
रायपुर, चतुरपोस्ट डेस्क: छत्तीसगढ़ में आम जनता अगर एक या दो महीने का बिजली बिल (Electricity Bill) जमा न करे, तो बिजली कंपनी तुरंत कनेक्शन काटने पहुंच जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सूबे के सरकारी विभाग खुद देश के सबसे बड़े बकायादारों (Defaulting Departments) में शामिल हैं?
राज्य के अलग-अलग सरकारी महकमों पर बिजली कंपनी का कुल 3,035.37 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बिजली बिल बकाया (Dues) है। यह जानकारी छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में 13 जुलाई 2026 विधायक शेषराज हरवंश के प्रश्न के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी है। सरकार की इस ‘उधारी’ ने पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की वित्तीय स्थिति (Financial Condition) पर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। आइए इस रिपोर्ट में विस्तार से (In-Depth Analysis) समझते हैं कि आखिर किस विभाग ने सबसे ज्यादा बिजली मुफ्त में जलाई है।
कुल 1.57 लाख से अधिक कनेक्शन, अरबों का बकाया (Pending Dues)
विधानसभा में अतारांकित प्रश्न संख्या 66 (क्र. 256) के लिखित उत्तर में जो प्रपत्र ‘अ’ जारी किया गया है, वह सरकारी विभागों की लापरवाही को उजागर करता है। इस सरकारी सूची के मुताबिक, प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों के कुल 1,57,341 बिजली उपभोक्ता (Consumers) हैं।
इन सभी विभागों को मिलाकर कुल 3035.37 करोड़ रुपये की बकाया राशि (Outstanding Amount) जमा करनी है। हालांकि (However), बिजली बिल जमा करने के दावों के बीच यह राशि साल-दर-साल बढ़ती जा रही है, जो कि टैक्सपेयर्स के पैसे के सही इस्तेमाल पर सवालिया निशान लगाती है।
ये हैं सबसे बड़े बकायादार: दो विभागों पर ही ₹2500 करोड़ से ज्यादा का बोझ
इस पूरी लिस्ट (Electricity Bill Pending List) में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कुल बकाया का लगभग 85% से अधिक हिस्सा सिर्फ दो बड़े विभागों के हिस्से में है। इन विभागों ने बिजली का उपभोग तो जमकर किया, लेकिन बिल का भुगतान (Bill Payment) भूल गए।
- नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (Urban Development Department): यह विभाग राज्य का सबसे बड़ा डिफॉल्टर बनकर उभरा है। इसके 19,060 उपभोक्ताओं पर अकेले 1,525.18 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है।
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (Panchayat & Rural Development): ग्रामीण क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालने वाले इस विभाग के पास सबसे ज्यादा 57,075 बिजली कनेक्शन हैं। इस विभाग पर कुल 1,057.56 करोड़ रुपये की राशि लंबित है।
- लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE Department): पेयजल आपूर्ति और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस विभाग के 482 कनेक्शन हैं, जिन पर 111.42 करोड़ रुपये का बिल बकाया है।
शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग भी उधारी में आगे (Department Wise Dues)
इसके अतिरिक्त (In addition), बच्चों के भविष्य को संवारने वाले स्कूल शिक्षा विभाग (School Education) और लोगों का इलाज करने वाले स्वास्थ्य विभाग का हाल भी कुछ ऐसा ही है:
- स्कूल शिक्षा विभाग: राज्य भर के स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के 36,304 कनेक्शनों पर 83.39 करोड़ रुपये बकाया हैं।
- वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग: पर्यावरण की रक्षा करने वाले इस महकमे के 3,399 कनेक्शन हैं और इन पर 40.70 करोड़ रुपये की देनदारी है।
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग: अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के 5,264 कनेक्शनों पर बिजली कंपनी का 32.56 करोड़ रुपये का बिल पेंडिंग है।
- महिला एवं बाल विकास विभाग: आंगनबाड़ियों और महिला कल्याण केंद्रों से जुड़े 21,978 उपभोक्ताओं पर 28.57 करोड़ रुपये का बकाया दर्ज है।
विभागवार बकाया राशि की पूरी सूची (Complete Defaulting List 2026)
पाठकों की जानकारी के लिए हम यहाँ विधानसभा में पेश की गई विभागवार (Department-Wise) पूरी लिस्ट दे रहे हैं, ताकि आप समझ सकें कि आपके जिले या क्षेत्र का कौन सा विभाग उधारी की बिजली से चल रहा है:
| स. क्र. | विभाग का नाम | उपभोक्ता संख्या | कुल बकाया राशि (करोड़ रुपये में) |
| 1 | नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग | 19060 | 1525.18 |
| 2 | पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग | 57075 | 1057.56 |
| 3 | लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग | 482 | 111.42 |
| 4 | स्कूल शिक्षा विभाग | 36304 | 83.39 |
| 5 | वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग | 3399 | 40.70 |
| 6 | स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग | 5264 | 32.56 |
| 7 | अनु. जाति/जनजाति, पिछडा वर्ग कल्याण | 2802 | 30.95 |
| 8 | महिला एवं बाल विकास विभाग | 21978 | 28.57 |
| 9 | जल संसाधन विभाग | 1595 | 28.47 |
| 10 | आवास एवं पर्यावरण विभाग | 608 | 23.30 |
| 11 | लोक निर्माण विभाग (PWD) | 1183 | 14.98 |
| 12 | राजस्व एवं आपदा प्रबंधन | 781 | 14.48 |
| 13 | कृषि विकास एवं कृषक कल्याण | 1447 | 7.19 |
| 14 | उच्च शिक्षा विभाग | 615 | 5.62 |
| 15 | सहकारिता एवं सहकारी समिति | 1476 | 4.16 |
| 16 | पशुधन विकास विभाग | 719 | 3.44 |
| 17 | कौशल विकास व तकनीकी शिक्षा | 272 | 3.01 |
| 18 | विधि एवं विधायी कार्य विभाग | 282 | 2.91 |
| 19 | गृह विभाग (पुलिस विभाग) | 70 | 2.21 |
| 20 | जन संपर्क विभाग | 323 | 1.57 |
| 21 | पर्यटन विभाग | 118 | 1.51 |
| 22 | जेल विभाग | 62 | 1.50 |
| 23 | खेल एवं युवा कल्याण | 41 | 1.41 |
| 24 | वाणिज्य एवं उद्योग विभाग | 105 | 1.14 |
| 25 | समाज कल्याण विभाग | 46 | 1.04 |
(नोट: अन्य छोटे विभागों जैसे वित्त, श्रम, खनिज, मत्स्य, और नया रायपुर स्मार्ट सिटी का बकाया 1 करोड़ रुपये से कम है, लेकिन वे भी सूची में शामिल हैं)
क्या आम जनता के नियम सरकारों पर लागू नहीं होते?
परिणामस्वरूप (Consequently), बिजली कंपनियों (CSPDCL) पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। पावर जनरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए पैसों की सख्त जरूरत होती है। जब सरकारी महकमे ही समय पर भुगतान (Timely Payment) नहीं करेंगे, तो कंपनियों को बैंकों से कर्ज लेना पड़ता है या फिर आम उपभोक्ताओं की बिजली दरें (Power Tariffs) बढ़ानी पड़ती हैं।
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विपक्ष इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। विशेषज्ञों (Experts) का कहना है कि सरकार को सभी विभागों के लिए एक विशेष बजट आवंटित कर इस भारी-भरकम राशि का एकमुश्त निपटारा (One-Time Settlement) करना चाहिए, ताकि प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमराने से बच सके।







