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CG छत्‍तीसगढ़ में पदोन्‍न्‍ति नियम में बदलाव: हाईकोर्ट के निर्देश पर किया गया बदलाव, अधिसूचना जारी

CG रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस में आरक्षक, प्रधान आरक्षक और सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) के पदोन्‍नति के नियमों में बदलाव किया गया है। गृह विभाग ने छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक बल आरक्षक (भर्ती तथा सेवा की शर्तें) नियम 2007 में कई महत्वपूर्ण संशोधन कर नए नियम बनाए हैं। खास बात ये है कि यह पहल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पहल पर हो रही है।

डेढ़ साल से रुकी हुई है पदोन्‍नति

गृह विभाग ने आरक्षक से लेकर एएसआई तक के प्रमोशन के नियम में संशोधन किया है। यह बदलाव इसलिए किया गया है, क्योंकि पहले यही पदोन्नति की प्रक्रिया विभागीय एसओपी के आधार पर होती थी। हाईकोर्ट ने करीब डेढ़ साल पहले इस एसओपी को निरस्त करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने नए नियम बनाने का निर्देश दिया था। इस बीच बताया गया है कि करीब डेढ़ साल से इस कैडर की पदोन्नित प्रक्रिया रुकी हुई थी। अब यह नियम के मुताबिक होगी।

अब इस नियम से मिलेगा प्रमोशन

नए नियम के हिसाब से अब आरक्षक से प्रधान आरक्षक और प्रधान आरक्षक से एएसआई के पद पर प्रमोशन के लिए ये प्रक्रिया अपनाई जाएगी। आरक्षक से प्रधान आरक्षक के लिए पदोन्नति प्रक्रिया जिला स्तरीय होगी। संबंधित वर्ष, जिस वर्ष पदोन्नति दी जाना है उस वर्ष की एक जनवरी को आरक्षक के पद पर न्यूनतम 8 वर्ष का सेवाकाल पूर्ण हो। आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण उत्तीर्ण हो। आरक्षक को सेवा-अभिलेख मूल्यांकन में निधर्धारित अंक अर्जित करना अनिवार्य होगा। वरिष्ठता के आधार पर योग्य पाये आरक्षक की सूची एवं मास्टर चार्ट प्रस्तुत करने की संपूर्ण जवाबदारी इकाई प्रमुख की होगी।

प्रधान आरक्षक इस तरह बनेंगे एएसआई

प्रधान आरक्षक से सहायक उप-निरीक्षक पद के लिए पदोन्नति प्रक्रिया रेंज स्तर पर होगी। संबंधित वर्ष, जिस वर्ष पदोन्नति दी जाना है उस वर्ष की एक जनवरी को प्रधान आरक्षक के पद पर न्यूनतम 5 वर्ष का सेवाकाल पूर्ण हो। वरिष्ठता के आधार पर योग्य पाये प्रधान आरक्षक की वरियता सूची और मास्टर चार्ट प्रस्तुत करने की संपूर्ण जवाबदारी इकाई प्रमुख की होगी। प्रधान आरक्षक को सेवा-अभिलेख मूल्यांकन में निधर्धारित अंक अर्जित करना अनिवार्य होगा

ये शर्तें भी होंगी लागू

इस नियम से पदोन्नति पाने वाले पुलिस कर्मियों के लिए ये शर्तें भी रखी गई हैं। विगत 5 वर्षों में कोई बढ़ी सजा नहीं मिली हो। पिछले 5 वर्षों में ईनाम की संख्या छोटी सजाओं से अधिक हो। पिछले पांच वर्षों में प्राप्त वार्षिक टीप के आधार पर सबंधित की पदोन्नति के संबंध में उपयुक्तता या अनुपयुक्त के संबंध में निर्धारण किया जाएगा। सन्निष्ठा पर संदेह न हो।

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