
नई दिल्ली, न्यूज डेस्क। भारतीय रेलवे (Indian Railways) के लाखों सेवारत कर्मचारियों (Serving Employees) और पेंशनभोगियों यानी रिटायर्ड रेलकर्मियों (Retirees) के लिए रेल मंत्रालय से एक बहुत ही महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने दशकों से चली आ रही एक पारंपरिक व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करने का एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय (Administrative Decision) लिया है।
सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ (Digital India) अभियान को बढ़ावा देने और रेलवे की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से अब रेलवे पास जारी करने की प्रक्रिया में आमूलचूल बदलाव कर दिया गया है।
रेलवे बोर्ड की तरफ से जारी किए गए ताजा और आधिकारिक आदेश संख्या PC-VII/2020/HRMS/6 के अनुसार, अब भारतीय रेलवे के किसी भी कर्मचारी या रिटायर्ड स्टाफ को हाथ से लिखा हुआ या पहले से छपे हुए कागज (Pre-printed stationery) वाला मैनुअल पास नहीं दिया जाएगा। चाहे आप सेवारत हों, सेवानिवृत्त हों या फिर दिव्यांग (Divyang) कर्मचारी हों, अब सभी के लिए Railway HRMS Pass पोर्टल के जरिए ही पास और पीटीओ (Pass/PTO Module) जेनरेट करना अनिवार्य कर दिया गया है।
क्या है रेलवे बोर्ड का नया आदेश? (The New Directives)
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (एमपीपी) शत्रुघ्न बेहरा (Executive Director, MPP) के हस्ताक्षर से 29 मई 2026 को सभी जोनल रेलवे के जनरल मैनेजरों, पीएसयू (PSUs), सीटीआई (CTIs), आईआरसीटीसी (IRCTC) के सीएमडी और क्रिस (CRIS) के मैनेजिंग डायरेक्टर को एक नया सर्कुलर जारी किया गया है। इस सर्कुलर में साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि ई-पास/पीटीओ जारी करने की व्यवस्था को और अधिक सरल (Simplifying the issue of passes) बनाया जा रहा है।
इस नए नियम के आने के बाद से अब रेलवे विभागों में मिलने वाली पुरानी छपी हुई पास की कॉपियां या मैनुअल स्टेशनरी (Pre-printed stationery) इतिहास का हिस्सा बन जाएंगी। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी क्लर्क या बाबू के पास यह अधिकार नहीं होगा कि वह हाथ से लिखकर कोई भी फिजिकल पास जारी कर सके।
दिव्यांगों और रिटायर्ड कर्मचारियों को मिली यह विशेष व्यवस्था (Special Provision for Divyang and Retirees)
नए दिशानिर्देशों के तहत इस व्यवस्था में एक बड़ा तकनीकी बदलाव (Technical Update) किया गया है:
- आवेदन का तरीका: यदि कोई दिव्यांग कर्मचारी या रिटायर्ड रेलकर्मी तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण ऑनलाइन पास जेनरेट नहीं कर पाता है, तो वह मैनुअल मोड (Manual Mode) में आवेदन दे सकता है।
- पास जारी होने का तरीका: उनके इस मैनुअल अनुरोध को भी संबंधित रेलवे स्टाफ द्वारा HRMS पोर्टल के भीतर ही प्रोसेस किया जाएगा।
- अंतिम आउटपुट: इसके बाद जो पास जेनरेट होगा, वह भी पूरी तरह से डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में ही कंप्यूटर द्वारा तैयार किया जाएगा, न कि पुरानी प्री-प्रिंटेड कॉपियों पर।
जानिए HRMS ई-पास मॉड्यूल का पूरा इतिहास (History of e-Pass/PTO Module)
भारतीय रेलवे ने अपने सभी कर्मचारियों के मानव संसाधन प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम यानी HRMS की शुरुआत की थी।
- लॉन्चिंग की तारीख: रेलवे में ई-पास/पीटीओ मॉड्यूल (E-Pass/PTO Module of HRMS) को आधिकारिक तौर पर 10 अगस्त 2020 को लॉन्च किया गया था।
- सफलतापूर्वक संचालन: लॉन्च होने के बाद से ही इसे पूरे भारतीय रेलवे (All Indian Railways) में पूरी तरह से क्रियान्वित और ऑपरेशनल कर दिया गया था।
- दायरे का विस्तार: शुरुआत में यह सुविधा केवल कार्यरत कर्मचारियों के लिए थी, लेकिन बाद में इसकी सफलता को देखते हुए इसका दायरा बढ़ाया गया। इसमें सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए मिलने वाले पोस्ट रिटायरमेंट कॉम्प्लीमेंट्री पास (PRCP) और कर्मचारी की मृत्यु के बाद मिलने वाले पास (Post-death passes) को भी जोड़ दिया गया था।
वर्तमान में रेलवे के सभी सेवारत कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार प्रिविलेज पास (Privilege Passes), पीटीओ (PTOs) और ड्यूटी चेक पास (Duty Cheque Passes) केवल और केवल HRMS के माध्यम से ही प्राप्त कर रहे हैं।
इस नए डिजिटल फैसले के बड़े फायदे (Key Benefits of Digitalization)
रेलवे बोर्ड का यह फैसला ई-गवर्नेंस (e-Governance) की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाला है। इस नए डिजिटल सिस्टम से रेलवे और कर्मचारियों दोनों को कई महत्वपूर्ण फायदे (Advantages) होने वाले हैं:
अधिकारियों को जारी हुए सख्त निर्देश (Strict Instructions to All Zones)
रेलवे बोर्ड के इस नए आदेश को बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से देश के सभी रेलवे जोनों (Zonal Railways) में लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट कहा है कि इस संबंध में सभी आवश्यक और संबंधित दिशानिर्देश (Necessary Instructions) सभी डिवीजनों, कारखानों और संबंधित विभागों को तुरंत जारी कर दिए जाएं, ताकि ग्राउंड लेवल पर किसी भी प्रकार का कोई कन्फ्यूजन या भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
यह पूरा निर्णय रेलवे बोर्ड के एस्टेब्लिशमेंट (वेलफेयर) निदेशालय की उचित सलाह और सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) की अंतिम मंजूरी के बाद ही पूरे देश में एक साथ लागू किया गया है।
रेलवे से जुड़ी इस तकनीकी और प्रशासनिक खबर पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि पूरी तरह से डिजिटल पास व्यवस्था लागू होने से रिटायर्ड और बुजुर्ग कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा या यह व्यवस्था वाकई उनके लिए मददगार साबित होगी? ताज़ा अपडेट्स (Latest Railway Updates) के लिए chaturpost.com को फॉलो करना न भूलें।







