कर्मचारी हलचल

CG Promotion Reservation: छत्तीसगढ़ पदोन्नति आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, आ गई लिखित कॉपी! जानें कर्मचारियों पर क्या होगा असर

चतुरपोस्ट न्‍यूज डेस्क | रायपुर

CG Promotion Reservation Supreme Court Order: छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी के कर्मचारियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। छत्तीसगढ़ बिजली कंपनी में पदोन्नति आरक्षण (Reservation in Promotion) मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) की सुनवाई के बाद अब न्यायालय की आधिकारिक लिखित आदेश की प्रति (Record of Proceedings) सामने आ गई है।

जस्टिस पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ द्वारा जारी इस लिखित आदेश में राज्य सरकार की उस बड़ी कार्रवाई को हरी झंडी दे दी गई है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था। आइए, बेहद सरल शब्दों में समझते हैं कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस आदेश में क्या कहा है और इसका छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों पर क्या असर होने वाला है।

मामला क्या है? (Understanding the Case)

यह पूरा विवाद छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (C.G. State Electricity Board) के आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी संघ और राज्य सरकार के बीच का है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Bilaspur High Court) ने 16 अप्रैल 2024 को पदोन्नति में आरक्षण के प्रावधानों के खिलाफ एक फैसला सुनाया था। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है (SLP Civil Diary No. 5555/2025)।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में देश के सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. के. एस. चौहान जैसे दिग्गज वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं।

सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश की 4 बड़ी बातें (Key Takeaways)

न्यायालय के आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार, कोर्ट ने इस मामले में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं:

  • देरी की माफ़ी और याचिका स्वीकार (Delay Condoned): सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने में हुई देरी को माफ़ करते हुए इसे नियमित सिविल अपील (Civil Appeal) के रूप में सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है।
  • कमेटी की कार्रवाई रहेगी जारी: छत्तीसगढ़ सरकार ने 10 अप्रैल 2026 को एक आदेश जारी कर पदोन्नति में आरक्षण के लिए मात्रात्मक डेटा’ (Quantifiable Data) जुटाने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि इस अपील के लंबित रहने के दौरान भी कमेटी का काम और डेटा जुटाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
  • पुराने फैसलों का हवाला: राज्य सरकार की यह कमेटी ‘एम. नागराज’ और ‘जरनैल सिंह’ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए संवैधानिक मापदंडों के आधार पर ही एससी/एसटी (SC/ST) कर्मचारियों का डेटा तैयार करेगी।
  • अगली सुनवाई की तारीख तय: इस मामले से जुड़ी अवमानना याचिका (Contempt Petition) पर सुप्रीम कोर्ट अब 5 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई करेगा।

कर्मचारियों पर क्या होगा इसका असर? (Impact Analysis)

इस आदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार के पास आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए आवश्यक आंकड़े (Data Collection) जुटाने का कानूनी रास्ता साफ हो गया है। जब तक सुप्रीम कोर्ट में इस सिविल अपील का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक सरकार बैकएंड पर अपना सर्वे और रिपोर्ट तैयार करने का काम चालू रख सकती है।

बिजली कंपनी समेत छत्तीसगढ़ के अन्य विभागों के संवर्गों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार की यह कमेटी अपनी रिपोर्ट कब तक सौंपती है।

एक्सपर्ट ओपिनियन: कानूनी विशेषज्ञों का क्या है कहना?

कानूनी विशेषज्ञों (Legal Experts) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह रुख अंतरिम राहत जैसा है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आंकड़े जुटाने से नहीं रोका है, जो कि पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए सबसे पहली संवैधानिक जरूरत होती है। हालांकि, अंतिम प्रमोशन इस बात पर निर्भर करेंगे कि कमेटी की रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और 5 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में कोर्ट का रुख क्या रहता है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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