
रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (CSPTCL) में जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती परीक्षा के परिणाम के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से भटक रहे प्रथम प्रतीक्षा सूची (First Waiting List) के अभ्यर्थियों ने अब प्रदेश के कद्दावर नेता और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात की है।
इस मुलाकात के बाद पीड़ित अभ्यर्थियों को एक बड़ी और सकारात्मक (Positive) उम्मीद जगी है। डॉ. रमन सिंह ने अभ्यर्थियों की चिंताओं को बेहद गंभीरता से सुना और इस दिशा में तुरंत कदम उठाने का भरोसा दिलाया है।
डॉ. रमन सिंह ने दिया जल्द नियुक्ति का आश्वासन
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अभ्यर्थियों से चर्चा के बाद स्पष्ट किया कि वे इस गंभीर मामले को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर प्रथम प्रतीक्षा सूची (First Waiting List) के आधार पर जल्द से जल्द नियुक्ति प्रदान करने की बात कही है।
इस महत्वपूर्ण विषय पर वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और ऊर्जा विभाग (Energy Department) के प्रभारी मंत्री विष्णुदेव साय से भी विशेष चर्चा करेंगे। डॉ. रमन सिंह ने आश्वस्त किया है कि इस पूरी भर्ती प्रक्रिया (Recruitment Process) को पारदर्शी तरीके से जल्द से जल्द पूर्ण कराया जाएगा।
इसके साथ ही, वे छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह से भी इस तकनीकी पेंच को सुलझाने और खाली पदों को भरने के लिए सकारात्मक पहल (Positive Initiative) करने को कहेंगे।
CSPTCL प्रबंधन का क्या है रुख?
इस पूरे मामले पर जब CSPTCL के प्रबंध निदेशक (MD) आर.के. शुक्ला से जानकारी मांगी गई, तो विभाग की तरफ से एक तकनीकी जवाब सामने आया है। प्रबंधन के अनुसार:
- इस मामले पर आवश्यक विभागीय कार्यवाही (Departmental Action) पूरी कर ली गई है।
- वर्तमान में पूरी फाइल उच्च अधिकारियों के समक्ष अंतिम निर्णय और समीक्षा (Review) के लिए विचाराधीन है।
- प्रशासनिक हरी झंडी मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
क्या है पूरा विवाद और कैसे बिगड़ा मेरिट का गणित?
दरअसल, यह पूरा मामला मार्च 2024 में आयोजित हुई असिस्टेंट इंजीनियर (AE) और जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती परीक्षा से जुड़ा हुआ है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि बिजली विभाग के गलत नीतिगत फैसलों के कारण योग्य उम्मीदवार आज सड़कों पर घूमने को मजबूर हैं।
अभ्यर्थियों की मुख्य आपत्तियां और विभाग की बड़ी चूक:
- उलटी गंगा बहाई (Reverse Process): स्थापित नियमों के मुताबिक, उच्च पदों यानी असिस्टेंट इंजीनियर (AE) की भर्ती प्रक्रिया पहले पूरी की जानी चाहिए थी। ताकि दोनों परीक्षाओं में पास होने वाले अभ्यर्थी एई का पद चुनते और जेई की सीटें खाली न होतीं। लेकिन विभाग ने जेई का रिजल्ट पहले जारी कर आनन-फानन में नियुक्तियां (Appointments) दे दीं।
- असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती में भारी देरी (Delay in AE Recruitment): दूसरी तरफ, सहायक अभियंता (AE) के पदों पर लंबी लेत-लतीफी की गई। आखिरकार जनवरी 2026 में जाकर एई पदों पर नियुक्ति प्रदान की गई।
- मेरिट सूची हुई बुरी तरह प्रभावित (Affected Merit List): जिन प्रतिभावान अभ्यर्थियों का चयन एई और जेई दोनों पदों पर हुआ था, उन्होंने पहले जेई का पद जॉइन कर लिया। बाद में जनवरी 2026 में एई का रिजल्ट आते ही उन्होंने जेई का पद छोड़ दिया।
- मुख्य सूची के छात्र हुए चयन से बाहर (Deserving Candidates Out): इस प्रशासनिक विफलता के चलते मुख्य चयन सूची के कई होनहार अभ्यर्थी अंतिम चयन से चूक गए और मेरिट का पूरा गणित बिगड़ गया।
विभाग के खोखले आश्वासन: क्या वादे से मुकर रहा प्रबंधन?
वर्तमान स्थिति (Current Situation) यह है कि जेई का पद छोड़कर एई में जाने वाले उम्मीदवारों की वजह से विभाग में जूनियर इंजीनियर के कई पद खाली हो चुके हैं। इसके बावजूद विभाग की तरफ से रिक्त पदों पर जूनियर इंजीनियर प्रथम प्रतीक्षा सूची (First Waiting List) से संबंधित कोई भी आधिकारिक डेटा या पारदर्शी जानकारी साझा नहीं की जा रही है। इससे अभ्यर्थियों के बीच अविश्वास और हताशा (Disappointment) का माहौल है।
मुख्यमंत्री से मिलने के प्रयास भी रहे बेअसर
परेशान युवा अपनी गुहार लेकर पिछले 2 से 3 महीनों से लगातार प्रदेश के मुखिया और ऊर्जा मंत्री मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलने का प्रयास (Consistent Efforts) कर रहे हैं।
- चक्कर काटने को मजबूर: सीएम हाउस से लेकर मंत्रालय (Mantralaya) तक लगातार दौड़ लगाने के बाद भी अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री से सीधे मिलकर अपनी बात रखने का समय नहीं मिल पाया है।
- भविष्य पर मंडराया संकट: अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार समय बीतने के कारण उनकी उम्र सीमा (Age Limit) समाप्त होने की कगार पर है। कठिन परीक्षा पास करने के बाद भी वे केवल प्रशासनिक लापरवाही के कारण बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं।







