कर्मचारी हलचल

संविदा बिजली कर्मियों की हड़ताल का 15वां दिन: कंपनी प्रबंधन और सरकार की अनदेखी से बढ़ रहा आक्रोश

रायपुर। छत्‍तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी में सेवाएं दे रहे संविदा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल (Indefinite Strike) का आज 15वां दिन है। छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले प्रदेशभर के संविदा कर्मी अपनी एक सूत्रीय मांग, नियमितीकरण (Regularization) को लेकर 22 जून 2026 से लगातार आंदोलन पर हैं। कंपनी प्रबंधन (Company Management) के साथ हुई शुरुआती दौर की वार्ता विफल होने के बाद यह गतिरोध और गहरा गया है। वर्तमान में प्रदेशभर के हजारों कर्मचारी राजधानी नवा रायपुर के तूंता स्थित धरना स्थल पर 1 जुलाई से डटे हुए हैं, जिससे मैदानी स्तर पर व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।

इस हड़ताल के कारण Power Cut Crisis की स्थिति निर्मित हो गई है। संविदा कर्मचारियों के काम बंद करने से विद्युत आपूर्ति (Power Supply) बनाए रखना प्रबंधन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

इन संभागों में सबसे ज्यादा असर, ग्रामीण इलाकों में ब्लैकआउट (Affected Regions)

मैदानी अमले के न होने से छत्तीसगढ़ के कई जिलों में हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। बिजली गुल होने और फॉल्ट न सुधरने के कारण आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। प्रभावित क्षेत्रों की जमीनी रिपोर्ट इस प्रकार है:

  • ■ ग्रामीण इलाकों में हाहाकार: बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़, सरगुजा और बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण अंचलों में पिछले 5 से 7 दिनों से बिजली पूरी तरह गुल है।
  • ■ शहरी क्षेत्रों में अघोषित कटौती: बड़े शहरों और नगरीय निकायों में भी रोजाना 4 से 10 घंटे की अघोषित बिजली कटौती (Unscheduled Power Cuts) की जा रही है, जिससे नागरिक परेशान हैं।
  • ■ फॉल्ट सुधारने में लाचारी: फील्ड में नियमित कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है। इसके चलते जहां भी कोई बड़ा फॉल्ट (Technical Fault) आ रहा है, उसे समय पर ठीक नहीं किया जा पा रहा है।
  • ■ नियमित स्टाफ बेबस: विभाग के कनिष्ठ, सहायक एवं कार्यपालन अभियंता और अन्य नियमित अधिकारी लगातार फील्ड में डटे हुए हैं, लेकिन मेंटेनेंस कार्य (Maintenance Work) के लिए आवश्यक मैनपावर (Required Manpower) न मिलने से व्यवस्था संभालना नामुमकिन हो रहा है।

संविदा कर्मचारियों पर ही टिका था पूरा सिस्टम, अधिकारी भी समर्थन में (System Collapse)

पावर कंपनी के भीतर काम करने वाले अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि प्रदेश के अधिकतर ग्रामीण और कुछ महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्रों में संविदा कर्मचारी ही पूरे मैदानी अमले को संभाले हुए थे। रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले इन कर्मचारियों के अचानक हड़ताल पर चले जाने से विद्युत आपूर्ति एवं संधारण कार्य (Maintenance Operations) पर बेहद गंभीर असर पड़ा है।

दिलचस्प बात यह है कि छत्तीसगढ़ पावर कंपनी के नियमित अधिकारी और कर्मचारी भी संविदा कर्मियों की इस मांग को पूरी तरह जायज (Justified Demand) बताते हैं और उनका नैतिक समर्थन कर रहे हैं। इंजीनियर्स और अधिकारी भी यही चाहते हैं कि शासन स्तर पर जल्द से जल्द संविदा कर्मचारियों की मांगों का निराकरण (Grievance Redressal) हो, ताकि ये कर्मचारी वापस काम पर लौट सकें और जनता को इस बड़ी मुसीबत से राहत मिल सके।

आउटसोर्सिंग की अनुमति पर क्यों कतरा रहे हैं अधिकारी? (Outsourcing Loophole)

हड़ताल से उत्पन्न हुए आपातकाल से निपटने के लिए पावर कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने एक वैकल्पिक व्यवस्था (Alternative Arrangement) के तहत क्षेत्रीय कार्यालयों को आउटसोर्स कर्मचारी (Outsource Workers) रखने की लिखित अनुमति दी है। प्रबंधन का सोचना था कि इससे बिजली आपूर्ति बहाल की जा सकेगी, लेकिन यह योजना भी धरातल पर फेल होती नजर आ रही है।

