
नई दिल्ली न्यूज डेस्क। देश का ऊर्जा क्षेत्र Energy Sector India में समय एक बड़े नीतिगत और ढांचागत बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जहां एक ओर प्रमुख कॉर्पोरेट घराने अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकारें और नियामक निकाय (Regulatory Bodies) भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित करने के लिए बड़े कदम उठा रहे हैं। जून 2026 की ये घटनाएं देश के पावर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर (Renewable Energy Sector) की नई दिशा तय करने वाली हैं। आइए इन महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
1. कांडला ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना से रिलायंस की रणनीतिक वापसी
गुजरात के कांडला क्षेत्र में प्रस्तावित देश की महत्वाकांक्षी ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया ट्रांसमिशन परियोजना (Green Hydrogen Transmission Project) फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए रुक गई है। भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूह रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Ltd.) ने इस परियोजना की निविदा प्रक्रिया (Bidding Process) से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।
राष्ट्रीय ट्रांसमिशन समिति (NCT) के आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस हब के लिए डेवलपर्स की ओर से कोई औपचारिक जनरल नेटवर्क एक्सेस (GNA) आवेदन प्राप्त नहीं हुआ था। यह परियोजना कांडला में 3 GW का ग्रीन हाइड्रोजन हब विकसित करने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। इस नए घटनाक्रम के बाद, सहयोगी लकाड़िया फेज-II ट्रांसमिशन योजना में संशोधन किया गया है, जिससे इसकी अनुमानित परियोजना लागत (Project Cost) बढ़कर ₹8,238 करोड़ हो गई है।
2. महाराष्ट्र में ₹11,700 करोड़ की ट्रांसमिशन परियोजनाओं को वित्तीय मंजूरी
महाराष्ट्र ट्रांसमिशन कमेटी (MTC) ने राज्य के पावर ग्रिड को आधुनिक बनाने के लिए ₹11,700 करोड़ से अधिक के मेगा निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मुंबई और पुणे जैसे आर्थिक केंद्रों में बिजली की बढ़ती मांग को स्थिरता प्रदान करना है।
- गढ़चिरौली का ग्रिड विस्तार: इस पिछड़े क्षेत्र में बिजली आपूर्ति सुधारने के लिए नए 400/220 kV और 400/132 kV सबस्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
- पुणे आईटी कॉरिडोर: पुणे के हिंजेवाड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कॉरिडोर (IT Corridor) के लिए ₹110 करोड़ की समर्पित ट्रांसमिशन योजना मंजूर की गई है।
- मुंबई नेटवर्क अपग्रेड: मुंबई महानगर की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता बढ़ाई जाएगी।
- क्लीन एनर्जी इंटीग्रेशन: राज्य के जालना, लातूर और धुले क्षेत्रों से लगभग 6,000 MW सौर और पवन ऊर्जा को मुख्य ग्रिड से जोड़ने (Evacuation) की योजना को मंजूरी दी गई है।
3. ग्रिड स्थिरता के लिए CEA का नया तकनीकी शासनादेश
देश के पावर सिस्टम में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ ही तकनीकी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने अब ग्रिड की सुरक्षा (Grid Stability) के लिए Grid Forming Inverters (GFM) तकनीक को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है।
इस निर्णय की पृष्ठभूमि (Background): > हाल ही में 13 मई 2026 को खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी कॉम्प्लेक्स में आई एक तकनीकी खराबी के कारण लगभग 9,000 MW का उत्पादन ठप हो गया था। ग्रिड-इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मात्र 16 सेकंड के भीतर 17 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (EHV) ट्रांसमिशन लाइनें ट्रिप हो गई थीं। भविष्य में ऐसे तकनीकी व्यवधानों को रोकने के लिए, अब 50 MW से अधिक की सभी नई बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) और 25% नई रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता के लिए GFM इनवर्टर का उपयोग अनिवार्य होगा।
4. राजस्थान में PM-KUSUM परियोजनाओं के लिए ₹531 करोड़ की केंद्रीय सहायता
