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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का सरकारी कर्मचारियों की ‘सीनियरिटी’ पर ऐतिहासिक फैसला, रद्द हुआ सरकारी आदेश

बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (High Court of Chhattisgarh at Bilaspur) ने छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी यानी क्रेडा (CREDA) में लंबे समय से चल रहे Seniority Dispute (वरिष्ठता विवाद) मामले में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल (Hon’ble Shri Justice Sanjay K. Agrawal) की एकल पीठ ने शासकीय सेवा में वरिष्ठता निर्धारण (Determination of Seniority) को लेकर कानून की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।

इस कानूनी जंग में जहां एक तरफ सीधी भर्ती (Direct Recruitment) के माध्यम से आए असिस्टेंट इंजीनियर (सहायक अभियंता) थे, वहीं दूसरी तरफ पदोन्नति (Promotion) के जरिए पिछली तारीख से काल्पनिक वरिष्ठता (Notional Seniority) का दावा करने वाले इंजीनियर थे। न्यायालय ने अपने आदेश में साफ किया है कि किसी भी कर्मचारी को उस तारीख से वरिष्ठता नहीं दी जा सकती, जब वह वास्तव में उस कैडर का हिस्सा ही नहीं था। आइए इस पूरे मामले का विस्तृत विश्लेषण (In-depth Analysis) करते हैं।

क्या है पूरा मामला? (Factual Background of the Case)

यह पूरा विवाद (Dispute) साल 2020 में तब शुरू हुआ, जब दीपक साहू और 5 अन्य असिस्टेंट इंजीनियर्स ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका (Writ Petition) दायर की थी। इन सभी याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति क्रेडा (CREDA) में 25 अप्रैल 2013 को विज्ञापित और स्वीकृत पदों पर सीधी भर्ती के जरिए नियमानुसार हुई थी।

विवाद का मुख्य कारण (The Core Issue):

  • सीधी भर्ती वाले इंजीनियर्स: इन याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति 25-04-2013 को हुई और वे तभी से असिस्टेंट इंजीनियर (AE) के पद पर कार्यरत थे।
  • पदोन्नति वाले इंजीनियर्स: दूसरी तरफ, जूनियर इंजीनियर (JE) के पद से प्रमोट होकर आए कर्मचारियों (निजी प्रतिवादियों) को वास्तव में 11 फरवरी 2015 को डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (DPC) की सिफारिश पर AE पद पर पदोन्नत किया गया था।
  • विवाद की जड़: क्रेडा (CREDA) प्रबंधन ने 26 अक्टूबर 2019 को एक प्रशासनिक आदेश जारी कर इन प्रमोटेड इंजीनियर्स को 01 जनवरी 2013 से ‘काल्पनिक वरिष्ठता’ (Notional Seniority) प्रदान कर दी। इसके परिणामस्वरूप, 13 फरवरी 2020 को जारी फाइनल वरिष्ठता सूची (Gradation List) में प्रमोटेड इंजीनियर्स को सीधी भर्ती वाले इंजीनियर्स से ऊपर (सीनियर) दिखा दिया गया। इसी आदेश को सीधी भर्ती वाले इंजीनियर्स ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें (Arguments in the High Court)

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सेवा विधि (Service Law) के स्थापित सिद्धांतों का हवाला देते हुए बेहद मजबूत दलीलें पेश कीं।

याचिकाकर्ताओं के वकीलों का तर्क (Petitioners’ Submissions):

  • कैडर में प्रवेश की तारीख: याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि प्रतिवादियों को वास्तव में 11-02-2015 को प्रमोट किया गया था। इसलिए, वे उसी तारीख से असिस्टेंट इंजीनियर के कैडर (Cadre) का हिस्सा माने जाएंगे, उससे पहले नहीं।
  • खाली पदों (Vacancies) से सीनियरिटी नहीं: उन्होंने तर्क दिया कि महज इसलिए कि कोई पद साल 2008 या 2013 से खाली था, कोई कर्मचारी पिछली तारीख से वरिष्ठता का दावा नहीं कर सकता।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला: याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के कई स्थापित फैसलों का संदर्भ दिया, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि प्रमोशन उसी दिन से प्रभावी होता है जब वह वास्तव में दिया जाता है, न कि वैकेंसी की तारीख से।
क्रेडा और प्रतिवादियों का पक्ष

दूसरी तरफ, प्रतिवादियों और क्रेडा के वकीलों ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि क्रेडा सेवा नियम 2004 में साल 2012 में संशोधन किया गया था, जिसके तहत प्रमोशन के लिए जरूरी अनुभव को 8 साल से घटाकर 5 साल कर दिया गया था। उनका तर्क था कि ये कर्मचारी 2013 में ही प्रमोशन के पात्र (Eligible) हो चुके थे, लेकिन विभाग की ओर से डीपीसी (DPC) बुलाने में प्रशासनिक देरी (Administrative Lapse) हुई। इसलिए, विभाग की गलती का नुकसान कर्मचारियों को नहीं होना चाहिए और उन्हें 01-01-2013 से वरिष्ठता मिलना न्यायसंगत है।

“Born in the Cadre”: वरिष्ठता पर क्या कहता है कानून?

