
नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के शासकीय विभागों, निगमों और मंडलों में कार्यरत लाखों गैर-नियमित कर्मचारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक बेहद संवेदनशील और बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department – GAD) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत एक नया कड़ा दिशा-निर्देश (F.No. RULE-8/10/2026-GAD-7) जारी किया है।
इस नए आदेश के बाद राज्य में कार्यरत संविदा (Contractual Employees), दैनिक वेतन भोगी (Daily Wage Workers) और आउटसोर्सिंग (Outsourced Staff) कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में कानूनी कार्यवाही (Legal Action) का पूरा पैटर्न बदल गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब भ्रष्ट आचरण पर किसी को भी प्रशासनिक कवच (Administrative Cover) नहीं मिलेगा।
संविदा और दैनिक वेतन भोगियों को रेगुलर स्टाफ की तरह ट्रीट करेगी सरकार
जीएडी द्वारा जारी कड़े परिपत्र के बिंदु क्रमांक 5 के अनुसार, अब विभागों में कार्यरत संविदा और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में नियमित (Regular) शासकीय सेवकों के समान ही माना जाएगा।
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इसका सीधा मतलब यह है कि यदि किसी संविदा या दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत मिलती है या एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) या ईओडब्ल्यू (EOW) की जांच में वे दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सीधे अदालत में चालान पेश नहीं किया जा सकता। इसके लिए विभाग को पूरी कानूनी प्रक्रिया (Legal Procedure) अपनानी होगी:
आउटसोर्स और मानदेय कर्मचारियों पर गिरेगी सीधी गाज, सुरक्षा कवच खत्म
इस नए आदेश में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला झटका आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले कर्मचारियों और मानदेय कर्मियों (Honorarium Workers) को लगा है। जीएडी ने इनके कानूनी दर्जे को पूरी तरह अलग कर दिया है।
आदेश में साफ किया गया है कि चूंकि आउटसोर्स कर्मचारी सीधे सरकार के कर्मचारी नहीं होते हैं और वे किसी निजी प्लेसमेंट एजेंसी (Placement Agency) के माध्यम से सरकारी दफ्तरों में सेवाएं दे रहे होते हैं, इसलिए उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कोई प्रशासनिक संरक्षण नहीं मिलेगा।
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- कोई अभियोजन स्वीकृति जरूरी नहीं: आउटसोर्स और मानदेय पर काम करने वाले कर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में अदालत में चालान पेश करने के लिए किसी भी तरह की पूर्वानुमति या अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Approval) की आवश्यकता नहीं होगी।
- सीधे दर्ज होगी एफआईआर: जांच एजेंसियां या संबंधित विभाग इनके खिलाफ गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर अदालती कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।
प्राइवेट कंप्लेंट पर संविदा कर्मियों को मिलेगा पक्ष रखने का मौका
अक्सर देखा जाता है कि आपसी रंजिश या झूठी शिकायतों के आधार पर भी संविदा या गैर-नियमित कर्मचारियों को फंसाने की कोशिश की जाती है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों (Supreme Court Principles) का हवाला देते हुए सरकार ने एक बड़ी राहत भी दी है।
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यदि कोई आम नागरिक या शिकायतकर्ता कोर्ट के माध्यम से सीधे किसी संविदा कर्मचारी के खिलाफ निजी परिवाद (Private Complaint) दर्ज कराकर अभियोजन की मंजूरी मांगता है, तो सक्षम प्राधिकारी आंख मूंदकर मंजूरी नहीं देगा। आदेश के अनुसार, संबंधित कर्मचारी को सुनवाई का उचित अवसर (Opportunity of Being Heard) देना अनिवार्य होगा। कर्मचारी का पक्ष सुनने के बाद ही सक्षम प्राधिकारी 3 महीने के भीतर सकारण आदेश (Speaking Order) जारी करेगा।
मानदेय कर्मियों पर भी कस गया शिकंजा
छत्तीसगढ़ के विभिन्न विभागों में काम करने वाले मानदेय कर्मी (जैसे पंचायत, शिक्षा या स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जमीनी स्तर के कर्मी) भी अब इस दायरे में आ गए हैं। सरकार ने साफ किया है कि मानदेय भोगी कर्मचारियों को भी आउटसोर्स की श्रेणी के समतुल्य मानते हुए बिना किसी शासकीय मंजूरी के सीधे अभियोजन के दायरे में लाया जाएगा।
चतुरपोस्ट एनालिसिस: छत्तीसगढ़ सरकार के इस कदम से यह साफ हो गया है कि शासकीय दफ्तरों में भ्रष्टाचार की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करने की तैयारी है। जहां एक तरफ संविदा और दैनिक वेतन भोगियों को रेगुलर स्टाफ की तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत लाया गया है, वहीं प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए आने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों पर सीधी एफआईआर की तलवार लटक गई है। इस आदेश के बाद प्लेसमेंट एजेंसियों और आउटसोर्स कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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यह विशेष रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र क्रमांक F.No. RULE-8/10/2026-GAD-7 के विश्लेषण पर आधारित है।







