
रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार ने ग्रामीण व्यवस्था और जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कामकाज को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए एक बेहद बड़ा कदम उठाया है. राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (Panchayat and Rural Development Department) ने वर्षों पुराने पंचायत नियमों में आमूलचूल बदलाव करने का एक महत्वपूर्ण ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसे आधिकारिक तौर पर छत्तीसगढ़ राजपत्र (Chhattisgarh Gazette) में प्रकाशित भी कर दिया गया है.
विभाग के सचिव धर्मेंद्र कुमार साहू (Secretary Dharmendra Kumar Sahu) के हस्ताक्षर से जारी इस अधिसूचना (Notification) के बाद प्रदेश की ग्राम पंचायतों में स्थायी समितियों (Standing Committees) के गठन, उनके सदस्यों की संख्या और उनके संचालन की पूरी प्रक्रिया बदलने जा रही है. सरकार ने “छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत (स्थायी समिति के सदस्यों की पदावधि और कामकाज के संचालन की प्रक्रिया) नियम, 1994” में व्यापक संशोधन का प्रारूप (Draft Amendment) पेश किया है, जिस पर आम जनता से 15 दिनों के भीतर दावे-आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं.
इस नए बदलाव के तहत ग्राम पंचायतों में अब पानी, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन (Waste Management) को लेकर एक बेहद ताकतवर और नई समिति का गठन किया जा रहा है. इस समिति की संरचना और इसमें महिलाओं व विभिन्न वर्गों की भागीदारी को लेकर सरकार ने कड़े और नए नियम तय कर दिए हैं.
समिति की नई संरचना: पंच चुनेंगे 4 सदस्य, 6 अन्य सदस्य भी होंगे शामिल (Committee Structure)
नए नियमों के मुताबिक, इस विशेष समिति का गठन बहुत ही लोकतांत्रिक और समावेशी तरीके से किया जाएगा. समिति में कुल सदस्यों और उनके चयन की प्रक्रिया (Selection Process) को इस प्रकार निर्धारित किया गया है:
- पंचों द्वारा निर्वाचन (Election by Panchas): प्रत्येक समिति में मुख्य रूप से चार सदस्य (Four Members) होंगे. इन चार सदस्यों का चुनाव ग्राम पंचायत द्वारा इस प्रयोजन के लिए विशेष रूप से बुलाई गई बैठक के दौरान पंचों द्वारा अपने बीच में से ही किया जाएगा.
- 6 अन्य सदस्यों की एंट्री (External Members Entry): इन निर्वाचित चार सदस्यों के अतिरिक्त, समिति में छह अन्य सदस्यों (Six Other Members) को भी शामिल किया जा रहा है, जो गांव के विकास में सीधा योगदान देते हैं.
- इन वर्गों को मिलेगा अनिवार्य प्रतिनिधित्व: इन 6 अन्य सदस्यों में महिला स्व-सहायता समूह (Women Self Help Group – SHG) के सदस्य, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता (Anganwadi Worker), मितानिन, पम्प ऑपरेटर, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के स्वच्छाग्राही और अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य होगा.
कौन होगा समिति का सभापति? तय हो गया बड़ा फॉर्मूला (Who will lead the Committee?)
पंचायतों में अक्सर इस बात को लेकर विवाद होता था कि समितियों का नेतृत्व या अध्यक्षता कौन करेगा. सरकार ने नए संशोधन के उप-नियम (3) में इसका भी स्पष्ट वर्गीकरण (Clear Classification) कर दिया है:
- सरपंच संभालेंगे कमान: ग्राम पंचायत के सरपंच ही सामान्य प्रशासन समिति तथा इस नई ‘ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति’ के पदेन सभापति (Chairman) होंगे.
- उप-सरपंच के पास होगी ये जिम्मेदारी: ग्राम पंचायत के उप-सरपंच, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा समाज कल्याण समिति के सभापति होंगे.
- अन्य स्थायी समितियां: शेष बची स्थायी समितियों के लिए, ग्राम पंचायत द्वारा विशेष रूप से आहूत की गई बैठक में संबंधित समितियों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने बीच में से ही सभापति का निर्वाचन किया जाएगा.
- कड़ा नियम: सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई भी पंच एक से अधिक स्थायी समिति का सभापति नहीं हो सकता. इसके अलावा, समिति के निर्वाचन के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता संबंधित क्षेत्र के उप-खण्ड अधिकारी (राजस्व) यानी SDM द्वारा नियुक्त अधिकारी द्वारा की जाएगी.
15 दिनों के भीतर मंगाई गई हैं आपत्तियां (Inviting Objections and Suggestions)
चूंकि यह अभी एक संशोधन प्रारूप (Draft Amendment) है, इसलिए सरकार ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आम जनता और जनप्रतिनिधियों से सुझाव मांगे हैं. यदि किसी भी व्यक्ति को इन प्रस्तावित नियमों को लेकर कोई आपत्ति (Objections) या सुझाव देना है, तो वह राजपत्र में प्रकाशन की तारीख (12 जून 2026) से 15 दिनों के भीतर अपना लिखित आवेदन सौंप सकता है.
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