
नई दिल्ली न्यूज डेस्क। लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर निकलकर सामने आ रही है। 8वें वेतन आयोग 8th Pay Commission के गठन और उसकी सिफारिशों को लागू करने की दिशा में पहला सबसे बड़ा चरण अब आधिकारिक रूप से खत्म हो गया है। विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और पेंशनभोगी समूहों द्वारा अपने मांग पत्र, ज्ञापन और प्रस्ताव Submission of Memorandums and Proposals जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून थी, जो अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
इस समय सीमा के समाप्त होने के साथ ही, अब पूरा फोकस इस बात पर शिफ्ट हो गया है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने आयोग से क्या मांगा है और इसके विपरीत In Contrast, वेतन आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों में किन मांगों को स्वीकार करता है, किसमें संशोधन करता है या किसे पूरी तरह खारिज कर देता है। विभिन्न प्रमुख कर्मचारी निकायों द्वारा सौंपे गए प्रस्तावों में इस बार 8वें वेतन आयोग से कुछ बेहद ऐतिहासिक और बड़ी उम्मीदें लगाई गई हैं।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें: क्या बदलेगा इस बार?
कर्मचारी संगठनों ने जो मांग पत्र सौंपे हैं, उनमें मुख्य रूप से न्यूनतम बेसिक सैलरी Minimum Basic Salary में बड़ी बढ़ोतरी, संशोधित फिटमेंट फैक्टर Revised Fitment Factor, महंगाई भत्ते (DA) का बेसिक पे में विलय, दशकों पुराने फैमिली-यूनिट फॉर्मूले में बदलाव और ओपीएस, एनपीएस व यूपीएस के विवाद के बीच मजबूत पेंशन सुरक्षा Stronger Pension Protections की मांग शामिल है।
वेतन आयोग ने इससे पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि ऑनलाइन माध्यम से प्रस्ताव जमा करने के लिए 15 जून ही अंतिम समय सीमा होगी और इसके बाद किसी भी परिस्थिति में कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। आयोग ने यह भी साफ कर दिया था कि केवल ऑनलाइन प्रविष्टियों पर ही विचार किया जाएगा; ईमेल, पीडीएफ वर्जन या हार्ड कॉपी के रूप में भेजे गए ज्ञापनों को पूरी तरह अमान्य घोषित कर दिया गया है।
न्यूनतम बेसिक पे को लेकर सबसे बड़ी लड़ाई
8वें वेतन आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती और लड़ाई इस बात को लेकर है कि एक सरकारी कर्मचारी की न्यूनतम सैलरी की गणना आखिर किस आधार पर की जानी चाहिए। कर्मचारी संगठनों का पुरजोर तर्क है कि वर्तमान में लागू गणना का तरीका बेहद पुराना हो चुका है। यह पुराने उपभोग पैटर्न Older Consumption Patterns पर आधारित है, जो आज के समय में आधुनिक परिवारों की वास्तविक वित्तीय स्थितियों और खर्चों को बिल्कुल भी नहीं दर्शाता है।
इस संबंध में ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन All India NPS Employees Federation (AINPSEF) ने आयोग को सौंपे गए अपने ज्ञापन में बहुत ही कड़े शब्दों में कहा है कि वर्तमान मजदूरी गणना ढांचा समकालीन पारिवारिक जरूरतों की वास्तविकताओं से कोसों दूर है।
फेडरेशन ने मजबूती से दलील दी है कि आज के दौर में एक सरकारी कर्मचारी को अपने परिवार के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा Quality Education, उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं, आवास, डिजिटल कनेक्टिविटी, परिवहन और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल पर भारी रकम खर्च करनी पड़ती है। ये सभी ऐसे अनिवार्य खर्च हैं जो दशकों पहले या तो बहुत कम थे या फिर पूरी तरह से अनुपस्थित थे, जब पुराने वेतन फॉर्मूले डिजाइन किए गए थे।
फैमिली-यूनिट फॉर्मूले पर यूनियनों के कड़े सवाल
इसके अलावा Furthermore, एआईएनपीएसईएफ (AINPSEF) ने मांग की है कि वर्तमान में लागू तीन-पारिवारिक-इकाई फॉर्मूले Three-Family-Unit Formula को संशोधित करके सीधे पांच पारिवारिक इकाई (Five Family Units) किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि आज की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों में तीन उपभोग इकाइयों का पुराना नियम किसी भी कर्मचारी के वास्तविक निर्भरता बोझ को नहीं संभाल सकता।
यह मांग पारंपरिक रूप से न्यूनतम मजदूरी की गणना के तरीकों से सीधे जुड़ी हुई है। दरअसल, पुराने वेतन आयोगों ने एक मानक परिवार के लिए 3,490-कैलोरी मानदंड 3,490-Calorie Norm के साथ भोजन, कपड़ा, मकान और अन्य आवश्यक खर्चों के आधार पर फॉर्मूला तैयार किया था। लेकिन कर्मचारी संघों का कहना है कि आज के समय में भोजन तो आवश्यक है ही, परंतु इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आधुनिक तकनीक, संचार और परिवहन पर होने वाला खर्च कई गुना बढ़ चुका है। इसलिए वेतन की गणना वर्तमान पोषण और आधुनिक जीवन स्तर के अनुरूप होनी चाहिए।