इसके पीछे की मुख्य वजह यह है कि संविदा कर्मियों के बदले रखे जाने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन (Salary & Wages) के लिए प्रबंधन की ओर से कोई अतिरिक्त बजट या राशि जारी नहीं की जाती है। इसके कारण क्षेत्रीय कार्यालयों और स्थानीय अधिकारियों को भारी वित्तीय कठिनाइयों (Financial Difficulties) का सामना करना पड़ता है। कई बार स्थानीय स्तर पर काम चलाने के लिए संबंधित अधिकारियों को अपनी जेब से इन आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन भुगतान करना पड़ता है। इसी बड़ी परेशानी के कारण प्रबंधन की स्पष्ट अनुमति होने के बावजूद मैदानी अधिकारी नए आउटसोर्स कर्मचारी रखने से लगातार बच रहे हैं।

आम जनजीवन पूरी तरह ठप, व्यापार और खेती प्रभावित (Impact on Public)

इस Power Cut Crisis ने छत्तीसगढ़ के नागरिकों के जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। बिजली न होने के कारण समाज का हर वर्ग प्रभावित हो रहा है:

  • अस्पतालों में संकट: ग्रामीण और ब्लॉक स्तर के अस्पतालों में केवल जनरेटर के भरोसे काम चल रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और आपातकालीन ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं।
  • किसानों का नुकसान: धान के इस सीजन में किसानों की सिंचाई व्यवस्था (Irrigation System) बिजली न रहने के कारण पूरी तरह ठप हो गई है।
  • पढ़ाई बाधित: स्कूली छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भारी व्यवधान आ रहा है।
  • व्यापार बंद: बिजली गुल रहने से छोटे-बड़े व्यापारियों का काम पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। भीषण गर्मी और उमस के इस मौसम में लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं।

मुख्यमंत्री और बड़े नेताओं को सौंपा गया ज्ञापन (Political Alignment)

अपनी मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने राजनीतिक स्तर पर भी दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में 6 जुलाई 2026 को संघ के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को अपनी मांगों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन (Memorandum) सौंपा। इससे पूर्व संगठन के सदस्य विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल और अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधियों तथा विधायकों से भी मुलाकात कर चुके हैं।

संघ के प्रवक्ता और छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हरिचरण साहू ने शासन से तत्काल मांगें पूरी करने का आग्रह किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा:

“जब तक हमारी नियमितीकरण की एक सूत्रीय मांग पूरी नहीं होती, तब तक यह हड़ताल अनवरत जारी रहेगी। हम जनता को होने वाली भारी परेशानी को अच्छी तरह समझते हैं, लेकिन प्रबंधन के अड़ियल रवैये के कारण मजबूरी में हमें यह कठोर कदम उठाना पड़ा है।”

एक्सपर्ट एनालिसिस: क्या कहते हैं आरटीआई के दस्तावेज? (Authentic Analysis)

संघ द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, यह बात सामने आई है कि लाइन परिचारक भर्ती प्रक्रिया (Line Attendant Recruitment) शुरू होने से पहले ही संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के लिए एक विशेष पैमाना या एजेंडा तैयार कर लिया गया था। इस नीतिगत एजेंडे में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि 6 वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण करने वाले संविदा कर्मचारियों को नियमित कर दिया जाएगा।

इसके बावजूद, वर्तमान में स्थिति यह है कि वर्ष 2016 बैच के कर्मचारियों को विभाग में काम करते हुए पूरे 10 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। पावर कंपनी में वर्तमान में 5000 से अधिक लाइन कर्मचारियों के पद रिक्त (Vacant Posts) पड़े हैं, फिर भी इन अनुभवी कर्मचारियों का समायोजन (Absorbtion) नहीं किया जा रहा है।

ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ पावर कंपनी में इससे पहले वर्ष 2004, 2006, 2008 और 2010 में नियुक्त किए गए संविदा कर्मचारियों का मात्र 2 से 3 वर्ष की सेवा के भीतर ही नियमितीकरण किया जाता रहा है। इसी तरह वर्ष 2013 में कार्यालय सहायक के रूप में भर्ती हुए कर्मियों को भी 2016 में नियमित कर दिया गया था। ऐसे में वर्तमान संविदा कर्मियों के साथ हो रहा यह भेदभाव नीतिगत रूप से गलत प्रतीत होता है।

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कंपनी के वरिष्ठ और प्रबंधन स्तर के अधिकारी भी इन कर्मचारियों के समायोजन के पक्ष में हैं, लेकिन शासन स्तर पर बैठे उच्च नौकरशाहों की संवेदनहीनता के कारण कोई ठोस नीति नहीं बन पा रही है। संघ के अध्यक्ष हरिचरण साहू ने राज्य सरकार से पूरी संवेदनशीलता (Sensitivity) के साथ इस संवेदनशील मामले का तत्काल शांतिपूर्ण निराकरण करने की पुरजोर अपील की है, ताकि छत्तीसगढ़ की चरमराई विद्युत व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट सके।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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