
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) ने पावर कंपनियों की एक वर्षों पुरानी व्यवस्था को बदल दिया है । पावर कंपनी प्रबंधन ने उच्च शिक्षा (Higher Education) हासिल करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों में आमूलचूल परिवर्तन किया है ।
कंपनी की चीफ इंजीनियर (HR) रश्मी वर्मा (Chief Engineer Rashmi Verma) के हस्ताक्षर से दो अलग-अलग महत्वपूर्ण सर्कुलर (Important Circulars) जारी किए गए हैं । इन आदेशों के तहत वर्षों से चली आ रही अग्रिम वेतन वृद्धि (Advance Increments) की पारंपरिक व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है । इसकी जगह अब केंद्र सरकार के 7वें वेतनमान (7th Pay Commission) की सिफारिशों के आधार पर एक नई CSPTCL Incentive Scheme लागू की गई है ।
इस नए नियम के लागू होने के बाद, अब सेवाकाल के दौरान उच्च शैक्षणिक योग्यता (Higher Qualification) प्राप्त करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को हर महीने वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें सीधे एकमुश्त प्रोत्साहन राशि (One-time Lump Sum Amount) का भुगतान किया जाएगा । यह राशि ₹10,000 से लेकर ₹30,000 तक निर्धारित की गई है ।
शैक्षणिक योग्यता के अनुसार प्रोत्साहन राशि की तालिका (Incentive Structure)
विभागीय आदेश के अनुसार, अलग-अलग पाठ्यक्रमों और डिग्रियों की अवधि के आधार पर राशि का निर्धारण किया गया है । कर्मचारियों को मिलने वाली सहायता राशि का पूरा विवरण (Details) इस प्रकार है:
- ₹30,000 की राशि: पीएचडी, डी.एससी., डी.फिल. और डी.लिट. (PhD / D.Sc. / D. Phil. / D. Litt.) जैसी सर्वोच्च शैक्षणिक उपाधि हासिल करने पर मिलेगी ।
- ₹25,000 की राशि: न्यूनतम 1 वर्ष या उससे अधिक की अवधि वाले पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री (PG Degree) कोर्स के लिए दी जाएगी ।
- ₹20,000 की राशि: कम से कम 1 वर्ष या उससे अधिक अवधि के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (PG Diploma) कोर्स को पूरा करने पर देय होगी ।
- ₹15,000 की राशि: 3 वर्ष या उससे अधिक अवधि वाले किसी भी रेगुलर डिग्री या डिप्लोमा (Degree / Diploma) कोर्स के लिए निर्धारित है ।
- ₹10,000 की राशि: 1 वर्ष या उससे अधिक अवधि के अन्य मान्यता प्राप्त डिग्री अथवा डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए दी जाएगी ।
नई प्रोत्साहन योजना की कड़ी शर्तें (Strict Eligibility Criteria)
इस CSPTCL Incentive Scheme का लाभ उठाना इतना आसान भी नहीं होगा। कंपनी ने इसके लिए बेहद कड़े नियम और शर्तें (Terms and Conditions) तय की हैं, ताकि इस योजना का दुरुपयोग न हो सके । इन शर्तों को पूरा करने वाले कर्मचारी ही आवेदन के पात्र (Eligible Employees) माने जाएंगे:
- पूर्व लिखित अनुमति (Prior Permission): उच्च शिक्षा की पढ़ाई शुरू करने से पहले कर्मचारियों को अपने क्षेत्रीय या मुख्यालय के कार्यपालक निदेशक (Executive Director) या मुख्य अभियंता (Chief Engineer) से लिखित में औपचारिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा ।
- कार्य और शिक्षा का सीधा संबंध (Direct Nexus): सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि अर्जित की गई उच्च योग्यता कर्मचारी के वर्तमान पद या भविष्य में मिलने वाले अगले उच्च पद के कार्यों से सीधे तौर पर संबंधित होनी चाहिए । इससे कर्मचारी की कार्यकुशलता (Efficiency) बढ़नी चाहिए । केवल अकादमिक या साहित्यिक विषयों (Academic or Literary Subjects) पर यह राशि कतई नहीं मिलेगी ।
