
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के खनिज साधन विभाग (Mineral Resources Department) ने राज्य की त्रिस्तरीय पंचायतों के वित्तीय सशक्तिकरण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला लिया है । राज्य शासन ने गौण खनिजों (Minor Minerals) से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी राजस्व राशि (Royalty Revenue) के संवितरण नियमों में बड़ा संशोधन कर दिया है । सरकार द्वारा जारी इस नए आदेश (New Government Order) के बाद अब खदान प्रभावित क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला पंचायतों को मिलने वाली राशि का पूरा गणित बदल गया है ।
यह नया आदेश नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय के महानदी भवन से जारी किया गया है, जिस पर उप सचिव विनायक शर्मा के हस्ताक्षर हैं । इस फैसले का सीधा असर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास (Rural Development) और स्थानीय बुनियादी ढांचे के निर्माण पर पड़ेगा। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि सरकार के इस फैसले से किस पंचायत को कितना फायदा होने वाला है और यह नियम कब से प्रभावी होगा।
क्या है नया आदेश और क्यों पड़ी संशोधन की जरूरत?
छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व में जारी संदर्भित विभागीय आदेश क्रमांक एफ 7-7/2004/12, दिनांक 10.10.2012 में आंशिक संशोधन (Partial Modification) किया है । पुराने नियमों के तहत खनिजों से मिलने वाली रॉयल्टी का वितरण अलग व्यवस्था के तहत होता था, जिससे जमीनी स्तर पर कई बार विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल पाता था।
नवीन दिशा-निर्देशों (New Guidelines) के अनुसार, छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 (Chhattisgarh Minor Mineral Rules, 2015) के नियम 76 के प्रावधानों के तहत अब पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में प्राप्त कुल राजस्व का एक बड़ा हिस्सा सीधे ग्रामीण विकास के लिए रिजर्व कर दिया गया है ।
राजस्व का पहला हिस्सा: 33% राशि सीधे विकास विभाग को
सरकार द्वारा जारी आदेश के बिंदु क्रमांक 1 के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में गौण खनिजों से प्राप्त संपूर्ण राजस्व का 33 प्रतिशत (33% Budget) हिस्सा सीधे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (Panchayat and Rural Development Department) को ट्रांसफर कर दिया जाएगा । इस राशि का उपयोग राज्य स्तर पर ग्रामीण विकास की बड़ी योजनाओं को संचालित करने के लिए किया जाएगा।
शेष 67% राशि का वितरण: ग्राम पंचायतों की खुली लॉटरी (New Slab System)
सबसे बड़ा बदलाव शेष 67 प्रतिशत (67% Percent Royalty) राशि के वितरण में किया गया है । अब इस राशि को एक विशेष स्लैब सिस्टम (Slab System) के तहत ग्राम पंचायत (Gram Panchayat), जनपद पंचायत (Janpad Panchayat) और जिला पंचायत (Zila Panchayat) के मध्य बांटा जाएगा । छोटे राजस्व वाले क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को 100 फीसदी तक राशि देने का प्रावधान किया गया है ।
| क्र. | संवितरण हेतु राशि का स्लैब (Royalty Amount Slab) | ग्राम पंचायत | जनपद पंचायत | जिला पंचायत |
|---|---|---|---|---|
| 1 | राशि रूपये 7.50 लाख तक प्राप्त सम्पूर्ण राशि | 100% | 0% | 0% |
| 2 | राशि रूपये 7.50 लाख से अधिक किन्तु रूपये 10.00 लाख तक | 80% | 10% | 10% |
| 3 | राशि रूपये 10.00 लाख से अधिक किन्तु रूपये 25.00 लाख तक | 70% | 15% | 15% |
| 4 | राशि रूपये 25.00 लाख से अधिक किन्तु रूपये 50.00 लाख तक | 60% | 20% | 20% |
| 5 | राशि रूपये 50.00 लाख रुपये से अधिक | 50% | 25% | 25% |
राशि के उपयोग के लिए कड़े मापदण्ड: अब इन 5 कामों पर खर्च होगा पैसा
