
PCC रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का अध्यक्ष के रुप में दो वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया है। 15 जुलाई 2023 को उन्होंने अध्यक्ष के रुप में पदभार ग्रहण किया था। तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। विधानसभा से महज चार महीने पहले उन्हें पार्टी की कमान सौंपी गई थी। इन दो वर्षों में कांग्रेस फिर एक बार 2018 से पहले वाली स्थिति में पहुंच गई है।
कुर्सी मिलते ही हाथ से निकल गई सत्ता
दीपक बैज को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी चुनावी माहौल के बीच मिली। हालांकि कुर्सी मिलते ही पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। दीपक बैज खुद चित्रकोट विधानसभा सीट से चुनाव हार गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में भी कांग्रेस तगड़ा झटका लगा।
बड़े छत्रपों के बीच अपनी पहचान बनाने की कोशिश जारी
कांग्रेस के बड़े छात्रपों के बीच दीपक बैज अपनी पहचान बनाने और पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। बैज पार्टी संगठन को मजबूत और सक्रिय रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसी महीने रायपुर में हुई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा इसका उदाहरण है।
PCC पदयात्रा के साथ सरकार के खिलाफ संघर्ष
खड़गे की इस सभा को पार्टी ने किसान-जवान महासभा का नाम दिया था। इसमें जुटी भीड़ ने एक समय संकेत दिया था कि वे संगठन को जनसंपर्क के माध्यम से मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं। पदयात्राओं के लिए कार्यकर्ताओं को रिचार्ज भी कर रहे हैं। बैज के नेतृत्व में पार्टी की तरफ से सरकार के खिलाफ लगातार आंदोलन भी किए जा रहे हैं।
बघेल की छाया में मिली अध्यक्ष की कुर्सी
2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला, तो पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल को पार्टी ने मुख्यमंत्री बना दिया। बघेल के स्थान पर मोहन मरकाम को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन 2023 का चुनाव आने से पहले दोनों के बीच मनभेद बढ़ गया। ऐसे समय में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए बघेल ने अपने करीबी रहे दीपक बैज को प्रदेश अध्यक्ष बनवा दिया।
शुरुआती कदमताल के बाद संबंधों में आई दरार
शुरुआत में बैज ने बघेल के साथ कदमताल मिलाने की कोशिश की, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद समीकरण बदलने लगे। सत्ता से बाहर होने के बाद संगठन के भीतर दबदबे और नेतृत्व को लेकर टकराव और ज्यादा खुलकर सामने आने लगे। हालिया मामला रायगढ़ के तमनार में कांग्रेस के प्रदर्शन का है, जिसमें बघेल अपने समर्थक विधायकों के साथ पहुंचे लेकिन प्रदेश अध्यक्ष वैज को इसकी जानकारी तक नहीं थी।
PCC छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
1981 में जन्में दीपक बैज ने कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे। 2008 में वे बस्तर एनएसयूआई के अध्यक्ष बनाए गए। 2009 में युवक कांग्रेस के बस्तर जिला महासचिव बनाए गए। राजनीति और अर्थशास्त्र में एमए बैज के पास एलएलबी की भी डिग्री है।
मोदी लहर के बावजूद जीता लोकसभा का चुनाव
दीपक बैज ने 2013 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा था। पार्टी ने उन्हें चित्रकोट विधानसभा से मैदान में उतारा। भाजपा के बैदूराम कश्यप को हरा कर बैज पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2018 में वे लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए। पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें बस्तर संसदीय क्षेत्र से मैदान में उतारा। मोदी लहर के बावजूद बैज सांसद का चुनाव जीत गए। 25 सालों के लंबे इंतजार के बाद बस्तर में उन्होंने कांग्रेस को जीत दिलाई।




