
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बिजली नियामक आयोग (CSERC) ने सोमवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य में लागू होने वाली बिजली की नई दरों की आधिकारिक घोषणा (Official Announcement) कर दी है। आयोग के कार्यालय में आयोजित एक प्रेसवार्ता (Press Conference) में आयोग के सदस्य विवेक गनोदवाले और अजय कुमार सिंह ने इस नए टैरिफ ऑर्डर (New Tariff Order) की विस्तृत जानकारी साझा की है। प्रेसवार्ता में आयोग के सचिव सूर्य प्रकाश शुक्ला भी मौजूद थे।
अगर आप छत्तीसगढ़ के निवासी हैं, तो आपको यह जानना जरूरी है कि राज्य में CG Electricity Tariff 2026 की ये नई दरें आगामी 1 जुलाई, 2026 से पूरी तरह प्रभावशील (Effective) हो जाएंगी। बिजली वितरण कंपनी (CSPDCL) ने आयोग के सामने भारी-भरकम घाटा दिखाते हुए दरों में लगभग 24 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव (Revenue Proposal) रखा था, लेकिन नियामक आयोग ने आम जनता के हितों की रक्षा करते हुए केवल 6.23 प्रतिशत की औसत वृद्धि (Average Hike) को ही मंजूरी दी है।
घरेलू उपभोक्ताओं (Domestic Consumers) पर क्या होगा असर?
नियामक आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 पैसे से लेकर 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि (Energy Charge Hike) की गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि निम्न दाब घरेलू (LV-1) श्रेणी में 5 किलोवाट (kW) तक के संबद्ध भार (Connected Load) पर तय फिक्स चार्ज (Fixed Charges) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
आइए छोटे और सरल पैराग्राफ में समझते हैं कि आपकी मासिक खपत (Monthly Consumption) के आधार पर आपके बिल पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा:
- 100 यूनिट की खपत पर: अगर आपके घर में हर महीने केवल 100 यूनिट बिजली जलती है, तो पहले ₹4.10 प्रति यूनिट की दर से ऊर्जा प्रभार ₹410 आता था। अब नई दर ₹4.40 प्रति यूनिट होने से यह ₹440 आएगा। आपकी जेब पर हर महीने सिर्फ ₹30 का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
- 200 यूनिट की खपत पर: राज्य की क्रमिक टैरिफ (Telescopic Tariff) प्रणाली के अनुसार, 200 यूनिट जलाने पर अब आपको कुल ₹890 का ऊर्जा प्रभार देना होगा। पुरानी दरों के मुकाबले इसमें ₹60 प्रति माह की बढ़ोतरी होगी।
- 300 यूनिट की खपत पर: मध्यमवर्गीय परिवारों में जहां कूलर या एसी का उपयोग होता है और मासिक खपत 300 यूनिट पहुंचती है, उनका नया बिल अब ₹1,490 (ऊर्जा प्रभार) आएगा, जो पहले से ₹100 अधिक होगा।
- 500 यूनिट की खपत पर: भारी उपकरण चलाने वाले बड़े घरों में 500 यूनिट की खपत होने पर नया बिल ₹2,790 बनेगा। ऐसे उपभोक्ताओं को पुराने बिल की तुलना में ₹180 प्रति माह ज्यादा चुकाने होंगे।
प्रमुख टैरिफ श्रेणियां: एक नज़र में नया तुलनात्मक चार्ट (Quick Reference Chart)
पाठकों की सुविधा के लिए हमने आयोग द्वारा स्वीकृत आधिकारिक डेटा के आधार पर यह तालिका तैयार की है, ताकि आप वर्तमान दरों (Current Rates) और संशोधित नई दरों (Revised Rates) का अंतर आसानी से समझ सकें:
आदेश की बड़ी बातें: किसे मिली राहत, किसे लगा झटका? (Key Takeaways)
बिजली नियामक आयोग ने इस नए आदेश (Tariff Order) में समाज के विभिन्न वर्गों को ध्यान में रखते हुए कई नीतिगत बदलाव (Policy Changes) किए हैं। Google Discover के पाठकों के लिए मुख्य बुलेट पॉइंट्स नीचे दिए जा रहे हैं:
- स्ट्रीट लाइट टैरिफ में बड़ी राहत: स्थानीय निकायों (Municipal Bodies) और छत्तीसगढ़ आवास बोर्ड की कॉलोनियों में स्ट्रीट लाइट तथा सार्वजनिक जल आपूर्ति प्रणालियों को अब ‘गैर-घरेलू’ श्रेणी से हटाकर ‘घरेलू उपभोक्ता’ (LV-1) श्रेणी में ट्रांसफर कर दिया गया है। इससे निकायों का बिजली खर्च काफी कम होगा।
- किसानों को संबल: गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंप कनेक्शनों (Non-Subsidized Agri Pumps) को मिलने वाली ऊर्जा प्रभार छूट को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जो किसानों के लिए एक बेहतरीन खबर है।
- आदिवासी क्षेत्रों को रियायत बरकरार: बस्तर, सरगुजा सहित राज्य के उत्तर और दक्षिण आदिवासी विकास प्राधिकरणों के तहत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों, नर्सिंग होम और हॉस्टलों को मिलने वाली 10% की विशेष छूट आगे भी जारी रहेगी।
