
रायपुर (चतुरपोस्ट डेस्क): छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) का मुद्दा फिर गरमाने लगा है। जनवरी 2026 से लंबित पड़े कर्मचारी और पेंशनरों के महंगाई भत्ता में दो प्रतिशत की वृद्धि (2% DA Hike) किए जाने को लेकर राज्य के भीतर हलचल मची हुई है। Actually, अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे कर्मचारी नेता और पेंशनर अब थक-हारकर सीधे भगवान की शरण में जाने लग गए हैं। सरकार से सकारात्मक संकेत न मिलने के कारण अब दैवीय चमत्कार की उम्मीद की जा रही है।
एक महीने तक चला हस्ताक्षर अभियान, अब आस्था का सहारा
Most importantly, महंगाई भत्ता और महंगाई भत्ता एरियर्स (DA Arrears) की जायज मांग को लेकर पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश भर में एक महीने तक व्यापक स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। ‘एक मांग एक मंच अभियान’ के प्रांत संयोजक और प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संघ के प्रांत अध्यक्ष करण सिंह अटरिया के नेतृत्व में यह आंदोलन चलाया जा रहा था। Consequently, इस अभियान के अगले चरण के रूप में अब आस्था का सहारा लिया गया है। प्रांताध्यक्ष करण सिंह अटरिया के द्वारा प्रदेश के लगभग 5 लाख नियमित कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और पेंशनरों के व्यापक हित के लिए ऐतिहासिक धार्मिक स्थल शिवरीनारायण स्थित लक्ष्मणेश्वर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई।
1 लाख 8 नग खड़ा चावल और जल अर्पित कर अनोखी प्रार्थना
Furthermore, इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों और पेंशनरों की ओर से भगवान शिव को एक लाख आठ नग खड़ा चावल (अक्षत) अर्पित किया गया। इसके साथ ही पूरे विधि-विधान से पवित्र जल चढ़ाकर भगवान से विशेष प्रार्थना की गई। श्री अटरिया के द्वारा चुनावी घोषणा पत्र में शामिल ‘मोदी जी की गारंटी’ (Modi Ki Guarantee) के उन तमाम वादों को याद किया गया जो कर्मचारी हित से जुड़े हुए हैं। उन्होंने भगवान के सामने हाथ जोड़कर यह मन्नत मांगी कि छत्तीसगढ़ सरकार इन लंबित कल्याणकारी मुद्दों पर शीघ्र से शीघ्र कोई ठोस और बड़ा निर्णय ले ताकि प्रदेश के लाखों परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिल सके।
86 महीनों का DA एरियर्स गायब; बजट आवंटन पर उठाए गंभीर सवाल
In addition to this, कर्मचारी नेता करण सिंह अटरिया ने राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन और मंशा पर कई गंभीर सवालिया निशान खड़े किए हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए एक बड़ा खुलासा किया कि प्रदेश के सरकारी सेवकों का पिछले 86 महीनों का महंगाई भत्ता एरियर्स (Pending DA Arrears) सरकार द्वारा दबाकर रखा गया है, जिसका भुगतान अब तक नहीं किया गया है। यह कर्मचारियों के साथ सीधे तौर पर वित्तीय अन्याय है।
On the other hand, बजट के तकनीकी प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा हर बार अपने सालाना बजट (Annual Budget) में कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ता प्रदान करने के लिए पूरे 10% का बकायदा वित्तीय प्रावधान (Budget Provision) किया जाता है। परंतु, जब इसे धरातल पर लागू करने की बात आती है, तो सरकार के द्वारा केवल दो अथवा तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता ही जारी किया जाता है।
“जब बजट में 10% की राशि सुरक्षित रखी जाती है, तो सरकार केवल 2 से 3 फीसदी डीए देकर ही क्यों पल्ला झाड़ लेती है? शेष बची हुई सात से आठ प्रतिशत की भारी-भरकम राशि को आखिर किस मद में कहाँ खर्च किया जाता है? इसे सरकार को श्वेत पत्र जारी कर पूरी तरह से स्पष्ट करना चाहिए।” — करण सिंह अटरिया, प्रांत अध्यक्ष, प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संघ
सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए हुआ विशेष अनुष्ठान
Moving forward, कर्मचारी नेताओं ने साफ किया कि इन्हीं सब विपरीत परिस्थितियों, प्रशासनिक उदासीनता और वित्तीय विसंगतियों को ध्यान में रखते हुए आज विवश होकर उन्हें भगवान की शरण में आना पड़ा है। छत्तीसगढ़ सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए यह विशेष महापूजा और अनुष्ठान आयोजित किया गया ताकि मुख्यमंत्री और कैबिनेट का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर आकर्षित हो सके।
कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार अपनी जायज मांगों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन सौंपते आ रहे हैं, लेकिन जब शासन स्तर पर कोई सुनवाई नहीं होती है, तो ब्रह्मांड के शासक के पास गुहार लगाने के अलावा कोई और रास्ता शेष नहीं बच जाता है।
क्या रंग लाएगा यह ‘दैवीय’ प्रयास? लाखों परिवारों की नजरें टिकीं
Overall, छत्तीसगढ़ के इस बेहद अनूठे विरोध प्रदर्शन की चर्चा अब मंत्रालय से लेकर सड़क तक बहुत तेजी से फैल गई है। कर्मचारी जगत और आम जनता के बीच अब यह कौतूहल का विषय बन गया है कि क्या इस विशेष पूजा-पाठ, अक्षत अर्पण और जल अभिषेक का कोई सकारात्मक असर या चमत्कार देखने को मिलेगा?
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क्या विष्णुदेव साय सरकार इस अनुष्ठान के बाद जागृत होगी और 5 लाख नियमित कर्मचारियों, पेंशनधारियों व संविदा कर्मियों के लिए बहुप्रतीक्षित 2% महंगाई भत्ते और कैशलेस इलाज की सौगात का रास्ता साफ करेगी? यह आने वाला वक्त ही तय करेगा, लेकिन फिलहाल इस अनोखी घटना ने राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक फिजाओं में भारी गर्माहट ला दी है।







