
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) ने मानसून की दस्तक से पहले प्रदेश के सुदूर और पहुंचविहीन क्षेत्रों (Inaccessible Areas) के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला लिया है । राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय (Directorate of Food, Civil Supplies and Consumer Protection) ने बारिश के मौसम में मुख्यधारा से कट जाने वाले संवेदनशील इलाकों में जरूरी नागरिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है । सरकार ने मानसून (Monsoon 2026) के दौरान पूरी तरह से संपर्कविहीन हो जाने वाले राशन दुकानों के लिए केरोसिन तेल का अग्रिम भंडारण (Advance Storage of Kerosene) करने का एक कड़ा और समयबद्ध निर्देश जारी किया है ।
खाद्य संचालनालय की अपर संचालक नीलम पदुम अल्मा (Additional Director Neelam Padum Alma) के हस्ताक्षर से जारी इस सरकारी आदेश के तहत प्रदेश के चुनिंदा 18 जिलों के कलेक्टर्स और तेल उद्योग के राज्य स्तरीय समन्वयकों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है 。 विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 15 जून 2026 की अंतिम समय-सीमा (Deadline) तय की है, ताकि भारी बारिश और बाढ़ जैसी प्राकृतिक विभीषिकाओं के समय भी गरीब आदिवासियों और ग्रामीणों को ईंधन के संकट का सामना न करना पड़े ।
पहुंचविहीन 221 उचित मूल्य दुकानों के लिए 42 केएल केरोसिन आवंटित
नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन से जारी इस आधिकारिक आदेश (Official Order) के अनुसार, भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) से राज्य को वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के लिए केरोसिन का आबंटन प्राप्त हुआ है । इस केंद्रीय कोटे के आधार पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न प्रभावित जिलों से मानसून कार्ययोजना के तहत प्रस्ताव मंगाए गए थे।
जिलों से प्राप्त जमीनी प्रस्तावों की बारीकी से समीक्षा करने के बाद खाद्य विभाग ने राज्य की कुल 221 पहुंचविहीन उचित मूल्य दुकानों (Inaccessible Fair Price Shops – PDS) की पहचान की है । ये वे राशन दुकानें हैं जो भारी वर्षाकाल (Rainy Season) में नदी-नालों में उफान आने या पहाड़ी रास्तों के बंद हो जाने के कारण जिला मुख्यालयों और मुख्य विकासखंडों से पूरी तरह से कट जाती हैं । इन सभी 221 राशन केंद्रों के आश्रित कार्डधारियों के लिए कुल 42 किलोलीटर (42 KL) केरोसिन तेल का विशेष आबंटन (Special Allocation) स्वीकृत किया गया है । सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस पूरे आबंटन को 15 जून 2026 तक हर हाल में चिन्हित दुकानों के गोदामों तक सुरक्षित पहुंचा दिया जाए ।
इन 18 जिलों के कलेक्टर्स को जारी हुआ कड़ा फरमान
सरकार का यह जनहितैषी कदम मुख्य रूप से बस्तर संभाग के घने जंगलों वाले इलाकों, सुदूर वनांचल क्षेत्रों और कुछ मैदानी जिलों के दुर्गम पॉकेट्स को ध्यान में रखकर उठाया गया है । संचालनालय ने जिन जिलों के कलेक्टर्स (District Collectors) और खाद्य नियंत्रकों (Food Controllers) को एक्शन मोड में रहने का निर्देश दिया है, उनकी सूची इस प्रकार है:
- बीजापुर और दन्तेवाड़ा: बस्तर संभाग के ये दोनों अत्यधिक संवेदनशील जिले मानसून में नदी-नालों के कारण प्रभावित होते हैं ।
- कांकेर और कोण्डागांव: उत्तर बस्तर और मध्य बस्तर के इन क्षेत्रों में कई अंदरूनी ग्राम पंचायतें संपर्कविहीन हो जाती हैं ।
- नारायणपुर और सुकमा: अबूझमाड़ और घने जंगलों वाले इन जिलों में अग्रिम भंडारण सबसे बड़ी प्राथमिकता है ।
- मुंगेली और कबीरधाम: अचानकमार टाइगर रिजर्व और मैकल पर्वत श्रृंखला के कछार में बसे गांवों के लिए यह आदेश अहम है ।
- खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (KCG): इस नए जिले के सुदूर वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों में राशन पहुंचाना एक चुनौती होती है ।
- मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (MMA): महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा से लगे इस मानपुर और मोहला के अंदरूनी हिस्सों में बारिश में रास्ते बंद हो जाते हैं ।
- बलौदाबाजार और धमतरी: मैदानी इलाके होने के बावजूद महानदी और उसकी सहायक नदियों के तटीय पॉकेट्स में जलभराव की समस्या आती है ।
- गरियाबंद और बलरामपुर: गरियाबंद के मैनपुर-देवभोग के कुछ हिस्से और बलरामपुर के सामरी पाट जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए यह आदेश संजीवनी है ।
- कोरिया और सूरजपुर: सरगुजा संभाग के इन दोनों जिलों के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में मानसून पूर्व भंडारण किया जाएगा ।
- मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB): नवगठित जिले के सुदूर भरतपुर ब्लॉक के वनांचल गांवों में पहुंच मार्ग बाधित होने की आशंका रहती है ।
तेल कंपनियों और तेल उद्योग के राज्य समन्वयक को बड़ी जिम्मेदारी
केरोसिन के इस अग्रिम परिवहन और सुचारू आपूर्ति (Smooth Supply Chain) को सुनिश्चित करने के लिए खाद्य विभाग ने तेल कंपनियों को भी सीधे तौर पर जवाबदेह बनाया है । इस संबंध में जारी पत्र की प्रतियां राज्य स्तरीय समन्वयक, ऑयल उद्योग रायपुर (State Level Coordinator, Oil Industry) के साथ-साथ देश की तीनों प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के क्षेत्रीय प्रबंधकों को भी भेजी गई हैं:
- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL), क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर
- हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL), क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर
- भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर
इन सभी तेल कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने संबंधित डिपो (Depots) से निर्धारित 42 केएल केरोसिन का उठाव प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करें । कंपनियों को जिलों के खाद्य अधिकारियों (Food Officers) के साथ समन्वय (Coordination) स्थापित कर बिना किसी तकनीकी या प्रशासनिक देरी के टैंकरों को सीधे चिन्हित ब्लॉकों और पहुंचविहीन सोसायटियों की ओर रवाना करना होगा ।
समय-सीमा का उल्लंघन पड़ेगा भारी: मॉनिटरिंग के लिए कड़े निर्देश
खाद्य विभाग की अपर संचालक नीलम पदुम अल्मा ने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि मानसून पूर्व अग्रिम भण्डारण (Pre-Monsoon Advance Stocking) के इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी । 15 जून 2026 की तारीख को ‘डेडलाइन’ के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इसके बाद छत्तीसगढ़ में मानसूनी बारिश की तीव्रता बढ़ जाती है, जिससे नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने लगता है और भारी वाहनों का परिवहन लगभग असंभव हो जाता है ।
सभी संबंधित जिलों के खाद्य नियंत्रकों और खाद्य अधिकारियों (Food Controllers / Food Officers) को आदेशित किया गया है कि वे दैनिक आधार पर (On a Daily Basis) केरोसिन के उठाव और उसकी राशन दुकानों तक सुरक्षित पहुंच की वास्तविक स्थिति की निगरानी करें । इसके साथ ही, राशन दुकान संचालकों को भी यह हिदायत दी गई है कि वे अग्रिम रूप से प्राप्त हो रहे केरोसिन स्टॉक को सुरक्षित और लीकेज-मुक्त ड्रमों या टैंकों में भंडारित करके रखें, ताकि बारिश के पानी से ईंधन खराब न हो और उसका लाभ सीधे तौर पर अंत्योदय एवं प्राथमिकता राशनकार्ड धारक परिवारों को मिल सके ।
इस पूरी प्रशासनिक कसरत का एकमात्र उद्देश्य यह है कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक के किसी भी गरीब नागरिक को बरसात के चार महीनों में ढिबरी (मिट्टी तेल का दीया) जलाने या आपातकालीन उपयोग के लिए ईंधन की कमी से न जूझना पड़े ।




