसिल को 50.00 लाख रुपये से अधिक लेकिन 3.00 करोड़ रुपये तक के कार्यों को स्वीकृत करने की शक्ति दी गई है ।
  • निगम परिषद् का अधिकार: 3.00 करोड़ रुपये से अधिक और 10.00 करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों को निगम परिषद् (सामान्य सभा) से हरी झंडी लेनी होगी ।

अति-महत्वपूर्ण (Strict Legal Guardrail): छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहली बार इतनी बारीकी से तय किया गया है कि यदि कोई प्रोजेक्ट 10 करोड़ रुपये की वित्तीय सीमा से बाहर जाता है, तो न तो कमिश्नर, न एमआईसी और न ही सामान्य सभा उसे मंजूरी दे पाएगी । ऐसे सभी मामलों में राज्य शासन की पूर्व स्वीकृति (Prior Approval from State Government) लेना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा ।

3 लाख से कम आबादी वाले निगमों में केवल कमिश्नर को ही पावर?

इस नए दिशा-निर्देश में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है । ऐसे नगर निगम जिनकी जनसंख्या 3 लाख से कम है, वहां सिर्फ नगरपालिक आयुक्त के वित्तीय अधिकारों को ही रेखांकित किया गया है । नए नियम के तहत छोटे नगर निगमों के कमिश्नर अधिकतम 50.00 लाख रुपये तक के कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति जारी करने के लिए अधिकृत होंगे ।

कमिश्नर और इंजीनियर्स के लिए टेक्निकल और टेंडर अप्रूवल के कड़े नियम

प्रशासनिक स्तर पर केवल फाइल पास करना ही नहीं, बल्कि टेंडर प्रक्रिया (Procurement Management) और टेक्निकल सेंक्शन (Technical Sanction) को लेकर भी कमिश्नरों की जवाबदेही तय की गई है:

  • 10 लाख से ऊपर ई-टेंडरिंग: कमिश्नर को यह सुनिश्चित करना होगा कि 10 लाख रुपये से अधिक की सभी निविदाएं अनिवार्य रूप से ई-निविदा (E-Tendering) के माध्यम से ही जारी हों । कार्यालय से हाथो-हाथ फॉर्म देने की प्रथा को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है ।
  • सिंगल टेंडर पर ब्रेक: यदि किसी बड़े प्रोजेक्ट के प्रथम आमंत्रण में केवल एकल निविदा (Single Tender) प्राप्त होती है, तो कमिश्नर उसे खोल नहीं सकेंगे । उन्हें 07 दिनों के भीतर दोबारा टेंडर आमंत्रित कराने की प्रक्रिया पूरी करानी होगी ।
  • परफॉर्मेंस गारंटी की वसूली: यदि कोई ठेकेदार एस्टीमेट से 10% से कम रेट पर टेंडर डालता है, तो कमिश्नर के नाम पर उसे परफॉर्मेंस गारंटी (Performance Guarantee) के रूप में एफडीआर (FDR) या एनएससी (NSC) जमा करानी होगी, इसके बिना एग्रीमेंट नहीं होगा ।

लापरवाही पर सीधे सस्पेंशन: सचिव आर. शंगीता की सीधी चेतावनी

नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव ने साफ कर दिया है कि Municipal Corporation Financial Powers का दुरुपयोग या नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी ।

प्रोजेक्ट की फाइल एमआईसी या कमिश्नर से पास होने के बाद, अनुबंध (Contract Agreement) होते ही उसी दिन कार्यादेश (Work Order) जारी करना होगा । कार्यादेश के बाद जनप्रतिनिधियों से समन्वय कर भूमि पूजन कराया जाएगा और उसके 03 दिनों के भीतर ग्राउंड पर काम शुरू करना होगा ।

आखिरी चेतावनी: विभाग की सचिव प्रत्येक माह के अंतिम मंगलवार को खुद इन सभी स्वीकृतियों, टेंडर प्रक्रियाओं और फाइलों की जिलावार समीक्षा करेंगी । यदि किसी भी निगम में इन नियमों का उल्लंघन पाया गया, या वित्तीय शक्तियों से बाहर जाकर काम स्वीकृत किया गया, तो संबंधित निगम आयुक्त (Commissioner) और संबंधित अभियंता (Engineer) के खिलाफ तत्काल कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई (Strict Disciplinary Action) की जाएगी ।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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