Chhattisgarhमुख्य पृष्ठ

Jaggi Murder Case  अमित जोगी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें? हाईकोर्ट में दोबारा खुला जग्गी हत्याकांड का केस, जानिए- क्‍या था जग्‍गी हत्‍याकांड

राजनैतिक षड्यंत्र का आरोप

Jaggi Murder Case:  बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिला देने वाले बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में यह मामला रिओपन (Reopen) हो गया है। बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने अंतिम बहस के लिए 1 अप्रैल 2026 की तारीख मुकर्रर की है।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से पलटा मामला

गौरतलब है कि करीब दो साल पहले हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस केस के दोषियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। हालांकि, CBI की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले को वापस हाईकोर्ट भेजा जाए ताकि मेरिट के आधार पर विस्तृत सुनवाई हो सके। इसी आदेश के अनुपालन में अब केस की फाइलें फिर से खुल गई हैं।

रामावतार जग्गी हत्याकांड: घटनाक्रम (Timeline)
4 जून 2003
NCP नेता रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या।
वर्ष 2003-04
मामले की जांच CBI को सौंपी गई, अमित जोगी समेत 31 आरोपी बनाए गए।
31 मई 2007
विशेष अदालत का फैसला: 28 को उम्रकैद, अमित जोगी सबूतों के अभाव में बरी।
वर्ष 2024
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सजायाफ्ता दोषियों की अपील खारिज कर सजा बरकरार रखी।
मार्च 2026
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट में केस ‘Reopen’, अगली सुनवाई 1 अप्रैल को।
*स्रोतः न्यायिक दस्तावेजों और समाचार रिपोर्ट्स के आधार पर

अमित जोगी फिर घेरे में: लेनी होगी जमानत!

इस केस में सबसे बड़ा मोड़ पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी की भूमिका को लेकर है। हालांकि 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन अब केस रिओपन होने से उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

यह भी पढ़ें- छत्‍तीसगढ़ का  पहला राजनीतिक हत्‍याकांड, सीएम के खिलाफ दर्ज हुआ FIR, Ex-CM की गिरफ्तारी

कानूनी जानकारों का मत: चूंकि सीबीआई ने अमित जोगी को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में आरोपी बनाया था, इसलिए केस दोबारा शुरू होने पर उन्हें तकनीकी रूप से बेल फर्निश (जमानत) करानी पड़ सकती है।

सतीश जग्गी का बयान: मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने कहा कि “अमित जोगी अब आधिकारिक तौर पर फिर से अभियुक्त की श्रेणी में हैं। 1 अप्रैल को दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”

अमित जोगी का पक्ष: “सत्य की जीत होगी”

इस कानूनी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने न्यायपालिका पर भरोसा जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “मुझे दो दशक पहले ही बरी किया जा चुका है। मुझे अपनी न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। ईश्वर की कृपा साथ है और अंततः सत्य की ही जीत होगी।”

क्या था 2003 का वह खूनी मंजर?

4 जून 2003 को रायपुर में NCP नेता रामावतार जग्गी की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय प्रदेश में राजनीतिक माहौल बेहद गरमाया हुआ था। जग्गी, कद्दावर नेता विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी और विश्वसनीय माने जाते थे।

पुलिस vs CBI: पुलिस की जांच पर सवाल उठे तो मामला सीबीआई को सौंपा गया।

कुल आरोपी: इस केस में 31 लोग आरोपी थे, जिनमें से 28 को उम्रकैद की सजा हुई। इनमें दो तत्कालीन CSP और एक थाना प्रभारी भी शामिल थे।

राजनैतिक षड्यंत्र का आरोप

सतीश जग्गी के वकील बीपी शर्मा ने कोर्ट में तर्क दिया है कि यह कोई साधारण हत्या नहीं, बल्कि ‘राज्य प्रायोजित’ (State Sponsored) साजिश थी। आरोप है कि तत्कालीन सरकार के प्रभाव में साक्ष्यों को नष्ट किया गया। अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नए सिरे से साक्ष्यों और तर्कों पर विचार कर अमित जोगी की दोषमुक्ति को चुनौती दी जाएगी।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
Back to top button