कर्मचारी हलचल

CSPDCL पदोन्‍नति में सहमति पत्र का नया खेल: कुछ काला-पीला तो नहीं हो रहा! CSPDCL की मंशा पर उठे सवाल

CSPDCL रायपुर। छत्‍तसगढ़ की सरकारी बिजली वितरण कंपनी में दनादन जारी हो रहे प्रमोशन आर्डर में सहमति पत्र का नया लोचा आ गया है। कंपनी प्रबंधन की तरफ से पदोन्‍नति पाने वाले एक सहमति पत्र भरवाया जा रहा है। यह काम केवन वितरण कंपनी में हो रहा है। इसकी वजह से कर्मचारी इसे संदेह की नजर से देख रहे हैं।  

27 फरवरी को जारी हुआ आर्डर

कंपनी की तरफ से 27 फरवरी को एक प्रमोशन आर्डर जारी किया गया है। इसमें केवल  OA Gr 2 से OA Gr 1 के  pramotion में ये घोषणा पत्र क्यों मांगा जा रहा है। इसमें अभी कई ऐसे नाम है जो पिछले साल के हुए ऑर्डर से वरिष्ठ है, कर्मचारी एक दूसरे से पूछ रहे हैं ऐसा क्‍यों किया जा रहा है, क्या कोई बता सकता है?

वितरण कंपनी ही मांग रही सहमति पत्र

वितरण कंपनी द्वारा कार्यालय सहायक श्रेणी-दो से कार्यालय  सहायक श्रेणी-,क, कार्यालय सहायक श्रेणी-,एक से अनुभाग अधिकारी और अनुभाग अधिकारी से प्रशासनिक /लेखाधिकारी पद के पद पर पदोन्न्ति प्रदान की गई  है।

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पदोन्नति आदेश में कर्मचारियो से इस आशाय का सहमति पत्र चाहा गया है कि उन्हें कंपनी द्वारा निर्धारित वरिष्ठता मान्य होगी ।

सहमति पत्र को बताया अनुचित

कर्मचारी नेताओं के अनुसार पदोन्नति का आधार वरिष्ठता सूची होती है।  डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा पदोन्नत पद की वरिष्ठता सूची जारी ही नही की गई है। कर्मचारी से बिना उसकी वरिष्ठता बताए, सहमति चाहना जायज नहीं  है।

सशर्त पदोन्‍नति दी जा रही है, ऐसा नहीं होता

आदेश के अवलोकन से पता चलता है कि इस आदेश कण्डीशनली जारी किया गया है  जबकि पदोन्नति आदेश में ,ऐसा होता नही है। पावर कंपनी में पालिसी बनाने का कार्य ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा किया जाता है, ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा अनुभाग अधिकारी से लेखाधिकारी/प्रशासनिक अधिकारी के पद पर जारी पदोन्न्ति आदेश में ऐसी किसी भी सहमति पत्र का उल्लेख नही है।

पहले कभी नहीं लिया गया सहमति पत्र

इससे पहले भी पिछले साल प्रमोशन के समय सहमति पत्र नहीं मांगे गए थे तो इस बार डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा किस लिए सहमति पत्र मांगा जा रहा है, मतलब कहीं न कहीं दाल में काला जरूर है जो कंपनी के पैनल बनाने वाले छिपाना चाहते हैं । पिछले साल के ऑर्डर जैसे अजय बाबर, हरीश चौहान आदि किसी में भी सहमति पत्र नहीं मांगा गया था।

काला पीला का संदेह

कर्मचारी नेताओं के अनुसार  अब कोई भी सहमति पत्र देगा तो उसके बाद कोई भी काला पीला होगा तो वो आपत्ति नहीं उठा सकता क्योंकि उसने सहमति पत्र में हस्ताक्षर कर दिया था ।

पैनल सार्वजनिक क्‍यों नहीं किया जा रहा

उनका कहना है कि यदि कंपनी द्वारा पैनल बना लिया है तो उसको सार्वजनिक करना चाहिए ताकि अगर उसमे कोई गड़बड़ी हो तो कर्मचारी अपनी आपत्ति दर्ज करा सके,ऐसा पहले होता था । अब तो यहां वितरण कंपनी का कहना है कि आप कुछ मत देखो सहमति पत्र दे दो फिर आपको जो पोस्ट दी गई है उसमें जॉइनिंग करे  उसके पहले नहीं ।

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