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CGPSC का एक और बड़ा कारनामा आया सामने: लगातार रोल नंबर वाले 24 अभ्यर्थी एक साथ पास, मच गया भारी हड़कंप

रायपुर (चतुरपोस्ट डेस्क): छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की विवादित परीक्षाओं की कड़ी में एक बार फिर से बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक भास्कर’ की एक खोजी रिपोर्ट और उनके डेटा एनालिसिस के माध्यम से यह बात सामने आई है कि वर्ष 2019 में विज्ञापित असिस्टेंट प्रोफेसर (सहायक प्राध्यापक) के 27 विषयों के 1384 पदों पर हुई भर्ती अब भारी गड़बड़ी और ‘सेटिंग’ के गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। Actually, इस परीक्षा परिणाम में एक खास ‘सीरीज सिलेक्शन’ (Cluster Selection) पैटर्न पर काम किया गया था। यानी परीक्षा केंद्र में एक के बाद एक रोल नंबर वाले अभ्यर्थियों का लिखित परीक्षा में चयन कर लिया गया।

वाणिज्य विषय में 24 अभ्यर्थी एक साथ पास: इत्तेफाक या गहरी सेटिंग?

Most importantly, इस खुलासे में सबसे हैरान करने वाला डेटा वाणिज्य (Commerce) विषय का सामने आया है। वाणिज्य में रोल नंबर 190206100102 से लेकर 127 तक, कुल 26 रोल नंबर आते हैं। इनमें से बीच के केवल दो रोल नंबर (107 और 110, 115, 122 को छोड़कर) यानी कुल 24 अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में एक साथ पास हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा में इस तरह का संयोग होना व्यावहारिक रूप से असंभव है। यह सीधे तौर पर भर्ती प्रक्रिया की शुचिता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल का है मामला

Furthermore, यह पूरी गड़बड़ी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष और रिटायर्ड आईएएस (IAS) टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल के दौरान की बताई जा रही है। टामन सिंह सोनवानी का कार्यकाल 2 जून 2020 से 8 सितंबर 2023 तक था। इसी दौरान यानी 5-6 नवंबर 2020 को असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसके इंटरव्यू जनवरी 2021 से जुलाई-अगस्त 2021 तक चले थे। आरोप है कि इसी दौरान चेयरमैन और उनके करीबियों ने मिलकर चयन की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया और नियमों को दरकिनार कर चहेतों को लाभ पहुँचाया।

Bhaskar
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट

चुनावी मुद्दा बना था कथित घोटाला, भाजपा ने किया था वादा

In addition to this, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय हुए इस कथित भर्ती घोटाले को लेकर राज्य की सियासत में लंबा बवाल चला है। कांग्रेस शासनकाल में नेताओं, बड़े अधिकारियों और रसूखदारों के बच्चों व रिश्तेदारों के डिप्टी कलेक्टर और अन्य उच्च पदों पर चयन को लेकर भारी विवाद खड़ा हुआ था। तब विपक्ष में रहते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे युवाओं के साथ सबसे बड़ा धोखा बताते हुए एक बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया था। भाजपा ने अपने घोषणापत्र में साफ तौर पर वादा किया था कि राज्य में सरकार बनते ही सीजीपीएससी की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी (Transparent) बनाया जाएगा और पूरे फर्जीवाड़े की सीबीआई (CBI) से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

सत्ता परिवर्तन के बाद एक्शन में साय सरकार: सीबीआई कर रही है ताबड़तोड़ जांच

 Consequently, छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन होने और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद कैबिनेट ने पहला बड़ा फैसला लेते हुए इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। वर्तमान में सीबीआई इस पूरे CGPSC Exam Update के मामलों को बहुत ही आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रही है। केंद्रीय एजेंसी द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) के बाद कड़े एक्शन लिए गए हैं।

इस मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, आयोग के तत्कालीन सचिव और परीक्षा नियंत्रक समेत कई अन्य बिचौलियों व प्रभावशालियों को गिरफ्तार (Arrested) कर लिया है। अधिकारियों से पूछताछ में हर दिन नए और चौंकाने वाले सुराग हाथ लग रहे हैं, जिससे यह साफ होता जा रहा है कि मेधावी छात्रों के अधिकारों को किस तरह से कुचला गया था।

एक्सपर्ट्स का दावा: परीक्षा केंद्र और ओएमआर शीट में खेल की आशंका

On the other hand, पूर्व पीएससी अध्यक्षों और विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा में ‘सीरीज सिलेक्शन’ या क्लस्टर इफेक्ट तभी संभव है जब किसी परीक्षा केंद्र (Exam Center) में पूरी की पूरी ओएमआर शीट (OMR Sheets) या टेबल अरेंजमेंट में हेरफेर किया गया हो।

“किसी भी प्रतियोगी परीक्षा या अंतिम चयन सूची में इस तरह से बल्क (Bulk) या सीरीज में पास होना पूरी तरह से नामुमकिन है। यह तभी संभव है जब सिस्टम के भीतर बड़े पैमाने पर कॉम्प्रोमाइज किया गया हो। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की हर एक कॉपी और चयन प्रक्रिया की विस्तृत जांच होनी जरूरी है।”

आर.एस. विश्वकर्मा, पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ पीएससी (2015-17)

क्या कहते हैं वर्तमान जिम्मेदार?

इस पूरे सनसनीखेज खुलासे और गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर जब वर्तमान पीएससी सचिव राहुल वेंकट से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने बताया कि शिकायतें और मामले संज्ञान में हैं। उन्होंने कहा, “शिकायत किस स्तर पर प्राप्त हुई है और इस पर क्या कार्रवाई हुई है, मैं पूरे रिकॉर्ड्स को एक बार अच्छी तरह से चेक करने के बाद ही इस पर कुछ आधिकारिक तौर पर बता पाऊँगा।”

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Overall, इस नए खुलासे के बाद अब छत्तीसगढ़ के लाखों युवाओं की नजरें सीबीआई की अंतिम चार्जशीट पर टिकी हैं। छात्रों का स्पष्ट मानना है कि जिन अयोग्य लोगों ने पैसे या रसूख के दम पर नौकरियां हासिल की हैं, उन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए और वास्तविक रूप से हकदार अभ्यर्थियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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