माननीय न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल ने इस CREDA Seniority Dispute मामले में सर्विस लॉ के बुनियादी सिद्धांतों की बहुत ही सुंदर और स्पष्ट व्याख्या की। कोर्ट ने ‘ब्लैक लॉ डिक्शनरी’ का उल्लेख करते हुए वरिष्ठता के कानूनी अर्थ को समझाया।

न्यायालय द्वारा रेखांकित किए गए मुख्य विधिक सिद्धांत:

  1. वास्तविक कार्यभार की तारीख: कोर्ट ने साफ कहा कि वरिष्ठता उसी दिन से मिलेगी जिस दिन कर्मचारी वास्तव में उस पद या कैडर (Cadre) में आया हो। जब तक कोई व्यक्ति असिस्टेंट इंजीनियर बना ही नहीं, तब तक उसे उस कैडर की वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया जा सकता।
  2. सहानुभूति का स्थान नहीं: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विभाग की देरी के कारण प्रमोट होने वाले कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए, उन सीधी भर्ती वाले कर्मचारियों के वैध अधिकारों को नहीं मारा जा सकता जो पहले ही प्रतियोगिता परीक्षा पास करके पद पर आ चुके हैं।
  3. भूतलेक्षी प्रभाव (Retrospective Effect) का नियम: कोर्ट ने पाया कि क्रेडा के सेवा नियमों में कहीं भी प्रमोटेड कर्मचारियों को पिछली तारीख (Retrospective) से वरिष्ठता देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं था। कानून के अभाव में ऐसा कोई भी प्रशासनिक आदेश अवैध माना जाएगा।

हाईकोर्ट का अंतिम और निर्णायक फैसला (The Verdict)

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई और विधिक दस्तावेजों का बारीकी से अवलोकन (Circumspection) करने के बाद याचिकाकर्ताओं के पक्ष में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

कोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

  • आदेश निरस्त: कोर्ट ने क्रेडा द्वारा जारी 26 अक्टूबर 2019 के उस आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द (Quash) कर दिया, जिसके तहत प्रमोटेड कर्मचारियों को काल्पनिक वरिष्ठता दी गई थी।
  • वरिष्ठता सूची रद्द: इसके साथ ही 13 फरवरी 2020 को जारी की गई विवादित फाइनल वरिष्ठता सूची (Gradation List) को भी कोर्ट ने पूरी तरह से निरस्त कर दिया है।
  • नई सूची बनाने का आदेश: हाईकोर्ट ने क्रेडा प्रशासन को निर्देशित किया है कि वे नियमों के प्रकाश में एक नई वरिष्ठता सूची तैयार करें, जिसमें 2013 में नियुक्त हुए सीधी भर्ती वाले असिस्टेंट इंजीनियर्स (Direct Recruit AEs) को नियमानुसार उचित स्थान (ऊपर) दिया जाए।

इस निर्णय का सरल विधिक निष्कर्ष (Conclusion)

इस पूरे जजमेंट का सबसे सरल और महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि “किसी भी शासकीय कर्मचारी को उस पद की वरिष्ठता (Seniority) किसी पिछली या काल्पनिक तारीख से नहीं दी जा सकती, जिस पद पर वह उस समय वास्तव में कार्यरत ही नहीं था।”

यह फैसला किन मामलों में मील का पत्थर साबित होगा?

यह निर्णय छत्तीसगढ़ और देश के अन्य सेवा मामलों (Service Law Matters) के लिए एक नजीर बन गया है। यह विशेष रूप से उन विवादों में अत्यधिक उपयोगी होगा जहां:

  • सीधी भर्ती बनाम पदोन्नत कर्मचारियों के बीच वरिष्ठता का विवाद (Direct Recruit vs Promotee Seniority) हो।
  • विभाग द्वारा डीपीसी में देरी (Delayed DPC Cases) की गई हो।
  • नियमों के खिलाफ जाकर बैक-डेट से प्रमोशन या काल्पनिक वरिष्ठता (Retrospective Promotion / Notional Seniority) दी जा रही हो।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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