
रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों बुजुर्गों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर (Big Breaking News) सामने आई है। राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011’ (Public Service Guarantee Act) के दायरे को बढ़ा दिया है। अब इस कानून के अंतर्गत पेंशन सहित 14 बेहद महत्वपूर्ण वित्तीय सेवाओं (Financial Services) को अधिसूचित कर दिया गया है।
सरकार के इस बड़े फैसले के बाद अब किसी भी विभाग के अधिकारी पेंशन के मामलों को दबाकर नहीं बैठ सकेंगे, क्योंकि हर सेवा के निपटारे के लिए एक सख्त समय-सीमा (Deadline) तय कर दी गई है।
🔥 चतुरपोस्ट एक्सक्लूसिव (Chaturpost Exclusive): छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम में पेंशन को शामिल करने की इस बड़ी खबर को सबसे पहले चतुरपोस्ट.कॉम (chaturpost.com) ने आज सुबह प्रमुखता से प्रकाशित (Break) किया था, जिसके बाद अब पेंशनर्स महासंघ की यह बड़ी प्रतिक्रिया (First Reaction) सामने आई है। सटीक और सबसे तेज खबरों के लिए जुड़े रहें चतुरपोस्ट के साथ।
पेंशनर्स महासंघ ने किया फैसले का स्वागत (Welcome Step)
छत्तीसगढ़ सरकार के इस कदम की चौतरफा सराहना हो रही है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने इस निर्णय का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने अपनी त्वरित प्रतिक्रिया (Immediate Reaction) देते हुए कहा:
“यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता (Administrative Transparency) और जवाबदेही (Accountability) को तय करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। अब हमारे बुजुर्गों को अपने ही हक के पैसों के लिए अंतहीन इंतजार नहीं करना पड़ेगा।”
तय समय-सीमा से बढ़ेगी पारदर्शिता (Key Benefits)
श्री वीरेन्द्र नामदेव ने आगे बताया कि लंबे समय से राज्य के पेंशनर्स को पेंशन स्वीकृति (Pension Sanction), पेंशन में संशोधन, पारिवारिक पेंशन (Family Pension), बकाया भुगतान (Arrears Payment) और अन्य वित्तीय मामलों (Financial Matters) के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। जटिल कार्यालयीन प्रक्रियाओं (Bureaucratic Red Tape) की वजह से फाइलें महीनों तक अटकी रहती थीं।
अब Chhattisgarh Pension Rules में लोक सेवा गारंटी के जुड़ जाने से निम्नलिखित बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:
- समयबद्ध सेवाएं (Time-bound Services): पेंशन से जुड़े हर काम के लिए अब दिन निर्धारित होंगे, जिससे बुजुर्गों को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी।
- भ्रष्टाचार पर लगाम (Check on Corruption): फाइलों के अटकने की गुंजाइश खत्म होने से सिस्टम में पारदर्शिता (Transparency) आएगी।
- जवाबदेही तय (Fixed Accountability): काम में देरी होने पर संबंधित बाबू या अधिकारी की जवाबदेही तय होगी।
“सिर्फ कागजों पर न रहे नियम, हो सख्त एक्शन” – वीरेन्द्र नामदेव
महासंघ के प्रांताध्यक्ष ने सरकार को आगाह करते हुए एक बहुत ही व्यावहारिक (Practical) बात कही है। उन्होंने कहा कि केवल अधिसूचना (Notification) जारी कर देने से असली उद्देश्य पूरा नहीं होगा। सरकार का यह प्रयास तभी सार्थक (Meaningful) सिद्ध होगा, जब इसका जमीन पर ईमानदारी और कठोरता से क्रियान्वयन (Strict Implementation) सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने मांग की है कि यदि किसी भी स्तर पर पेंशनर्स के मामलों को जानबूझकर पेंडिंग (Pending Cases) रखा जाता है या बेवजह की अड़चनें पैदा की जाती हैं, तो दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) की जानी चाहिए।
“पेंशनर्स समाज का सबसे सम्मानित वर्ग हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित समय-सीमा का पालन हर हाल में हो। लापरवाही, देरी या भ्रष्टाचार के प्रति ‘शून्य सहनशीलता’ (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाए।” — वीरेन्द्र नामदेव, प्रांताध्यक्ष (भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ)
इन दिग्गज नेताओं ने भी उठाई प्रभावी क्रियान्वयन की मांग
सरकार के इस फैसले की सराहना करने और इसे जमीनी स्तर पर मजबूती से लागू करने की मांग करने वालों में महासंघ के कई प्रमुख पदाधिकारी (Key Representatives) शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- कार्यकारी प्रांताध्यक्ष: जे पी मिश्रा
- महामंत्री: अनिल गोल्हानी एवं प्रवीण कुमार त्रिवेदी
- संगठन मंत्री: टी पी सिंह एवं अरुण तिवारी
- कोषाध्यक्ष: बी एस दसमेर
- कार्यालय मंत्री: अनिल पाठक
- संभागीय अध्यक्ष: शैलेन्द्र सिन्हा
- रायपुर जिला अध्यक्ष: आर जी बोहरे
- जिला सचिव: ओ डी शर्मा
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है कि राज्य सरकार इस नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कर बुजुर्गों को एक पारदर्शी और सुगम भविष्य देने में सफल होगी।