- डिजिटल पेमेंट पर इंसेंटिव में बदलाव: बिजली बिल का एडवांस पेमेंट (Advance Payment) करने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली छूट को 1.25% से घटाकर 0.75% कर दिया गया है। इसी तरह प्रीपेड मीटर (Prepaid Meter) वाले उपभोक्ताओं की छूट भी 1.5% से घटाकर 1% की गई है।
- लेट पेमेंट पर अब प्रतिदिन के हिसाब से चार्ज: आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए विलंबित भुगतान अधिभार (Delay Payment Surcharge) को 1.5% प्रति माह के फ्लैट रेट से बदलकर अब 0.04% प्रति दिन कर दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं पर पेनाल्टी का बोझ व्यावहारिक होगा।
आयोग ने खारिज किया वितरण कंपनी का भारी-भरकम दावा
समाचार के आर्थिक पहलू (Financial Aspect) का विश्लेषण करें तो छत्तीसगढ़ राज्य बिजली वितरण कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹32,520 करोड़ की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) और ₹6,304 करोड़ के भारी राजस्व घाटे (Revenue Deficit) का अनुमान लगाया था। कंपनी इस घाटे की भरपाई उपभोक्ताओं से भारी टैरिफ हाइक के माध्यम से करना चाहती थी।
नियामक आयोग (CSERC) ने अपने न्यायिक और तकनीकी विशेषज्ञता (Technical Expertise) का उपयोग करते हुए कंपनी के दावों की गहन स्क्रूटनी (Scrutiny) की। आयोग ने वार्षिक राजस्व आवश्यकता को संशोधित कर ₹28,348 करोड़ और वास्तविक राजस्व घाटे को केवल ₹1,662 करोड़ ही मान्य किया। आयोग के इसी कड़े रुख के कारण छत्तीसगढ़ की जनता एक बहुत बड़े ‘बिजली करंट’ यानी भारी मूल्य वृद्धि से बच गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि CG Electricity Tariff 2026 का यह फैसला संतुलित है, जो एक तरफ बिजली कंपनियों को वित्तीय रूप से बनाए रखेगा, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई के बीच आम आदमी, किसानों और कुटीर उद्योगों को सुरक्षित रखेगा। नई दरें 1 जुलाई से जारी होने वाले चक्र (Billing Cycle) में जुड़कर आएंगी।
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CG Electricity Tariff 2026: अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
उत्तर: छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के आदेश के अनुसार, संशोधित बिजली दरें 1 जुलाई, 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी (Effective) हो जाएंगी। इसके बाद आने वाले बिलों में नई दरें जुड़कर आएंगी।
उत्तर: घरेलू उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ स्लैब के आधार पर 30 पैसे से लेकर 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है।
0 से 200 यूनिट तक: 30 पैसे की बढ़ोतरी
201 से 600 यूनिट तक: 40 पैसे की बढ़ोतरी
601 यूनिट से अधिक पर: 50 पैसे की बढ़ोतरी की गई है।
उत्तर: मध्यमवर्गीय और छोटे परिवारों के लिए यह राहत की बात है कि 1 से 200 यूनिट तक की मासिक खपत वाले उपभोक्ताओं (5 किलोवाट लोड तक) के लिए अनिवार्य फिक्स चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह पहले की तरह ही ₹20 प्रति किलोवाट प्रति माह पर अपरिवर्तित (Unchanged) है।
उत्तर: कृषि उपभोक्ताओं (LV-3) के लिए ऊर्जा प्रभार ₹5.80 से बढ़ाकर ₹6.20 प्रति यूनिट किया गया है। हालांकि, नियामक आयोग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंप कनेक्शनों को मिलने वाली छूट को 30% से बढ़ाकर 40% कर दिया है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
उत्तर: पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशनों (HV-11 श्रेणी) के टैरिफ में बहुत मामूली वृद्धि की गई है। इसे ₹6.32 प्रति यूनिट से बढ़ाकर ₹6.42 प्रति यूनिट (औसत विद्युत लागत के बराबर) तय किया गया है।
उत्तर: आयोग ने उपभोक्ताओं के हित में नियमों को और सरल किया है। अब तक विलंबित भुगतान अधिभार (Delay Payment Surcharge) फ्लैट 1.5% प्रति माह लगता था, जिसे बदलकर अब 0.04% प्रति दिन कर दिया गया है। यानी अब आपको केवल उतने ही दिनों का जुर्माना देना होगा जितनी देरी हुई है।
उत्तर: हाँ, डिजिटल और एडवांस पेमेंट को मिलने वाले इंसेंटिव में थोड़ी कटौती की गई है:
अग्रिम भुगतान (Advance Payment) पर मिलने वाली छूट 1.25% से घटाकर 0.75% कर दी गई है।
प्रीपेड मीटर (Prepaid Meter) वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली छूट भी 1.5% से घटाकर 1% कर दी गई है।
उत्तर: बिजली वितरण कंपनी (CSPDCL) ने अपने भारी वित्तीय घाटे का हवाला देते हुए दरों में लगभग 24 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था। लेकिन आयोग ने गहन समीक्षा के बाद जनता को बड़ी राहत देते हुए केवल 6.23 प्रतिशत की औसत वृद्धि को ही मंजूरी दी है।







