
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज बिजली कंपनी में बड़ी सरगर्मी का दिन है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संघ और संविदा कर्मियों ने पावर कंपनी प्रबंधन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। अपनी लंबित मांगों (Pending Demands) और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघ ने आज यानी 22 जून 2026 को एक दिवसीय सामूहिक अवकाश (Mass Leave) का ऐलान किया है।
इसके साथ ही, संविदा कर्मचारियों ने आज से ही अनिश्चितकालीन हड़ताल (Indefinite Strike) शुरू कर दी है। इस दोहरे संकट के कारण पूरे छत्तीसगढ़ में बिजली आपूर्ति बाधित होने यानी ‘ब्लैकआउट’ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
प्रबंधन की प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ खोला मोर्चा
संघ के प्रांतीय महासचिव विजय नाग ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति (Press Release) के माध्यम से पावर कंपनी के रवैये पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों की लगातार उपेक्षा (Continuous Neglect) की जा रही है।
कर्मचारियों के इस बड़े आंदोलन (Employee Protest) के पीछे कई मुख्य कारण हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना अब नामुमकिन हो चुका है:
- प्रशासनिक तानाशाही (Administrative Dictatorship): प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों की जायज मांगों को सुनने के बजाय उनके खिलाफ लगातार एकपक्षीय और दंडात्मक निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
- संवाद का भारी अभाव (Lack of Communication): इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए श्रम आयुक्त (Labor Commissioner) ने मध्यस्थता करने का प्रयास किया था। इसके बावजूद, प्रबंधन ने कोई सकारात्मक पहल (Positive Initiative) नहीं की, बल्कि दबावपूर्ण रवैया अपनाया, जो औद्योगिक शांति (Industrial Peace) के पूरी तरह विपरीत है।
- पदोन्नति में विसंगति (Promotion Anomalies): हालांकि यह राज्य सरकार का एक प्रमुख उपक्रम है, लेकिन यहां सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के नियमों के अनुसार पदोन्नति प्रक्रिया संचालित नहीं की जा रही है।
क्या है संघ की प्रमुख मांग?
संघ का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार के अन्य विभागों की तर्ज पर विद्युत मंडल में भी स्पष्ट और पारदर्शी पदोन्नति प्रक्रिया (Promotion Process) को लागू करवाना है। चूंकि यह विभाग सीधे मुख्यमंत्री के अधीन आता है, इसके बावजूद नियमों की ऐसी खुली अनदेखी कर्मचारियों के लिए बेहद चिंता का विषय बनी हुई है।
अस्तित्व की लड़ाई: लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष की तैयारी
बिजली विभाग के आरक्षित वर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों का स्पष्ट मानना है कि अपनी Identity (अस्तित्व) और अधिकारों की रक्षा के लिए अब यह संघर्ष बेहद जरूरी हो गया है। इस सामूहिक अवकाश (Mass Casual Leave) के माध्यम से कर्मचारी अपनी एकजुटता और संगठन की ताकत (Organizational Strength) का प्रदर्शन करना चाहते हैं।
संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों ने बिजली उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा, “प्रबंधन को अब कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।”
संविदा कर्मियों की दोटूक चेतावनी- ‘ब्लैकआउट’ हुआ तो सरकार होगी जिम्मेदार
एक तरफ जहां आरक्षित वर्ग सामूहिक अवकाश पर है, वहीं दूसरी तरफ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का मोर्चा संभाल लिया है। विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हरिचरण साहू के नेतृत्व में पूरे छत्तीसगढ़ में सघन जागरूकता अभियान (Awareness Campaign) और पोस्टर वॉर (Poster Campaign) तेज कर दिया गया है।
