
नई दिल्ली (chaturpost. न्यूज डेस्क): भारत के पावर सेक्टर (Power Sector) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। देश में तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy – नवीकरणीय ऊर्जा) के नेटवर्क के बीच ग्रिड की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) ने एक ऐतिहासिक और बेहद कड़ा फैसला लिया है।
अब देश में लगने वाले सभी नए 50 MW से ऊपर के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और सभी नए रिन्यूएबल एनर्जी (RE) प्लांट्स के लिए 25% क्षमता तक Grid Forming Inverters (GFM) लगाना पूरी तरह अनिवार्य (Mandate) कर दिया गया है।
नेशनल कमेटी ऑन ट्रांसमिशन (NCT) की हालिया बैठक में यह आपातकालीन निर्णय लिया गया। यह कदम पिछले महीने गुजरात के खावड़ा में हुए देश के सबसे बड़े ग्रिड हादसे के बाद उठाया गया है, जिसे भारतीय ग्रिड इतिहास का सबसे बड़ा ‘सिंगल-इवेंट जनरेशन लॉस’ माना जा रहा है।
क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला? जानिए खावड़ा का वो खौफनाक मंजर
GRID-INDIA द्वारा नेशनल कमेटी ऑन ट्रांसमिशन (NCT) के सामने पेश की गई विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, 13 मई 2026 को दोपहर 02:09 बजे गुजरात के खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी कॉम्प्लेक्स में एक भयानक तकनीकी खराबी (Grid Disturbance) आई।
इस खराबी के कारण देखते ही देखते महज 16 सेकंड के भीतर तीन बड़े पूलिंग स्टेशन (KPS-1, KPS-2 और KPS-3) पूरी तरह ठप हो गए। इन स्टेशनों की कुल स्थापित क्षमता 15.9 GW थी, जिसमें 14.8 GW वेरिएबल रिन्यूएबल एनर्जी (VRE) और 1.1 GW बैटरी स्टोरेज शामिल था।
हादसे के वो 16 सेकंड: आंकड़ों की जुबानी
- ट्रांसमिशन लाइनें ट्रिप हुईं: देखते ही देखते 17 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (EHV) ट्रांसमिशन लाइनें बंद हो गईं, जिनमें आठ 765 kV की और नौ 400 kV की लाइनें शामिल थीं।
- बिजली का भारी नुकसान: इस हादसे के कारण लगभग 9,000 MW रिन्यूएबल एनर्जी की जनरेशन का अचानक नुकसान (Generation Loss) हुआ।
- ग्रिड फ्रीक्वेंसी में गिरावट: ग्रिड की फ्रीक्वेंसी 49.953 Hz से तेजी से गिरकर 49.398 Hz पर आ गई (0.56 Hz की भारी गिरावट)।
- ऑटोमैटिक लोड शेडिंग: ग्रिड को पूरी तरह क्रैश होने से बचाने के लिए अंडर फ्रीक्वेंसी लोड शेडिंग (UFLS) सिस्टम एक्टिव हुआ, जिससे देश के कई हिस्सों में अचानक 6,000 MW की बिजली काटनी पड़ी (Load Shedding)।
क्या है ग्रिड की कमजोरी की असली वजह?
