
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली के निर्बाध और सुरक्षित संचालन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने राज्य की बिजली व्यवस्था के नियोजन और संचालन को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड-2026’ का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। यह नया कोड 2011 के पुराने ग्रिड कोड की जगह लेगा और इसे केंद्रीय ‘IEGC 2023’ (इंडियन इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड) के अनुरूप तैयार किया गया है।
क्यों जरूरी है नया ग्रिड कोड?
विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 86(1)(h) के तहत तैयार किया गया यह नया कोड राज्य के ट्रांसमिशन सिस्टम से जुड़े सभी हितधारकों—जैसे बिजली उत्पादक, वितरक और ट्रांसमिशन लाइसेंसधारियों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के बिजली नेटवर्क को अधिक स्थिर, पारदर्शी और तकनीक के अनुकूल बनाना है।
नए ग्रिड कोड के प्रमुख प्रावधान
आयोग द्वारा जारी मसौदे में कई महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं:
- साइबर सुरक्षा की अनिवार्यता: वर्तमान दौर में ग्रिड को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना प्राथमिकता है। नए कोड के अध्याय-12 में साइबर सुरक्षा को अनिवार्य किया गया है, जिसके तहत ग्रिड के लिए ऑडिट और सिस्टम अपग्रेड करना जरूरी होगा।
- 10-वर्षीय ट्रांसमिशन योजना: अब स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटी (STU) को अगले 10 वर्षों के लिए दीर्घकालिक ट्रांसमिशन योजना तैयार करना अनिवार्य होगा, जिससे भविष्य की बिजली जरूरतों का आकलन बेहतर ढंग से हो सके।
- ग्रिड समन्वय समिति (SGCC) का गठन: बिजली संचालन में तालमेल बिठाने के लिए एक ‘स्टेट ग्रिड कोऑर्डिनेशन कमेटी’ का गठन किया गया है। इसके अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी CSPTCL के प्रबंध निदेशक संभालेंगे।
- डिजिटल और आधुनिक तकनीक: ग्रिड संचालन में अब SCADA प्रणाली, रीयल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग और डिस्टरबेंस रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। इसके अलावा, बिजली संयंत्रों को ऑटोमैटिक वोल्टेज रेगुलेटर (AVR) और पवर सिस्टम स्टेबलाइजर्स (PSS) की ट्यूनिंग अनिवार्य रूप से करनी होगी।
- कनेक्टिविटी नियम: इस कोड में 11kV से 400kV तक के वोल्टेज स्तरों और ग्रिड में पावर इंजेक्शन (Power Injection) की अधिकतम सीमाएं स्पष्ट रूप से परिभाषित की गई हैं।
क्या होगा आम उपभोक्ताओं और विभाग को फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस नए कोड के लागू होने से राज्य में बिजली कटौती की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। चूंकि अब ग्रिड संचालन के लिए तकनीकी मानक कड़े कर दिए गए हैं, इसलिए बिजली प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही, भविष्य की योजनाएं पहले से तैयार होने के कारण औद्योगिक और घरेलू बिजली आपूर्ति में भी सुधार होगा।
अगला कदम
नियामक आयोग ने इस ड्राफ्ट पर संबंधित पक्षों और आम जनता से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इन सुझावों के बाद अंतिम रूप से इस कोड को पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा। आपत्तियां 17 जुलाई तक दिए जा सकते हैं, वहीं इस पर 22 जुलाई को सुनवाई होगी।
[ बिजली उत्पादन केंद्र (Power Plant) ]
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| (उच्च वोल्टेज – High Voltage)
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[ ट्रांसमिशन ग्रिड (Transmission Grid) ] <— [ यहाँ लागू होंगे नए नियम (Grid Code-2026) ]
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[ सब-स्टेशन (Sub-station) ]
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| (वितरण वोल्टेज – Distribution Voltage)
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[ उपभोक्ता (उद्योग, व्यापार, घर) ]







