
रायपुर/दिल्ली । छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल रामावतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र और जेसीसीजे (JCCJ) के अध्यक्ष अमित जोगी की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अमित जोगी को फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने अब इस मामले की संयुक्त सुनवाई के लिए 23 अप्रैल की तारीख मुकर्रर की है।
दो अलग-अलग आदेशों को एक साथ सुनेगा सुप्रीम कोर्ट
अमित जोगी की ओर से देश के दिग्गज वकीलों की फौज ने सुप्रीम कोर्ट में दो प्रमुख फैसलों को चुनौती दी थी:
- CBI को मिली अपील की अनुमति: 25 मार्च 2026 को जारी वह आदेश जिसमें सीबीआई को अपील करने की इजाजत दी गई थी।
- हाईकोर्ट का सजा वाला फैसला: 2 अप्रैल 2026 का छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का वह ऐतिहासिक फैसला, जिसमें अमित जोगी को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों मामलों को एक साथ ‘टैग’ (संलग्न) कर दिया है, यानी अब इन दोनों कानूनी पहलुओं पर एक साथ बहस होगी।
दिग्गज वकीलों की फौज भी नहीं दिला पाई तत्काल राहत
अमित जोगी की ओर से पैरवी करने के लिए देश के सबसे महंगे और नामचीन वकीलों की टीम मैदान में उतरी। कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा, सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग ने जोगी का पक्ष रखा। हालांकि, जोगी ने सोशल मीडिया पर अपनी कानूनी टीम का आभार जताते हुए न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताया है, लेकिन 23 अप्रैल तक उनकी धड़कनें बढ़ी रहेंगी।
क्या है 21 साल पुराना यह पूरा मामला?
- 4 जून 2003: एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने तत्कालीन जोगी सरकार की चूलें हिला दी थीं।
- 31 आरोपी: मामले में कुल 31 आरोपी बनाए गए थे। इनमें से दो (बुल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह) सरकारी गवाह बन गए थे।
- निचली अदालत का फैसला: 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 को सजा सुनाई गई थी।
- लंबी कानूनी लड़ाई: रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस बरी किए जाने के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। मामला सुप्रीम कोर्ट से होते हुए वापस हाईकोर्ट पहुंचा।
- 6 अप्रैल 2026 का झटका: हाईकोर्ट ने अमित जोगी को धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी पाया और 3 हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट ने अमित जोगी को सरेंडर करने के लिए जो समय दिया था, वह तेजी से खत्म हो रहा है। अगर 23 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट से जोगी को स्टे (Stay) या राहत नहीं मिलती है, तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस फैसले का गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है।