- एक वर्ष की नियमित सेवा (Regular Service): यह लाभ केवल सेवा में आने (Induction in Service) और नियमितीकरण की तारीख से कम से कम 1 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी होने के बाद ही दिया जाएगा । यदि कोई कर्मचारी नियुक्ति से पहले से पढ़ाई कर रहा है, तो उसे सक्षम प्राधिकारी से विशेष स्वीकृति (Competent Approval) लेनी होगी ।
- अनिवार्य योग्यता पर लाभ नहीं (Essential Qualification): यदि वह उच्च शिक्षा संबंधित पद की सीधी भर्ती के विज्ञापन या नियमों में पहले से ही ‘अनिवार्य’ या ‘वांछनीय’ योग्यता के रूप में दर्ज है, तो उस पर कोई प्रोत्साहन राशि नहीं मिलेगी ।
कार्यालयों के लिए 20% का कड़ा कोटा नियम (Office Quota Limit)
इस नीति का एक और तकनीकी पहलू (Technical Aspect) यह है कि कंपनी ने कार्यालयीन कामकाज को प्रभावित होने से बचाने के लिए एक वित्तीय वर्ष में उच्च शिक्षा की अनुमति के लिए एक कोटा (Strict Quota) तय कर दिया है । किसी भी एक दफ्तर या विंग में पदस्थ कुल अधिकारी-कर्मचारियों की कुल संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत को ही एक वित्तीय वर्ष (Financial Year) में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति दी जाएगी ।
पावर कंपनी के कार्यपालक निदेशक (ED) या मुख्य अभियंता (HR) को ही पात्रता के संबंध में अंतिम निर्णय (Binding Decision) लेने का अधिकार होगा, जो सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर पूरी तरह बाध्यकारी होगा । इसके साथ ही, कर्मचारियों द्वारा दी जाने वाली शैक्षणिक डिग्री का यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC), AICTE या मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी सरकारी नियामक संस्थाओं (Regulatory Bodies) से मान्यता प्राप्त होना अनिवार्य है ।
पुराने और लंबित मामलों पर क्या फैसला हुआ? (Pending Cases Update)
नए नियमों की घोषणा के साथ ही कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठ रहा था कि जिनके मामले पुराने हैं, उनका क्या होगा? इसके लिए चीफ इंजीनियर (HR) ने दूसरा सर्कुलर (Circular-II) जारी कर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है ।
प्रबंधन ने साफ किया है कि जो कर्मचारी 25 सितंबर 2023 से पहले उच्च शैक्षणिक योग्यता अर्जित कर चुके थे और नियमों के तहत अग्रिम वेतन वृद्धि (Advance Increment) के लिए पूरी तरह पात्र हो गए थे, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है । उनके मामलों का निपटारा पुराने नियमों के आधार पर ही किया जाएगा ।
इसके लिए तत्कालीन मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (MPEB) के निम्नलिखित पांच ऐतिहासिक आदेशों का संदर्भ (Reference) लिया जाएगा:
- MPEB आदेश क्रमांक PD-I/127 जबलपुर, दिनांक 03/04/1975
- MPEB आदेश क्रमांक PD-1/42 जबलपुर, दिनांक 15/03/1980
- MPEB आदेश क्रमांक PD-I/71 जबलपुर, दिनांक 06/06/1980
- MPEB आदेश क्रमांक 01-05/1/1-156-A/187 जबलपुर, दिनांक 03/12/1986
- MPEB आदेश क्रमांक 01-05/1/125 जबलपुर, दिनांक 04/05/1987
कंपनी ने अपने निर्देश में स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसे सभी पुराने और स्वीकृत किए जाने वाले मामलों की पूरी सूची संबंधित पावर कंपनी के प्रबंध निदेशक (Managing Director) की जानकारी और संज्ञान में अनिवार्य रूप से लानी होगी, ताकि पारदर्शिता (Transparency) बनी रहे । इस तरह कंपनी ने भूतपूर्व पात्र कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए भविष्य के लिए एक नई पारदर्शी व्यवस्था की नींव रख दी है ।
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