
रायपुर/गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के जंगलों से वन्यजीव प्रेमियों को विचलित करने वाली एक खबर सामने आई है। प्रदेश के उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व (Udanti Sitanadi Tiger Reserve) क्षेत्र में दुर्लभ मालाबार गिलहरी, जिसे Indian Giant Squirrel (Ratufa indica) भी कहा जाता है, के शिकार का मामला प्रकाश में आया है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल (Viral Video)
सोशल मीडिया पर इस शिकार का एक वीडियो तेजी से Circulate (प्रसारित) हो रहा है। इस वीडियो में शिकारी जमीन पर मृत मालाबार गिलहरी को रखे हुए नजर आ रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि वीडियो के Background (पृष्ठभूमि) में नक्सली कमांडर हिड़मा की प्रशंसा वाला गाना बज रहा है। यह वीडियो 30 मार्च को अपलोड किया गया था, जिसके बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है।
10 से 12 उड़न गिलहरियों के शिकार की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, Poachers (शिकारियों) ने टाइगर रिजर्व के भीतर न केवल मालाबार गिलहरी, बल्कि लगभग 10 से 12 उड़न गिलहरियों का भी शिकार किया है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्य शिकारी की पहचान कर ली गई है। वह बस्तर का रहने वाला है और उसे पकड़ने के लिए विशेष टीम Search Operation (तलाशी अभियान) पर रवाना हो चुकी है।
25 हजार रुपये का इनाम घोषित
टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने इस गंभीर मामले को देखते हुए शिकारियों पर 25,000 रुपये का Reward (इनाम) घोषित किया है। विभाग का कहना है कि वन्यजीवों के खिलाफ इस तरह के अपराध को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मालाबार गिलहरी के बारे में खास बातें (Key Facts)
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह जीव पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है:
- संरक्षण श्रेणी (Conservation Status): यह गिलहरी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की Schedule 1 (अनुसूची 1) में शामिल है, जिसका अर्थ है कि इसे बाघों के समान ही उच्च सुरक्षा प्राप्त है।
- पहचान (Identification): यह अपनी लंबी पूंछ और शरीर पर बैंगनी, लाल और मैरून रंगों के खूबसूरत मिश्रण के लिए जानी जाती है।
- आकार (Size): इसे दुनिया की सबसे बड़ी गिलहरी प्रजातियों में से एक माना जाता है।
- आवास (Habitat): यह मुख्य रूप से घने जंगलों के ऊंचे पेड़ों पर रहती है और जमीन पर बहुत कम आती है।
छत्तीसगढ़ में इस दुर्लभ जीव की मौजूदगी जैव-विविधता का प्रमाण है, लेकिन शिकार की ऐसी घटनाएं राज्य के Forest Management (वन प्रबंधन) और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में Patrolling (गश्त) बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।







