
ABRMS न्यज डेस्क। देशभर में विद्यालय शिक्षा और शिक्षकों से संबंधित विभिन्न समस्याएं काफी समय से लंबित हैं। इसको लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है।
प्रोफेसर नारायण लाल गुप्ता की अध्यक्षता वाले इस संगठन ने देशभर के शिक्षकों की लंबित 12 मांगों के संबंध में केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखा है। यह पत्र महासंघ की महासचिव प्रोफेसर गीता भट्ट के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
देश भर में शिक्षकों और संस्था प्रधानों के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए नियमित नियुक्ति सुनिश्चित की जाए
आज शिक्षकों के लाखों पद देश में रिक्त पड़े हैं। इनके स्थान पर अस्थाई रूप से शिक्षकों की नियुक्ति कर कार्य चलाया जा रहा है जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अतः शिक्षक और संस्था प्रधानों के रिक्त पदों को भरने की सुनिश्चित योजना बनाई जाए और अस्थाई व्यवस्था के स्थान पर नियमित और स्थायी शिक्षकों और संस्था प्रधानों की नियुक्ति की जाए।
शिक्षा में शैक्षिक गुणवत्ता लाने के लिए शिक्षकों को समस्त गैर शिक्षक कार्य से मुक्त रखा जाए और विद्यार्थी हित मे गुणवत्ता युक्त मिड-डे-मील का कार्य किसी स्वतंत्र एजेंसी को दिया जाए
देश में आज शिक्षकों को दर्जनों गैर-शैक्षिक कार्य में लगा रखा है जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जागृत अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में प्रवेश से कतरा रहे हैं क्योंकि शिक्षक के गैर शैक्षिक कार्य में व्यस्त होने के कारण शिक्षण के लिए पूर्ण समय नहीं दे पाता है जिससे सरकारी विद्यालयों में नामांकन घट रहा है। विद्यार्थी कल का भारत है अतः उनके सर्वांगीण विकास के लिए मिड-डे-मील योजना के तहत पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाए और उक्त कार्य को किसी एजेंसी से करा कर शिक्षकों को समस्त गैर शिक्षक कार्य से मुक्त रखना आवश्यक है।
पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए
नई पेंशन योजना के स्थान पर एकीकृत पेंशन योजना लेकर आना सरकार का एक सकारात्मक कदम है। लेकिन, देश के सभी राज्यों के शिक्षकों में आम सहमति यह है कि 2004 के बाद नियुक्त सभी शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए, जिन पर एकीकृत पेंशन योजना लागू होती है, 2004 से पहले की पेंशन योजना को बहाल किया जाए।
देश भर के समस्त राज्यों में केंद्र के समान सभी विसंगतियों को दूर करते हुए सातवें वेतनमान की सिफारिशों को समान रूप से लागू किया जाए
समान कार्य के समान वेतनमान के सिद्धांत का पालन करते हुए संपूर्ण देश में समान सेवा शर्तें और अन्य सुविधाओं में एकरूपता लाई जाए क्योंकि देश के अनेक राज्यों में अलग-अलग नामों से शिक्षकों की अस्थाई रूप से नियुक्ति की जाती है जैसे विद्यार्थी मित्र, शिक्षामित्र, संविदा कर्मी, शिक्षाकर्मी, पैरा टीचर, प्रबोधक, अतिथि शिक्षक सहित अनेक नामों से बहुत कम वेतन पर भर्तियाँ की जाती है और इन्हें पूरा मानदेय नहीं दिया जाता है। इससे शिक्षकों में द्विभागीकरण पैदा हो रहा है। अतः इन शिक्षा देने वालों को अन्याय से बचाने के लिए वेतनमान, सेवा शर्तों, नामकरण आदि में एकरूपता सुनिश्चित की जाए।
उचित चिकित्सा व्यवस्था के लिए शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए :
