Chhattisgarhशासकीय आदेश व अधिसूचना

छत्तीसगढ़ में अब नहीं होगा भू-जल का बेतहाशा दोहन: सरकार ने बनाई नई अथॉरिटी, नियम हुए बेहद सख्त

रायपुर, न्‍यूज डेस्‍क। छत्तीसगढ़ में गिरते भू-जल स्तर (Ground Water level) को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ भू-जल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम, 2022’ के तहत राज्य में त्रि-स्तरीय निगरानी प्रणाली का गठन कर दिया है । यह निर्णय राज्य में जल संकट (Water Crisis) और भू-जल संदूषण को रोकने के लिए लिया गया है ।

क्या है ‘छत्तीसगढ़ भू-जल प्राधिकरण’ (CGGWA)?

राज्य स्तर पर भू-जल प्रबंधन के लिए ‘छत्तीसगढ़ भू-जल प्रबंधन और विनियामक प्राधिकरण’ (Chhattisgarh Ground Water Management and Regulatory Authority) का गठन किया गया है । इसे संक्षिप्त में CGGWA कहा जाएगा।

  • अध्यक्ष: मुख्य सचिव (Chief Secretary) इस प्राधिकरण के अध्यक्ष होंगे ।
  • सदस्य: इसमें जल संसाधन, वित्त, कृषि, उद्योग और पर्यावरण संरक्षण मंडल के सचिव स्तर के अधिकारी शामिल होंगे ।
  • कार्य: इसका मुख्य काम भू-जल निष्कर्षण (Abstraction) की सीमा तय करना, औद्योगिक/वाणिज्यिक अनुमति देना और जल डेटा बेस तैयार करना है ।

उपयोगकर्ताओं के लिए जरूरी बदलाव

अब राज्य में भू-जल निकालना उतना आसान नहीं रहेगा। अथॉरिटी को निम्नलिखित शक्तियां दी गई हैं:

  • Levy Collection: औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग के लिए भू-जल निकालने पर कर (Levy) वसूला जा सकता है ।
  • Mandatory Registration: सभी नए और पुराने घरेलू, औद्योगिक और कृषि उपयोगकर्ताओं को अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा ।
  • Monitoring: पीजोमीटर और सेंसर तकनीक (Sensors and Mapping tools) के माध्यम से जल स्तर की रियल-टाइम निगरानी की जाएगी ।

जिला भू-जल प्रबंधन परिषद् (District Ground Water Management Council) की संरचना

यह परिषद् जिला स्तर पर भू-जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक समग्र इकाई के रूप में कार्य करेगी। इसमें शामिल पदाधिकारी निम्नलिखित हैं:

  • अध्यक्ष (Chairperson): कलेक्टर
  • उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson): मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत
  • सदस्य-सचिव (Member-Secretary): कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन संभाग, जिला मुख्यालय
  • विषय विशेषज्ञ: दो सदस्य जो भू-जल के क्षेत्र में दीर्घकालिक कार्यानुभव या ज्ञान रखते हों, इन्हें जिला कलेक्टर द्वारा नामांकित किया जाएगा।
  • अन्य विभागीय सदस्य (District Level Representatives): निम्नलिखित विभागों से एक-एक प्रतिनिधि सदस्य होंगे:
    • संभागीय वन अधिकारी (वन विभाग)
    • सहायक भू-जलविद (जिला भू-जल सर्वेक्षण इकाई)
    • क्षेत्रीय अधिकारी (छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल)
    • उप निदेशक (कृषि विभाग)
    • आयुक्त/सीएमओ, नगर निगम या नगरपालिका (स्थानीय निकाय)
    • महाप्रबंधक/उप-निदेशक (जिला उद्योग केंद्र)
    • कार्यपालन अभियंता (लोक स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग)

परिषद् की महत्वपूर्ण भूमिका

जिला भू-जल प्रबंधन परिषद् के मुख्य कार्यों में शामिल हैं:

  • जिला स्तरीय भू-जल सुरक्षा योजना का समेकन और कार्यान्वयन।
  • अधिसूचित और गैर-अधिसूचित क्षेत्रों में सभी मौजूदा वाणिज्यिक, औद्योगिक, अधोसंरचना और थोक उपयोगकर्ताओं का पंजीकरण करना।
  • भू-जल निष्कर्षण के लिए अनुमति देने की सिफारिश करना और ड्रिलिंग एजेंसियों/मशीनों का पंजीकरण करना।
  • नगरीय निकायों के साथ मिलकर जल स्तर की निगरानी के लिए पीजोमीटर और टेलीमेट्री नेटवर्क स्थापित करना।

चतुर विचार (Final Takeaway)

छत्तीसगढ़ सरकार का यह ‘संवहनीय हस्तक्षेप’ (Sustainable Interventions) यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में राज्य के पास पर्याप्त जल संसाधन बने रहें । यदि आप किसी उद्योग या बड़ी संस्था से जुड़े हैं, तो समय रहते पंजीकरण की प्रक्रियाओं को समझ लेना आपके लिए फायदेमंद होगा ।

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Ground Water

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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