
Chhattisgarh Co-operative Society Employees Protest: सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहकारिता क्षेत्र (Co-operative Sector) से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। अपनी 4 सूत्रीय लंबित मांगों (Pending Demands) को लेकर प्रदेश के सहकारी समिति कर्मचारी एक बार फिर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ (पंजीयन क्रमांक 6685) और छत्तीसगढ़ समर्थन मूल्य धान खरीदी ऑपरेटर संघ (पंजीयन क्रमांक 122202149760) ने संयुक्त रूप से आगामी 13 जुलाई 2026 को रायपुर के तुता (नवा रायपुर) में विशाल धरना प्रदर्शन और विधानसभा घेराव (Assembly Siege) करने का बड़ा ऐलान कर दिया है।
कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि अगर मानसून सत्र (Assembly Monsoon Session 2026) के दौरान उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे अपने पूरे परिवार के साथ सड़क पर उतरेंगे। इसके बाद भी यदि सरकार ने सकारात्मक आदेश (Official Order) जारी नहीं किए, तो पूर्व में स्थगित किया गया अनिश्चितकालीन आंदोलन (Indefinite Strike) दोबारा शुरू कर दिया जाएगा, जिससे राज्य की सभी सहकारी समितियों का कामकाज पूरी तरह ठप हो जाएगा।
क्यों भड़का कर्मचारियों का आक्रोश? जानिए पूरा मामला
दरअसल, दोनों संगठनों के संयुक्त तत्वाधान में पिछले साल 3 नवंबर 2025 से एक अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया गया था। इसके बाद 21 नवंबर 2025 को शासन-प्रशासन के साथ हुई बैठक में किसान और जनहित को देखते हुए सकारात्मक आश्वासन (Positive Assurance) मिलने पर आंदोलन स्थगित कर दिया गया था।
कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र कुमार सोनगेर और धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के अध्यक्ष ऋषिकांत मोहरे व कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि इस समझौते को बीते 8 महीने (8 Months) से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन सरकार ने अब तक एक भी मांग को पूरा करने का आदेश जारी नहीं किया है। इसी वादाखिलाफी से नाराज होकर 25 जून 2026 को रायपुर में प्रदेश कार्यकारिणी की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें सर्वसम्मति से 13 जुलाई को दोपहर 12 बजे से उग्र आंदोलन करने का निर्णय लिया गया।

चार सूत्रीय मांगें (4-Point Demands): जिन पर अड़ा है महासंघ
खाद्य विभाग (Food Department) और सहकारिता विभाग (Cooperative Department) से जुड़ी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
खाद्य विभाग से जुड़ी 2 प्रमुख मांगें:
- धान सुखत और शार्टेज राशि का भुगतान: वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-2026 में धान परिदान (Paddy Delivery) के बाद हुई पूरी सुखत (Weight Loss) को मान्य कर समितियों को राशि दी जाए। वर्ष 2024-25 में ‘शून्य शार्टेज प्रोत्साहन राशि’ का प्रावधान किया जाए। इसके साथ ही महंगाई को देखते हुए विभिन्न कमीशन, प्रासंगिक और सुरक्षा व्यय में 4 गुना बढ़ोतरी की जाए और कर्मचारियों पर की जा रही FIR व बर्खास्तगी पर तुरंत रोक लगे।
- कंप्यूटर ऑपरेटरों का नियमितीकरण: धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटरों (Computer Operators) को केवल 6 महीने के स्थान पर पूरे 12 महीने का वेतन दिया जाए और विभाग तय करके उनका नियमितीकरण (Regularization) किया जाए।
सहकारिता विभाग से जुड़ी 2 प्रमुख मांगें:
- प्रबंधकीय अनुदान राशि (Managerial Grant): मध्य प्रदेश सरकार की तर्ज पर प्रदेश की सभी 2058 सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारियों को निश्चित वेतनमान देने के लिए हर साल प्रत्येक समिति को 3-3 लाख रुपये की प्रबंधकीय अनुदान राशि दी जाए, और अंतर-विभागीय कमेटी के फैसले को लागू किया जाए।
- कांडे कमेटी की रिपोर्ट और सेवा नियम संशोधन: श्री कांडे कमेटी की अध्यक्षता वाली रिपोर्ट के अनुसार सेवानियम 2018 में संशोधन करके कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF), महंगाई भत्ता (DA), और ESIC की सुविधा दी जाए। इसके अलावा, बैंक कैडर में समिति प्रबंधक (तृतीया व चतुर्थ श्रेणी) के खाली पदों पर समितियों के सहायक कर्मचारियों को 50 प्रतिशत विभागीय भर्ती का लाभ मिले तथा उम्र और योग्यता में शिथिलता दी जाए।
दंडात्मक कार्रवाई शून्य करने की मांग: पिछले आंदोलन के दौरान जिन कर्मचारियों पर निलंबन, सेवा से पृथक करने, FIR दर्ज करने, राशन दुकान आबंटन निरस्त करने या ट्रांसफर जैसी दंडात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) की गई थी, उन्हें तुरंत शून्य कर कर्मचारियों को सवेतन बहाल (Reinstated with Salary) किया जाए।
‘सहकार से समृद्धि’ के सपने को बचाने की गुहार
कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र कुमार सोनगेर और धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के अध्यक्ष ऋषिकांत मोहरे व अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की मंशा के अनुरूप ‘सहकार से समृद्धि’ (Prosperity through Cooperation) लाने के लिए इन मांगों का पूरा होना बेहद जरूरी है। अत्यधिक धान सुखत के कारण छत्तीसगढ़ की सहकारी समितियां लगातार घाटे में डूब रही हैं। यदि सरकार समय रहते इन जायज मांगों पर सकारात्मक आदेश जारी नहीं करती है, तो आगामी दिनों में होने वाले चौतरफा कार्य बहिष्कार की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।