संविदा संगठन की प्रदेश महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने पावर कंपनी प्रबंधन को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि पावर कंपनी या राज्य सरकार द्वारा समय रहते उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय (Positive Decision) नहीं लिया जाता है, तो पूरे राज्य की बिजली व्यवस्था ठप हो जाएगी। इस CSPDCL Strike के दौरान जनता को होने वाली किसी भी प्रकार की परेशानी या बिजली कटौती की पूरी जिम्मेदारी खुद पावर कंपनी प्रबंधन और राज्य सरकार की होगी।
क्यों आक्रोशित हैं 2016-18 बैच के संविदा कर्मचारी? (Double Standard)
महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रबंधन की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी में कार्यरत ये संविदा कर्मचारी (Contractual Workers) पिछले 8 से 10 वर्षों से लगातार नियमितीकरण (Regularization) की आस में अपनी जान जोखिम में डालकर पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग उनके साथ दोहरा रवैया (Double Standard) अपना रहा है, जो कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है:
- ⚖️ पूरी कानूनी प्रक्रिया से हुई थी भर्ती: ये सभी कर्मचारी वर्ष 2016 और 2018 में बकायदा ऑफिशियल मेरिट लिस्ट, कड़े शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Test) और सरकार के आरक्षण नियमों (Reservation Rules) का शत-प्रतिशत पालन करते हुए पूरी पारदर्शी व्यवस्था के तहत भर्ती हुए थे।
- 📉 सीनियरिटी को किया गया दरकिनार: विभाग के पुराने रिकॉर्ड्स बताते हैं कि इससे पहले वर्ष 2007, 2010 और 2011 के बैच में भर्ती हुए संविदा कर्मचारियों को महज 2 साल की सेवा के भीतर ही रेगुलर (Regularize) कर दिया गया था। लेकिन, 2016-18 के इस अभागे बैच को 10 साल बीत जाने के बाद भी स्थायी कर्मचारी (Permanent Employee) नहीं बनाया गया है।
मैनपावर क्राइसिस से जूझ रहा है बिजली विभाग (Manpower Crisis)
छत्तीसगढ़ के बिजली विभाग (CSPDCL) में इस वक्त मैदानी स्तर पर ग्राउंड स्टाफ की भारी किल्लत चल रही है। इसके कारण पूरे प्रदेश में एक बड़ा Human Resource Crisis (मानव संसाधन संकट) खड़ा हो गया है। ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले कर्मचारियों की कमी के कारण वर्तमान स्टाफ पर काम का बोझ अत्यधिक बढ़ गया है:
- ❌ खाली पड़े हैं हजारों नियमित पद: विभाग में इस समय 4500 से अधिक नियमित लाइन परिचारक (Line Attendants) के पद खाली हैं, जिन्हें वर्षों से नहीं भरा गया है।
- 🛑 नई भर्ती पर लगी है अघोषित रोक: साल 2011 के बाद से बिजली विभाग में ग्राउंड स्टाफ के लिए कोई भी बड़ी नियमित भर्ती (Regular Recruitment) आयोजित नहीं की गई है।
- 👴 उम्रदराज स्टाफ पर काम का भारी दबाव: विभाग के पुराने नियमित कर्मचारी अब उम्रदराज (Aged Staff) हो चुके हैं और फील्ड में खंभों पर चढ़ना या कठिन तकनीकी काम करने में असमर्थ हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ में उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ती संख्या (Number of Consumers) का पूरा दबाव इन संविदा कर्मियों पर ही आ गया है, जिनसे बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के ओवरटाइम काम कराया जा रहा है।
कड़ा एक्शन: कंपनी प्रबंधन ने दी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
इस बड़े आंदोलन और CSPDCL Strike को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CPTCL) ने भी बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। विभाग ने हड़ताली कर्मचारियों को झुकाने के लिए सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई भी कर्मचारी इस आंदोलन या सामूहिक अवकाश (Mass Casual Leave) में शामिल होता है, तो उसके खिलाफ तत्काल दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) सुनिश्चित की जाएगी।
अब देखना यह होगा कि क्या राज्य सरकार और पावर कंपनी प्रबंधन इन कर्मचारियों की मांगों को मानकर इस बड़े संकट को टालते हैं, या फिर छत्तीसगढ़ की जनता को इस भीषण गर्मी और उमस के मौसम में भारी बिजली कटौती (Power Cut) का सामना करना पड़ेगा। चतुरपोस्ट डॉट कॉम इस खबर पर लगातार पल-पल की नजर बनाए हुए है।