फिटमेंट फैक्टर और डीए के विलय पर छिड़ी बहस
नए वेतन आयोग के तहत मौजूदा बेसिक पे को संशोधित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला गुणक, जिसे फिटमेंट फैक्टर Fitment Factor कहा जाता है, इस समय सबसे बड़े विवाद और चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने इस बार सीधे 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। उनका तर्क है कि 7वें वेतन आयोग में दिया गया 2.57 का फिटमेंट फैक्टर आज की कमरतोड़ महंगाई और रहने की उच्च लागत को देखते हुए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है।
हालांकि However, इस मामले में इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन Indian Railway Technical Supervisors’ Association (IRTSA) ने एक अलग और अनूठा दृष्टिकोण अपनाया है। अपने ज्ञापन में उन्होंने तर्क दिया है कि एक समान फिटमेंट फैक्टर सभी वेतन स्तरों (Pay Levels) की विसंगतियों को दूर नहीं कर सकता। इसलिए उन्होंने इस तथाकथित “पे कंप्रेशन” की समस्या से निपटने के लिए कर्मचारियों की विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर लागू करने का अनूठा सुझाव दिया है।
इसके साथ ही, एक और सबसे बड़ी मांग नए वेतन ढांचे के लागू होने से पहले महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन में मिलाने की है। वर्तमान में महंगाई भत्ता बढ़कर 60% तक पहुंच चुका है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी National Council-Joint Consultative Machinery (NC-JCM) ने अपने ज्ञापन में तर्क दिया है कि संचित महंगाई के प्रभाव को नए वेतन मैट्रिक्स में स्पष्ट रूप से मान्यता दी जानी चाहिए, ताकि नए पे-स्केल में जाते समय कर्मचारियों को मिलने वाले डीए के लाभ का कोई नुकसान न उठाना पड़े।
ओपीएस, एनपीएस और यूपीएस (Pension Reform) पर आर-पार
वेतन आयोग के सामने पेंशन सुधार Pension Reform एक और सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा है। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की अपनी देशव्यापी मांग को एक बार फिर दोहराया है। उनका साफ कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद की आय पूरी तरह सुनिश्चित होनी चाहिए, न कि वह नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) की तरह बाजार के उतार-चढ़ाव वाले रिटर्न पर निर्भर रहे। वहीं, अन्य कर्मचारी समूह यूनिफाइड पेंशन स्कीम Unified Pension Scheme (UPS) और अन्य विकल्पों के सुरक्षा उपायों पर भी गहन चर्चा की मांग कर रहे हैं।
आगे क्या होगा? अगला चरण बेहद महत्वपूर्ण
अब जब प्रस्ताव और सुझाव जमा करने का यह पहला चरण समाप्त हो चुका है, तो वेतन आयोग इन सभी मांगों, ज्ञापनों और सुझावों का बेहद बारीकी और विस्तृत तरीके से परीक्षण शुरू करेगा।
आगामी दिनों में In the coming days, आयोग विभिन्न हितधारकों और कर्मचारी संगठनों के साथ आमने-सामने की बैठकों और परामर्श का सिलसिला जारी रखेगा। इसी कड़ी में कोलकाता और अन्य प्रमुख शहरों में महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित हैं, जहां केंद्र सरकार के संस्थानों, संघों और यूनियनों के प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी दलीलें पेश करेंगे। देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भविष्य के लिए 8वें वेतन आयोग का यह अगला दौर बेहद निर्णायक साबित होने वाला है।
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📢 8th Pay Commission: कर्मचारियों के प्रस्तावों की बड़ी बातें
- • डेडलाइन समाप्त: 8वें वेतन आयोग के समक्ष ऑनलाइन माध्यम से प्रस्ताव और मांग पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून को पूरी तरह समाप्त हो गई है।
- • बेसिक सैलरी और फिटमेंट फैक्टर: यूनियनों ने वर्तमान जीवन स्तर को देखते हुए न्यूनतम वेतन बढ़ाने और फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.83 करने की पुरजोर मांग की है।
- • पारिवारिक फॉर्मूले में बदलाव: एआईएनपीएसईएफ (AINPSEF) ने मांग की है कि वेतन गणना के लिए 3-फैमिली यूनिट के पुराने नियम को बदलकर 5-फैमिली यूनिट किया जाए।
- • पेंशन और डीए पर मंथन: 60% तक पहुंच चुके महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन में मर्ज करने और पुरानी पेंशन (OPS) की बहाली को लेकर आयोग अब विस्तृत समीक्षा करेगा।