GRID-INDIA ने खुलासा किया है कि खावड़ा, राजस्थान और पचोरा जैसे विशाल रिन्यूएबल एनर्जी कॉम्प्लेक्स में सिस्टम की मजबूती बेहद कम है। तकनीकी भाषा में इसे लो शॉर्ट सर्किट रेशियो (Low Short Circuit Ratio – SCR) कहा जाता है।
इसी वजह से इन क्षेत्रों में बार-बार लो-फ्रीक्वेंसी ऑसिलेशन (Low-Frequency Oscillations) यानी बिजली के प्रवाह में खतरनाक उतार-चढ़ाव आ रहा है। इसके अलावा, रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट्स में लगे कंट्रोलर्स की सही तरीके से ट्यूनिंग (Improper Tuning) न होना भी एक मुख्य विफलता (Contributing Factor) साबित हुआ है।
नियमों में भारी बदलाव: CEA लागू करने जा रहा है नए टेक्निकल स्टैंडर्ड्स
इस गंभीर संकट को देखते हुए, NCT की बैठक में ग्रिड को सुरक्षित करने के लिए तुरंत नए तकनीकी नियम (New Technical Requirements) लागू करने पर सहमति बनी है।
नए नियमों के मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- BESS के लिए नियम: 50 मेगावाट (MW) से अधिक क्षमता वाले सभी नए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट्स में GFM Inverters लगाना 100% अनिवार्य होगा।
- RE प्लांट्स के लिए नियम: जितने भी नए सौर ऊर्जा (Solar) या पवन ऊर्जा (Wind) प्लांट्स लगेंगे, उन्हें अपनी कुल स्थापित क्षमता के कम से कम 25% हिस्से में ग्रिड फॉर्मिंग इनवर्टर लगाने होंगे।
- कनेक्टिविटी मानकों में संशोधन: CEA अपने कनेक्टिविटी स्टैंडर्ड्स (Connectivity Standards) में तेजी से संशोधन (Amendments) कर रहा है ताकि इन तकनीकी आवश्यकताओं को कानूनी रूप से लागू किया जा सके।
आखिर क्या होते हैं Grid Forming Inverters (GFM)? यह कैसे बचाएंगे ग्रिड?
अब तक भारत के रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट्स में पारंपरिक Grid-Following Inverters का इस्तेमाल होता आया है। ये इनवर्टर ग्रिड की मौजूदा वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी पर निर्भर रहते हैं। अगर ग्रिड में कोई गड़बड़ी आती है, तो ये खुद को संभाल नहीं पाते और ट्रिप हो जाते हैं।
इसके विपरीत, Grid Forming Inverters (GFM) एक बिल्कुल नई और क्रांतिकारी तकनीक (Shift in Inverter Approach) है।
GFM इनवर्टर की 3 सबसे बड़ी खासियतें:
- स्वतंत्र संचालन (Independent Function): ये इनवर्टर ग्रिड पर निर्भर रहने के बजाय खुद का वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी रेफरेंस स्थापित कर सकते हैं।
- सक्रिय सहायता (Active Support): ग्रिड में किसी भी उतार-चढ़ाव या गड़बड़ी (Disturbances) के दौरान ये एक्टिव होकर ग्रिड को तुरंत स्थिरता (Stability) प्रदान करते हैं।
- SCR में सुधार: इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से शॉर्ट सर्किट रेशियो (SCR) की स्थिति सुधरेगी, जिससे खावड़ा जैसे बड़े हादसे दोबारा नहीं होंगे।
भविष्य की तैयारी: थर्मल पावर पर घटेगी निर्भरता
भारत इस समय पारंपरिक थर्मल जनरेशन (Thermal Power Generation – कोयला आधारित बिजली) पर अपनी निर्भरता को कम कर रहा है और तेजी से रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ बढ़ रहा है। सरकार के पास भविष्य के लिए कई बड़े प्लान हैं, जैसे कि बीकानेर-V पूलिंग स्टेशन पर 12 GW की कनेक्टिविटी को मंजूरी दी गई है, जिसमें 6 GW सोलर और 6 GW नॉन-solar क्षमता शामिल है।
यह भी पढ़ें- JSW Energy Acquisition ने छत्तीसगढ़ में मचाई हलचल, 1410 करोड़ में खरीदा कोरबा का यह बड़ा पावर प्लांट
ऐसे में यदि ग्रिड को मजबूत नहीं किया गया, तो आने वाले समय में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि बिजली मंत्रालय (Ministry of Power) के समन्वय से CEA इस नए आदेश को युद्धस्तर पर लागू करने जा रहा है। चतुरपोस्ट की इस खोजी रिपोर्ट से साफ है कि सरकार अब देश की बिजली सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती।