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने राजस्थान में कृषि क्षेत्र के सौरतीकरण (Solarization) को गति देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना के कंपोनेंट-सी के तहत 553 सौर ऊर्जा उत्पादकों के लिए ₹531 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) जारी की गई है।
- जोधपुर डिस्कॉम: इसके अंतर्गत आने वाले 432 प्रोजेक्ट्स के लिए ₹379.41 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
- अजमेर डिस्कॉम: इसके तहत 121 प्रोजेक्ट्स के लिए ₹151.21 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
- इस वित्तीय सहायता से राज्य में कुल 598 MW की अतिरिक्त स्थापित क्षमता (Installed Capacity) विकसित होगी। वर्तमान में राजस्थान इस योजना के तहत 3,371 MW की विकेंद्रीकृत सौर परियोजनाओं के साथ देश में शीर्ष पर है।
5. कॉर्पोरेट कंसॉलिडेशन और महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौते
भारतीय Energy Sector India में इस वित्तीय वर्ष में कंपनियों के बीच विलय, अधिग्रहण (Acquisitions) और नए गठबंधनों में तेजी देखी जा रही है:
- ऑयल इंडिया का वैश्विक अनुसंधान सहयोग: ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने कनाडा के पेट्रोकेमिकल टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (PTRC) के साथ कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उपयोग और एन्हांस्ड ऑयल रिकवरी (EOR) तकनीकों पर संयुक्त अनुसंधान के लिए एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
- शक्ति पंप्स का विनिर्माण विस्तार: शक्ति पंप्स ने मध्य प्रदेश के पीथमपुर में 2.20 GW क्षमता की ग्रीनफील्ड सौर सेल और फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी SESL में ₹10 करोड़ का अतिरिक्त निवेश किया है।
- जेएसडब्ल्यू एनर्जी का छत्तीसगढ़ में अधिग्रहण: जेएसडब्ल्यू एनर्जी लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ के कोरबा में स्थित 300 MW के मारुति क्लीन कोल एंड पावर थर्मल प्लांट का ₹1,410 करोड़ के एंटरप्राइज वैल्यू पर 100% इक्विटी अधिग्रहण करने का निश्चित समझौता किया है।
- एचजी इन्फ्रा की निविदा में जीत: एचजी इन्फ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया (TBCB) के तहत अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और पावर ग्रिड जैसी दिग्गज कंपनियों को पीछे छोड़ते हुए झारखंड में ₹912 करोड़ का ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट हासिल किया है।
6. बिहार में सौर ऊर्जा के विकास के लिए ₹804 करोड़ के वाणिज्यिक आदेश
बिहार के ऊर्जा ढांचे में नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए ‘पीएम सूर्य घर – मुफ्त बिजली योजना’ के तहत बड़े टेंडर जारी किए गए हैं। सुग्स लॉयड लिमिटेड और ओसवाल पंप्स लिमिटेड को बिहार की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) से कुल ₹804 करोड़ के रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स के कार्यान्वयन के आदेश मिले हैं। ये परियोजनाएं CAPEX प्लस RESCO मॉडल के तहत संचालित की जाएंगी, जिसमें 10 वर्षों का संचालन और रखरखाव (O&M) शामिल है।
7. महाराष्ट्र की संशोधित ‘ग्रीन डेटा सेंटर पार्क‘ नीति
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने अपनी एकीकृत ग्रीन डेटा सेंटर पार्क नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नए सरकारी प्रस्ताव (Government Resolution) के तहत अनुमत पार्कों की संख्या 3 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है। इसके साथ ही, अनिवार्य हरित ऊर्जा उपयोग की सीमा को 100% से संशोधित कर 51% किया गया है। ₹60,000 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली परियोजनाओं को 20 वर्षों के लिए 1 रुपये प्रति यूनिट की बिजली शुल्क सब्सिडी दी जाएगी।
Chatur विचार
कुल मिलाकर, Energy Sector India का यह परिदृश्य दर्शाता है कि भारतीय ऊर्जा बाजार अब परिपक्वता (Maturity) की ओर बढ़ रहा है। कंपनियों द्वारा परियोजनाओं का पुनर्मूल्यांकन करना और सरकार द्वारा तकनीकी नियमों (जैसे GFM इनवर्टर) को कड़ा करना यह संकेत देता है कि देश अब केवल क्षमता बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि ग्रिड की गुणवत्ता और स्थिरता पर भी समान रूप से ध्यान केंद्रित कर रहा है। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह नीतियां एक पारदर्शी और सुरक्षित बाजार का निर्माण करती हैं।