सरकार ने केवल राशि का बंटवारा ही नहीं बदला है, बल्कि इस पैसे के उपयोग (Fund Utilization Criteria) को लेकर भी अतिरिक्त मापदण्ड (Additional Criteria) तय कर दिए हैं । 2012 के पुराने आदेश के पैरा-4 में उल्लेखित मदों के अलावा अब निम्नलिखित विकास कार्यों (Development Works) को भी इस फंड के दायरे में अनिवार्य रूप से समाहित किया गया है:
- 1. स्कूलों और अस्पतालों में पानी की सुविधा: ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और अस्पतालों में ओवरहेड टैंक (Overhead Tank) के साथ रनिंग वाटर (Running Water) यानी नल से लगातार पानी की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी ।
- 2. सामुदायिक शौचालय: गांवों में बने सामुदायिक शौचालयों (Community Toilets) के रख-रखाव और वहां ओवरहेड टैंक सहित रनिंग वाटर की व्यवस्था के लिए इस राशि का उपयोग हो सकेगा ।
- 3. मुक्तिधामों का कायाकल्प: ग्रामीण अंचलों में मुक्तिधाम निर्माण (Crematorium Construction), उनके संधारण कार्य (Maintenance) और वहां तक जाने वाले पहुंच मार्ग (Approach Road) का निर्माण किया जाएगा ।
- 4. वाचनालय निर्माण: ग्रामीण युवाओं और बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गांवों में वाचनालय (Libraries/Reading Rooms) का निर्माण कराया जाएगा ।
- 5. जिला पंचायत फंड के लिए कड़ा नियम (Mining Radius Limit): जिला पंचायत को वितरित की गई रॉयल्टी राशि का व्यय केवल उन्हीं क्षेत्रों के विकास कार्यों में किया जा सकेगा, जहां वास्तव में उत्खनन (Mining Operations) का कार्य चल रहा है । इसके लिए सरकार ने 15 किलोमीटर की परिधि (15 KM Radius) की सीमा तय की है । साथ ही शर्त यह भी है कि वह क्षेत्र उत्खनन से प्रतिकूल रूप से प्रभावित (Adversely Impacted Area) होना चाहिए ।
कब से लागू होगा नया नियम? प्रभावशीलता और प्रक्रिया (Implementation Date)
खनिज साधन विभाग ने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था अलग-अलग वित्तीय वर्षों (Financial Years) के लिए अलग तरह से काम करेगी:
- वित्तीय वर्ष 2021-22 एवं पूर्व के वर्ष: इस अवधि या इससे पहले के वर्षों की जो भी संवितरित राशि शेष है, उसका व्यय पुराने विभागीय आदेश (दिनांक 10.10.2012) में दी गई रीति और निर्धारित मदों के अनुसार ही किया जाएगा । उसमें कोई बदलाव नहीं होगा ।
- वित्तीय वर्ष 2022-23 एवं पश्चातवर्ती वर्ष: वित्तीय वर्ष 2022-23 और उसके बाद के सभी वर्षों में प्राप्त होने वाली गौण खनिज राशि का संवितरण और व्यय पूरी तरह से इस नवीन आदेश (New Order) की शर्तों के अनुरूप ही किया जाएगा ।
विभाग ने साफ किया है कि वर्ष 2012 के आदेश के शेष मापदण्ड, तथ्य और प्रक्रिया यथावत (Unchanged) रहेंगे और यह नया नियम तत्काल प्रभाव (Immediate Effect) से लागू हो गया है 。
इन अधिकारियों को भेजी गई आदेश की प्रतिलिपि (Official Circular Distribution)
प्रशासनिक पारदर्शिता और त्वरित क्रियान्वयन के लिए इस आदेश की डिजिटल कॉपी (Digitally Signed Order) छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से जारी कर संबंधित विभागों को भेज दी गई है । इसकी प्रतिलिपि महालेखाकार रायपुर, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव, वित्त विभाग के सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव, भौमिकी तथा खनिकर्म संचालक, पंचायत संचालक सहित छत्तीसगढ़ के समस्त कलेक्टरों और जिला/जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEOs) को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की जा चुकी है 。
सरकार के इस कदम से जहां एक ओर खदान प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं (Infrastructure Development) का तेजी से विस्तार होगा, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता (Financial Autonomy) भी मजबूत होगी।







