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बघेल की शायरी पर डॉ. रमन बोलें- बागेश्‍वर बालाजी की कृपा है, सबके असली चेहरे सामने आ जाते हैं

रायपुर। Chaturpost.com (चतुरपोस्‍ट.कॉम)

बागेश्‍वर महाराज के चमत्‍कारों को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। यह मामला अब पूरी तरह सियासी हो गया है। प्रदेश के पूर्व और वर्तमान मुख्‍यमंत्री इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया में एक- दूसरे पर जमकर निशाना साधा रहे हैं। मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल ने गालिब के शेर के जरिये पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन सिंह पर हमला बोला है। वहीं, डॉ. रमन ने रामायण की चौपाई के साथ राम को याद किया है।   

मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल ने बागेश्‍वर महाराज के चमत्‍कारों को लेकर मीडिया में एक बयान दिया। इस पर पलटवार करते हुए पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन ने एक ट्वीट किया। डॉ. रमन ने रामायण की एक चौपाई के साथ बघेल पर हमला बोला।

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@bhupeshbaghel को सिर्फ सनातन सिद्धियों के चमत्कार में जटिलता दिखती है। कलयुगी कालनेमियों को सिर्फ वैदिक सनातन शक्तियों के साक्ष्य चाहिए, बागेश्वर बालाजी इन मति भ्रष्ट कांग्रेसियों का कल्याण करें।

रामायण की इस चौपाई का भावार्थ यह है- जब मेरे समझाने से भी संदेह दूर नहीं होता तब विधाता ही उलटे हैं, अब सती का कुशल नहीं है।

डॉ. रमन के इस ट्वीट के जवाब में बघेल ने गालिब की एक शायरी ट्वीट की है। लिखा है- “या-रब वो न समझे हैं न समझेंगे मिरी बात दे और दिल उन को जो न दे मुझ को ज़बाँ और” डॉक्टर साहब की बात पर मिर्ज़ा ग़ालिब याद आ गए।

बागेश्वर: किसी को अपना रब याद आया हमको राम

मुख्‍यमंत्री बघेल के इस बयान को टैग करते हुए पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन ने‍ फिर एक टवीट करके तगड़ा पलटवार किया। उन्‍होंने लिखा है कि सनातन में वह शक्ति निहित है, जिससे बनते हैं बिगड़े काम किसी को अपना “रब” याद आया है,  हमको अपने “राम” आखिरकार “नीले सियार” को अपना असली स्वरूप याद आ ही जाता है। बागेश्वर बालाजी की कृपा है, सबके असली चेहरे सामने आ जाते हैं।

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बागेवश्‍र महाराज को लेकर क्‍या कहा था मुख्‍यमंत्री बघेल ने

बागेश्‍वर महाराज कथावाचतक पंडित धीरेंद्र कृष्‍ण शास्‍त्री को लेकर रामकृष्ण परमहंस और महात्मा बुद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को सिद्धियां मिलती हैं। सिद्धियों से इन्‍कार नहीं किया जा सकता, लेकिन चमत्कार नहीं दिखाना चाहिए। यह जादूगरों का काम है, यह उचित नहीं है।

बघेल ने कहा कि सिद्धियों का प्रयोग चमत्कार दिखाने में नहीं करना चाहिए। ऋषि-मुनियों ने भी कहा है। चंगाई सभा में भी यहीं चमत्कार है। इससे जड़ता आती है। धर्म बचाने का ठेका लेने वाले धोखे में हैं।

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