उपचार पर होने वाले व्यय के तुरंत भुगतान की व्यवस्था नहीं होने से शिक्षकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। शिक्षक के परिवार को मानसिक पीड़ा से भी गुजरना पड़ता है अतः शिक्षकों की अस्वस्थता की स्थिति में चिकित्सा पर हुए संपूर्ण व्यय को कैशलेस पद्धति से करवाने का प्रावधान किया जाए, जिससे अस्वस्थ शिक्षक परिवार को आर्थिक और मानसिक परेशानी नहीं हो।
देश भर में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष की जाए
देश के विभिन्न राज्यों में सेवानिवृति के आयु एक समान नहीं है, जिससे जिन राज्यों में सेवाकाल छोटा है उन राज्यों के शिक्षक कुंठित रहते हैं। अतः देश भर में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष किया जाना शिक्षा और शिक्षकों के हित में रहेगा।
उच्च योग्यता धारी शिक्षकों को अतिरिक्त वेतन वृद्धि दी जाए
उच्च योग्यता धारी को अतिरिक्त वेतन वृद्धि देने से सेवारत शिक्षकों में योग्यता बढ़ाने का भाव जाग्रत होगा जिसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को होगा अतः विद्यालयीन शिक्षा में उच्च योग्यता धारी शिक्षकों को अतिरिक्त वेतन वृद्धि दी जाए।
प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षावार शिक्षक तथा प्रधानाध्यापक और माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालय में विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था की जाए
वर्तमान में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा वार शिक्षक के अभाव में छात्र शिक्षक अनुपात को आधार मानकर सामूहिक शिक्षण हो रहा है जो शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में बाधक है अतः प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रति कक्षा वार शिक्षक और प्रधानाध्यापक तथा माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विषय पर शिक्षक प्रदान किए जायें।
शिक्षकों की समय बद्ध पदोन्नति सुनिश्चित की जाए:
वर्तमान में शिक्षकों की समय पर पदोन्नति नहीं हो रही है अतः इस संबंध में पदोन्नति प्रक्रिया को समय बद्ध करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया जाए जिससे शिक्षकों को समय पर पदोन्नति का लाभ मिल सके।
शिक्षा में व्यापारीकरण रोका जाए
शिक्षा के व्यापारीकरण के दुष्परिणाम अब देश में दिखने लगे हैं। आज निजी शिक्षण संस्थाएँ मोटी फीस वसूलने वाली लाभ कमाने वाली संस्थान बनती जा रही हैं। इनके नियमन और नियन्त्रण की ऐसी व्यवस्था हो जिससे शिक्षा व्यापार का विषय न बने। इसलिए शिक्षा क्षेत्र में निजीकरण की आड़ में बढ़ते व्यापारीकरण को रोकने की नितांत आवश्यकता है।
प्राथमिक शिक्षकों को विधान परिषदों में मत देने का अधिकार प्रदान किया जाए:
विधान परिषद में प्राथमिक शिक्षक को मताधिकार का अधिकार प्रदान नहीं किया गया है जबकि विधान परिषद में रखते शिक्षक प्रतिनिधि के चयन के लिए माध्यमिक शिक्षक को मताधिकार का अधिकार प्राप्त है। अतः समानता के अधिकार को दृष्टिगत रखते हुए प्राथमिक शिक्षकों को भी विधान परिषदों में मत देने का अधिकार प्रदान किया जाए।
स्ववित्त पोषित विद्यालयों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति, वेतन, मानदेय, सेवा शर्तें, सुरक्षा के लिए नियमावली बनाई जाए
स्ववित्त पोषित विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति, वेतन, मानदेय, सेवा शर्तें आदि सरकार से मान्यता प्राप्त होने के बावजूद नियमावली न होने से इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों में असुरक्षा की भावना रहती है। अतः स्ववित्त पोषित विद्यालयों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति, वेतन, मानदेय, सेवा शर्तें, सुरक्षा के लिए नियमावली बनाई जाए।







