शासकीय आदेश व अधिसूचना

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: केंद्र सरकार ने लिया ऐतिहासिक फैसला, अब ट्रेनिंग में मिलेगा यह बड़ा सपोर्ट; आदेश जारी

चतुरपोस्ट ब्यूरो, रायपुर। केंद्र सरकार (Central Government) ने सरकारी सेवा में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों (Divyang Employees) के हित में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकारी कामकाज और ट्रेनिंग को अधिक सुगम बनाने के लिए कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत आने वाले DoPT (Department of Personnel & Training) ने एक नया कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) जारी किया है.

इस नए आदेश के तहत अब देश के सभी मूक-बधिर (Hearing Impairment) सरकारी कर्मचारियों को विभागीय ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के दौरान Sign Language Support (सांकेतिक भाषा सहायता) अनिवार्य रूप से प्रदान की जाएगी. सरकार के इस कदम से दिव्यांग कर्मचारियों की कार्यक्षमता में बढ़ोतरी होगी और वे मुख्यधारा के कामकाज में अधिक आत्मविश्वास के साथ भागीदारी कर सकेंगे।

क्या है पूरा मामला और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

दरअसल, केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में काम करने वाले मूक-बधिर कर्मचारियों को ट्रेनिंग के दौरान भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इस गंभीर विषय को उठाते हुए All India Central Government Deaf Employees’ Association (AICGDEA) ने 27 मार्च 2026 को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व (Representation) सौंपा था.

इस संबंध में Chief Commissioner for Persons with Disabilities (CCPD) ने भी 31 जनवरी 2025 को ही एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया था. इसके बाद, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (D/o EPwD) ने 7 अप्रैल 2026 को DoPT को पत्र लिखकर इस मामले में उचित कार्रवाई (Appropriate Action) करने का आग्रह किया था. इसी पृष्ठभूमि (Background) में अब DoPT के ट्रेनिंग विंग ने यह बड़ा आदेश जारी कर दिया है.

DoPT के आदेश में क्या-क्या हैं निर्देश?

DoPT की अवर सचिव (Under Secretary) प्रीति कौर (Preeti Kaur) द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश (F. No. T-19011/1/2026-NTP) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी मंत्रालयों और विभागों को इस नियम का कड़ाई से पालन करना होगा.

नतीजतन (Consequently), इस आदेश के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • उचित आवास और संचार सहायता (Reasonable Accommodation): सभी मंत्रालयों, विभागों, संगठनों और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों से अनुरोध किया गया है कि वे श्रवण बाधित कर्मचारियों के लिए जहां भी आवश्यक हो, साइन लैंग्वेज दुभाषियों (Interpreters) सहित उचित संचार सहायता सुनिश्चित करें.
  • व्यापक प्रचार-प्रसार (Wide Publicity): इस आदेश को केवल फाइलों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। मंत्रालयों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीन आने वाले सभी संलग्न/अधीनस्थ कार्यालयों (Subordinate Offices), स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies) और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में इसका व्यापक प्रचार करें ताकि शत-प्रतिशत अनुपालन (Compliance) सुनिश्चित हो सके.
  • वेबसाइट पर अपलोडिंग: इस महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय को पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए इसे DoPT और ट्रेनिंग डिवीजन की आधिकारिक वेबसाइट पर तुरंत अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं.

Sign Language Support क्यों है गेम-चेंजर?

निश्चित रूप से (Undoubtedly), यह निर्णय भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में समावेशिता (Inclusivity) को बढ़ावा देने वाला है। इसके कई दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे:

  1. कौशल विकास में समानता (Skill Development): जब प्रशिक्षण सत्रों में साइन लैंग्वेज सपोर्ट (Sign Language Support) मिलेगा, तो दिव्यांग कर्मचारी भी नई तकनीकों और नियमों को आसानी से समझ सकेंगे।
  2. मानसिक तनाव से मुक्ति: कार्यस्थल पर संवाद न कर पाने की वजह से जो अलगाव या तनाव पैदा होता था, वह अब काफी हद तक समाप्त हो जाएगा।
  3. करियर ग्रोथ (Career Growth): अक्सर ट्रेनिंग पूरी न होने या ठीक से न समझ पाने के कारण प्रमोशन और अन्य विभागीय परीक्षाओं में दिव्यांग कर्मचारी पिछड़ जाते थे, लेकिन अब स्थिति बदलेगी।

छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों पर भी पड़ेगा सीधा असर

चूँकि यह आदेश देश के सभी राज्य सरकारों (State Governments) को भी अनुपालन के लिए भेजा गया है, इसलिए छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा । राजधानी रायपुर सहित पूरे राज्य के प्रशासनिक ट्रेनिंग सेंटरों (जैसे निमिषोरा या अन्य प्रशिक्षण संस्थान) में अब मूक-बधिर कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए विशेष व्यवस्थाएं करनी होंगी।

इसके अलावा (Furthermore), छत्तीसगढ़ के विभिन्न विभागों के अंतर्गत आने वाले निगम-मंडलों और स्वायत्त संस्थाओं को भी अपने यहाँ इस व्यवस्था को लागू करने के लिए रूपरेखा तैयार करनी होगी। जानकारों का मानना है कि इस संवेदनशील फैसले से राज्य के प्रशासनिक ढांचे में दिव्यांगों की भागीदारी और मजबूत होगी।

चतुर विचार (Conclusion)

संक्षेप में कहें (To summarize), केंद्र सरकार का यह कदम सबका साथ, सबका विकास” और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है। आधिकारिक तौर पर सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) की मंजूरी के बाद जारी यह आदेश यह साबित करता है कि सरकार अपने अंतिम छोर पर बैठे कर्मचारी की समस्याओं के प्रति भी पूरी तरह गंभीर है । अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर सभी विभाग इस Sign Language Support के आदेश को कितनी तेजी से लागू करते हैं, ताकि इसके वास्तविक लाभ कर्मचारियों तक पहुंच सकें।

Sign Language Support
DoPT का Office Memorandum

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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