
नवा रायपुर, न्यूज डेस्क। छत्तीसगढ़ सरकार के वाणिज्यिक कर विभाग ने राज्य में माल और सेवा कर (GST) के तहत पेय पदार्थों (Beverages) के वर्गीकरण को लेकर एक नई अधिसूचना जारी की है। विभाग द्वारा जारी इस आदेश के बाद सोशल मीडिया और बाजार में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि क्या अब सोया मिल्क, पैक्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक्स और नॉन-अल्कोहलिक बीयर जैसी चीजें महंगी होने जा रही हैं?
वाणिज्यिक कर विभाग के उप सचिव शिव कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी यह आदेश 1 मई 2026 से प्रभावी कर दिया गया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सरकार के इस फैसले का आपकी जेब और इन प्रोडक्ट्स की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा।
सबसे बड़ा सवाल: क्या बाजार में बदल जाएंगी कीमतें?
जवाब है- नहीं, आम उपभोक्ताओं के लिए सीधे तौर पर कीमतें नहीं बढ़ेंगी।
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वाणिज्यिक कर विभाग ने टैक्स की दरों (Tax Rates) में कोई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की है। जो ड्रिंक्स पहले 5% GST के दायरे में थे, वे अब भी 5% (2.5% SGST + 2.5% CGST) पर ही रहेंगे। इसी तरह, जो ड्रिंक्स पहले से ही उच्च टैक्स यानी कुल 40% (20% SGST + 20% CGST व सेस) के दायरे में आते थे, उन पर वही दर लागू रहेगी।
तो फिर इस बदलाव का असली असर क्या होगा?
कीमतें न बदलने के बावजूद इस अधिसूचना का बाजार और कंपनियों पर गहरा असर पड़ेगा:
1. टैक्स चोरी और कंपनियों की ‘चालबाजी’ पर लगेगी लगाम
अब तक बाजार में कई कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स (जैसे फ्लेवर्ड सोया ड्रिंक्स या मिक्स फ्रूट बेवरेजेस) को सामान्य कैटेगरी में दिखाकर कम टैक्स (5%) चुका रही थीं, जबकि कायदे से उन्हें उच्च टैक्स देना चाहिए था। अब आठ अंकों का बिल्कुल सटीक टैक्स कोड (HSN Code) तय हो जाने से कंपनियों के लिए टैक्स छुपाना या गलत कैटेगरी का फायदा उठाना नामुमकिन हो जाएगा।
2. नॉन-अल्कोहलिक बीयर और एनर्जी ड्रिंक्स पर बढ़ेगी कड़ाई
युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे एनर्जी ड्रिंक्स (जैसे रेडबुल, मॉन्स्टर, स्टिंग आदि) और अल्कोहल-मुक्त बीयर (Non-Alcoholic Beer) को सरकार ने कड़ाई से सबसे उच्च टैक्स यानी 20% राज्य कर (SGST) की अनुसूची III में लॉक कर दिया है। इससे इन कंपनियों की री-ब्रांडिंग या टैक्स बचाने की कोशिशों पर पूरी तरह पानी फिर गया है।
3. पिछले एक महीने के टैक्स असेसमेंट पर सीधा असर
चूंकि यह नियम 1 मई 2026 से यानी बैकडेट से लागू किया गया है, इसलिए पिछले एक महीने के भीतर जिन कंपनियों ने इन कोड्स के तहत व्यापार किया है, उन्हें अब इसी नए संशोधित वर्गीकरण के हिसाब से अपना टैक्स रिटर्न और मिलान (Assessment) करना होगा। इससे राज्य सरकार के राजस्व (Revenue) में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
💡 एक नजर में समझें: किस प्रोडक्ट का कौन सा कोड हुआ तय?
कम टैक्स (कुल 5% GST) के दायरे वाले प्रोडक्ट्स:
- सोया मिल्क व संबंधित ड्रिंक्स: अब कोड 2202 99 21 और 2202 99 29 के तहत आएंगे।
- फलों के रस वाले पेय पदार्थ (जैसे मैंगो/ऑरेंज ड्रिंक्स): अब कोड 2202 99 31 और 2202 99 39 के तहत वर्गीकृत होंगे।
उच्च टैक्स (कुल 40% GST व सेस) के दायरे वाले प्रोडक्ट्स:
- नॉन-अल्कोहलिक बीयर (0.5% से कम अल्कोहल वाली): इसे कोड 2202 91 00 में शामिल किया गया है।
- एनर्जी ड्रिंक्स व सॉफ्ट ड्रिंक्स: इन्हें कोड 2202 99 91 और 2202 99 99 में मजबूती से लॉक कर दिया गया है।
निष्कर्ष: आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि उन्हें इन ड्रिंक्स के लिए जेब से ज्यादा पैसे नहीं चुकाने होंगे, लेकिन कंपनियों और डीलर्स के लिए अब पाई-पाई का टैक्स हिसाब देना अनिवार्य हो गया है।





