
नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने प्रदेश के ग्रामीण युवाओं और मजदूर परिवारों के हक में एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक राजपत्र के अनुसार, प्रदेश में 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रही नई रोजगार गारंटी योजना ‘VB-G RAM G’ के तहत अब पात्र ग्रामीणों को कानूनी रूप से बेरोजगारी भत्ता (Unemployment Allowance) दिया जाएगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की तरफ से छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में इसकी विधिवत अधिसूचना (Notification) जारी कर दी गई है। सरकार का यह नया नियम (New Regulation) ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा (Livelihood Security) की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। Furthermore, इस भत्ते को पाने के नियम और शर्तें इतनी सख्त रखी गई हैं कि कोई भी अधिकारी या एजेंसी अब ग्रामीणों के हक को नहीं मार पाएगी।
कब और कैसे मिलेगा यह बेरोजगारी भत्ता (Eligibility Guidelines)?
राजपत्र के अध्याय-दस के नियम 29 के मुताबिक, यदि कोई पंजीकृत परिवार (Registered Family) का वयस्क सदस्य योजना के तहत अकुशल शारीरिक रोजगार के लिए आवेदन करता है, तो उसे काम देना सरकार की कानूनी बाध्यता होगी।
बेरोजगारी भत्ता मिलने की शर्तें इस प्रकार हैं:
- 15 दिनों की डेडलाइन: रोजगार के लिए आवेदन प्राप्त होने की तिथि से (या अग्रिम आवेदन की स्थिति में जिस तिथि से काम मांगा गया है) 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
- स्वतः पात्रता (Automatic Eligibility): यदि सरकार या संबंधित ग्राम पंचायत 15 दिनों के भीतर आवेदक को काम देने में पूरी तरह विफल रहती है, तो वह आवेदक “प्रतिदिन बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने का हकदार होगा”।
- मांग का डिजिटल रिकॉर्ड: रोजगार के लिए आवेदन मौखिक, लिखित या डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) के माध्यम से किया जा सकता है, जिसकी बकायदा तारीख के साथ रसीद दी जाएगी।
भत्ते का पूरा गणित: दो चरणों में मिलेगा पैसा (Allowance Slab Structure)
सरकार ने इस बेरोजगारी भत्ते (Unemployment Allowance Chhattisgarh) की दरों को बेहद स्पष्ट और दो अलग-अलग स्लैब में विभाजित किया है, ताकि श्रमिकों को उचित आर्थिक संबल मिल सके:
- प्रथम चरण (शुरुआती 30 दिनों का नियम): यदि आप काम मांगने के बाद बेरोजगार रहते हैं, तो वित्तीय वर्ष के पहले तीस दिनों के लिए मिलने वाला दैनिक बेरोजगारी भत्ता उस वर्ष के लिए अधिसूचित मजदूरी दर के एक-चौथाई (1/4) से कम नहीं होगा। उदाहरण के लिए, यदि दैनिक मजदूरी ₹300 तय की जाती है, तो शुरुआती 30 दिनों तक आपको करीब ₹75 प्रतिदिन के हिसाब से भत्ता दिया जाएगा।
- द्वितीय चरण (30 दिनों के बाद का नियम): यदि बेरोजगारी की अवधि लंबी खिंचती है और सरकार 30 दिनों के बाद भी काम उपलब्ध नहीं करा पाती, तो वित्तीय वर्ष की शेष पूरी अवधि के लिए मिलने वाले भत्ते की दर को सीधे दोगुना कर दिया जाएगा। यह दर तय मजदूरी दर के आधे (1/2) से कम नहीं होगी। यानी ₹300 की मजदूरी दर की स्थिति में अब आपको ₹150 प्रतिदिन के हिसाब से बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।
भुगतान की समय-सीमा तय, सीधे बैंक खाते में आएगा पैसा
राजपत्र के नियम 30 में साफ कहा गया है कि बेरोजगारी भत्ते का प्रत्येक भुगतान, उसके देय (Due) होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। Consequently, इस भुगतान की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी (Transparent) बनाया गया है।
यह भत्ता परिवार को संयुक्त रूप से दिया जाएगा और इसे जनपद पंचायत के कार्यक्रम अधिकारी (Program Officer) या स्थानीय पंचायत प्राधिकारियों द्वारा स्वीकृत और वितरित किया जाएगा। मजदूरों को यह भुगतान उनके व्यक्तिगत बैंक या डाकघर खातों (Bank or Post Office Accounts) के माध्यम से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए ट्रांसफर किया जाएगा।
काम देने के भी बदले नियम, 5 किलोमीटर का दायरा तय
अधिसूचना के अनुसार, केवल बेरोजगारी भत्ता देना ही सरकार का मकसद नहीं है, बल्कि काम देने की व्यवस्था (Work Allocation Framework) को भी सुधारा गया है ताकि मजदूरों को परेशान न होना पड़े:
- गाँव के पास काम: यथासंभव, रोजगार आवेदक के निवास स्थान से 5 किलोमीटर की परिधि (Radius) के भीतर ही उपलब्ध कराया जाएगा।
- 10% अतिरिक्त मजदूरी: यदि किसी विशेष परिस्थिति में रोजगार 5 किलोमीटर के दायरे से बाहर दिया जाता है, तो मजदूरों को उनके परिवहन और जीवन-यापन खर्च के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त मजदूरी देय होगी।
- महिलाओं को प्राथमिकता: काम के आवंटन में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए कुल लाभार्थियों में कम-से-कम एक-तिहाई (33%) महिलाओं को शामिल करने का कड़ा नियम है।
लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज, जेब से देना होगा हर्जाना
साय सरकार ने इस बार प्रशासनिक लेटलतीफी को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। अगर मजदूरों को मजदूरी मिलने में मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों से ज्यादा की देरी होती है, तो 0.05% प्रतिदिन की दर से विलंब मुआवजा (Delay Compensation) मिलेगा। Moreover, कंप्यूटर सिस्टम (MIS System) इस मुआवजे की गणना स्वतः कर देगा और यह पैसा देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों या एजेंसियों के वेतन या फंड से वसूला जाएगा। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति पर अधिकतम दस हजार रुपये तक के दंड (Penalty) का प्रावधान भी राजपत्र में किया गया है।
विष्णुदेव सरकार वहन करेगी पूरा खर्च (100% State Funded)
राजपत्र के अध्याय-पंद्रह के नियम 49 के अनुसार, ‘VB-G RAM G’ योजना भले ही केंद्र और राज्य के 60:40 के वित्तीय अनुपात (Funding Ratio) पर चलेगी, लेकिन बेरोजगारी भत्ते (Unemployment Allowance) और विलंबित मजदूरी मुआवजे का पूरा वित्तीय बोझ (Financial Burden) विशेष रूप से राज्य सरकार अपने कोष से वहन करेगी। यह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की ग्रामीण कार्यबल के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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शिकायत के लिए डिजिटल लोकपाल प्रणाली (Ombudsman System)
इस पूरी व्यवस्था की कड़ाई से निगरानी करने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या शिकायत के निवारण के लिए हर जिले में एक स्वतंत्र लोकपाल (Ombudsman) की नियुक्ति भी की जा रही है। यह लोकपाल निर्दिष्ट डिजिटल पोर्टल से एकीकृत होकर पूरी तरह ऑनलाइन काम करेगा। यदि किसी स्तर पर 15 दिनों के भीतर शिकायत का निवारण नहीं होता है, तो प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS Dashboard) के माध्यम से वह शिकायत स्वतः ही उच्च स्तर पर फॉरवर्ड (Auto-escalate) हो जाएगी।








