
Chaturpost Desk। रेलवे (Indian Railways) कर्मचारियों और रेल प्रशासन से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाते हुए दो महत्वपूर्ण पदों के कैडर को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
अब रेलवे में ‘यार्ड मास्टर’ (Yard Master) और ‘ट्रैफिक इंस्पेक्टर’ (Traffic Inspector) जैसे पदों का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी किए गए ताजा आधिकारिक आदेश के अनुसार, इन सभी कर्मचारियों को अब एक ही एकीकृत कैडर (Unified Cadre) यानी ‘स्टेशन मास्टर’ (Station Master) के रूप में जाना जाएगा।
रेलवे बोर्ड के इस सख्त आदेश (Order) के बाद अब जोनल रेलवे में पुराने डेजिग्नेशन यानी पदनामों के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। आइए विस्तार से (In-Detail) समझते हैं कि रेलवे बोर्ड को यह फैसला क्यों लेना पड़ा और इससे कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा।
Railway Board Order: क्यों लेना पड़ा यह बड़ा फैसला?
रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (पे कमीशन और एचआरएमएस) जया कुमार जी (Jaya Kumar G, Joint Director) के हस्ताक्षर से जारी पत्र संख्या File No. PC-VII/2026/I/7/5/2 के अनुसार, यह निर्णय कोई नया नहीं है, बल्कि एक पुराने आदेश को सख्ती से लागू करने की कवायद है।
दरअसल, साल 2003 में रेलवे बोर्ड ने एक पत्र जारी किया था, जिसे RBE 177/2003 के नाम से जाना जाता है। इस पुराने आदेश में ही यह तय कर दिया गया था कि स्टेशन मास्टर, असिस्टेंट स्टेशन मास्टर, यार्ड मास्टर और ट्रैफिक इंस्पेक्टर के पदों का आपस में विलय (Cadre Merger) कर दिया जाए।
मुख्य समस्या (The Main Issue): रेलवे बोर्ड ने अपनी समीक्षा में पाया कि साल 2003 में आदेश जारी होने के बावजूद, जमीनी स्तर पर यानी फील्ड (Field Units) में और रेलवे के डिजिटल मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS System) में अभी भी ‘यार्ड मास्टर’ और ‘ट्रैफिक इंस्पेक्टर’ पदों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था।
प्रशासनिक कामकाज में आ रही थी भारी दिक्कतें (Administrative Problems)
रेलवे बोर्ड के आधिकारिक पत्र में इस बात का साफ जिक्र किया गया है कि दो अलग-अलग पदनामों (Designations) के अस्तित्व में रहने के कारण रेल प्रशासन को दैनिक कामकाज और मैनपावर प्लानिंग (Manpower Planning) में गंभीर प्रशासनिक समस्याओं (Administrative Problems) का सामना करना पड़ रहा था।
कैडर के वर्गीकरण (Classification of Cadre) को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इसके अलावा सबसे बड़ी समस्या कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों को लेकर आ रही था।
HRMS सिस्टम में तुरंत होगा बदलाव, पुराने पदनाम बैन
रेलवे बोर्ड ने सभी भारतीय रेलों के प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारियों (Principal Chief Personnel Officer – PCPO) और प्रोडक्शन यूनिट्स को सख्त हिदायत दी है। बोर्ड ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि:
- तत्काल प्रभाव से ‘यार्ड मास्टर’ और ‘ट्रैफिक इंस्पेक्टर’ के पुराने पदनामों के उपयोग को इमीडिएटली स्टॉप (Immediately Stop) किया जाए।
- भविष्य में किसी भी आधिकारिक पत्राचार या रिकॉर्ड में इन पदों का जिक्र नहीं होना चाहिए।
- इन पदों पर कार्यरत सभी कर्मचारियों को अब केवल समान संवर्ग (Unified Cadre) यानी स्टेशन मास्टर के रूप में ही नामांकित किया जाए।
- रेलवे के डिजिटल प्लेटफॉर्म यानी HRMS System में इन कर्मचारियों के प्रोफाइल को तुरंत अपडेट किया जाए ताकि कोई भ्रम (Confusion) न रहे।
इस फैसले का कर्मचारियों पर क्या होगा असर? (Impact on Employees)
रेलवे यूनियनों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से कर्मचारियों की वरिष्ठता (Seniority) और प्रमोशन (Promotion Scopes) में एकरूपता आएगी। पहले अलग-अलग कैडर होने के कारण प्रमोशन के अवसर असमान होते थे, लेकिन अब एक ही कैडर होने से करियर प्रोग्रेशन (Career Progression) अधिक पारदर्शी हो जाएगा।
इस मर्जर के मुख्य बिंदु (Key Highlights of Cadre Merger):
- एक समान पहचान: अब यार्ड और ट्रैफिक विंग के अधिकारी भी स्टेशन मास्टर संवर्ग का हिस्सा होंगे।
- भत्तों का आसान निपटारा: ड्रेस अलाउंस (Dress Allowance) समेत अन्य भत्तों के भुगतान में आ रही तकनीकी दिक्कतें दूर हो जाएंगी।
- विवादों का अंत: कैडर क्लासिफिकेशन को लेकर अदालती और प्रशासनिक विवादों पर विराम लगेगा।
- डिजिटल एकरूपता: HRMS डेटाबेस पूरी तरह क्लीन और त्रुटिहीन (Error-free) हो जाएगा।
E-E-A-T और प्रामाणिकता: रेलवे बोर्ड का मूल विवरण
चतुरपोस्ट डॉट कॉम (chaturpost.com) हमेशा अपने पाठकों तक प्रामाणिक जानकारी पहुंचाता है। इस खबर की सत्यता को जांचने के लिए आप नीचे दिए गए आधिकारिक विवरणों को देख सकते हैं:
| विवरण (Details) | आधिकारिक जानकारी (Official Information) |
| जारीकर्ता प्राधिकरण | रेलवे बोर्ड, रेल मंत्रालय, भारत सरकार |
| आदेश की तारीख | 12 मई 2026 |
| फाइल नंबर | PC-VII/2026/I/7/5/2 |
| संदर्भ (Reference) | RBE 177/2003 (दिनांक 09.10.2003) |
| सक्षम अधिकारी | जया कुमार जी (संयुक्त निदेशक, वेतन आयोग और HRMS) |
| आधिकारिक ईमेल | jaya.kumarg[at]gov.in |
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आदेश सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) के अनुमोदन से जारी किया गया है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी जोनल रेलवे को इस पर तुरंत अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) तैयार करने को कहा गया है।
भारतीय रेलवे के इस बड़े प्रशासनिक सुधार (Administrative Reform) से रेल संचालन में और अधिक गतिशीलता और सुगमता आने की उम्मीद है। रेल कर्मचारियों से जुड़ी ऐसी ही हर छोटी-बड़ी विश्वसनीय खबरों के लिए पढ़ते रहिए Chaturpost.com।







