
रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने राज्य में शांति और कानून व्यवस्था (Public Order) को सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। गृह विभाग (Home Department) ने एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए नक्सलियों के ‘पीपुल्स लिबरेशन फ्रण्ट ऑफ इण्डिया’ (PLFI) और ‘तृतीय प्रस्तुति कमेटी’ (TPC) को राज्य में एक बार फिर ‘विधि विरुद्ध संगठन’ (Unlawful Organisations) घोषित कर दिया है।
यह प्रतिबंध इन संगठनों की उन गतिविधियों के मद्देनजर बढ़ाया गया है, जिनसे सार्वजनिक व्यवस्था और लोक परिशांति को खतरा उत्पन्न हो रहा था।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया (Democratic Process) को अक्षुण्ण बनाए रखने और आम जनता को आतंक के वातावरण से मुक्त रखने के लिए यह निर्णय लेना अनिवार्य था। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- आदिवासी क्षेत्रों में विकास: आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों को सुरक्षा प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- सरकारी संस्थाओं की सुरक्षा: इन संगठनों के क्रियाकलापों से राज्य द्वारा स्थापित संस्थाओं के कार्यों में बाधा उत्पन्न होने का खतरा बना हुआ था।
- लोक परिशांति: जनता को भय के माहौल से दूर रखने और विधि अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबंध को बढ़ाना आवश्यक हो गया था।
प्रतिबंध की नई समय-सीमा
गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ‘छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, 2005’ की धारा 3 (1) के तहत दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की गई है।
महत्वपूर्ण अपडेट: यह अधिसूचना दिनांक 19 जून 2026 से प्रभावी होगी और अगले एक वर्ष तक पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में लागू रहेगी।
यह आदेश छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से और उनके आदेशानुसार उप-सचिव आर.पी. चौहान द्वारा जारी किया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इन संगठनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी सख्ती से जारी रहेगी।








