
रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था (Administrative System) में इस समय बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसकी गूंज पूरे देश के प्रशासनिक गलियारों में है। राज्य सरकार की तरफ से घोषित ‘महतारी गौरव वर्ष’ (Mahtari Gaurav Varsh) केवल सरकारी विज्ञापनों और योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सूबे की ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) का नया और सबसे सशक्त चेहरा बन चुका है। आज की प्रशासनिक हकीकत यह है कि छत्तीसगढ़ के नीति-निर्धारण (Policy Making) से लेकर नक्सल प्रभावित और सुदूर अंचलों की कमान Chhattisgarh Women IAS अधिकारियों के मजबूत हाथों में सुरक्षित है।
हाल ही में राज्य शासन द्वारा किए गए प्रशासनिक फेरबदल के बाद राज्य के कुल 33 जिलों में से लगभग एक-तिहाई यानी 10 महत्वपूर्ण जिलों की कमान अब महिला कलेक्टर्स के हाथ में है। इसके साथ ही मंत्रालय में भी सबसे संवेदनशील और भारी-भरकम विभागों की जिम्मेदारी महिला विंग को दी गई है। यह कोई आम प्रशासनिक फेरबदल (Administrative Reshuffle) नहीं है, बल्कि यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि सूबे की बेटियों की निर्णय क्षमता (Decision Making Power) और कड़े अनुशासन पर सरकार को कितना अटूट भरोसा है।
महानदी भवन से मैदान तक… ‘महतारी‘ शक्ति का महा-दबदबा
जब बात छत्तीसगढ़ के सत्ता केंद्र यानी मंत्रालय (Mahanadi Bhawan Raipur) की आती है, तो वहां भी सबसे भारी-भरकम, जटिल और संवेदनशील विभागों (Key Departments) के कमरों की नेमप्लेट पर महिला अफसरों का नाम चमक रहा है। ब्यूरोक्रेसी के इस नए दौर में महिलाएं सिर्फ फाइलों को आगे बढ़ाने का काम नहीं कर रही हैं, बल्कि ‘ड्राइविंग सीट’ पर बैठकर राज्य की विकास नीति तय कर रही हैं।
चाहे वह कानून व्यवस्था से जुड़ा सबसे संवेदनशील गृह विभाग हो, शहरों का कायाकल्प करने वाली शहर सरकार हो या फिर ग्रामीण भारत की तकदीर बदलने वाला पंचायत विभाग, हर जगह इन महिला अफसरों की प्रशासनिक कुशलता (Administrative Efficiency) का लोहा माना जा रहा है। फील्ड पोस्टिंग (Field Posting) में इन महिला कलेक्टर्स की कड़क कार्यशैली से अब लापरवाह अधिकारियों और माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
ये हैं छत्तीसगढ़ के वो 10 जिले, जहाँ महिला कलेक्टर्स चला रही हैं ‘सरकार‘
छत्तीसगढ़ सरकार की आधिकारिक और संशोधित सूची के अनुसार, राज्य के 10 महत्वपूर्ण जिलों में महिला आईएएस अधिकारी बतौर कलेक्टर तैनात हैं। ये अधिकारी न सिर्फ कलेक्टरी कर रही हैं, बल्कि जनता की समस्याओं को बेहद संवेदनशीलता (Sensitivity) से हल भी कर रही हैं:
बड़ी कुर्सियों पर कड़क मिजाज: मंत्रालयों में भी फीमेल अफसरों का ‘सिग्नेचर‘
सचिवालय (Secretariat) के बंद कमरों में जब बड़ी फाइलें खुलती हैं, तो वहां भी देश की सबसे सीनियर और धाकड़ महिला आईएएस अधिकारियों के हस्ताक्षर चलते हैं। चाहे गृह विभाग (Home Department) जैसा सबसे कठिन महकमा हो या शहरों को स्मार्ट बनाने का जिम्मा, छत्तीसगढ़ की महिलाएं हर जगह अपनी प्रशासनिक कार्यकुशलता साबित कर रही हैं।
- निहारिका बारीक (IAS Niharika Barik): 1997 बैच की यह सीनियर आईएएस अधिकारी इस समय गृह एवं जेल विभाग की कमान संभाल रही हैं। आंतरिक सुरक्षा से लेकर पुलिसिंग तक, इनकी सूझबूझ का हर कोई लोहा मानता है।
- ऋचा शर्मा (IAS Richa Sharma) और संगीता आर (IAS Sangeeta R): एक तरफ ऋचा शर्मा जहां पंचायत एवं ग्रामीण विकास के जरिए छत्तीसगढ़ के गांवों की तकदीर बदल रही हैं, वहीं संगीता आर सूबे के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (शहर सरकार) को नई गति देने में जुटी हैं।
- शम्मी आबिदी और शाहला निगार: राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग (Revenue) और महिला एवं बाल विकास (WCD) जैसे सीधे जनता से जुड़े मंत्रालयों को आगे बढ़ाने में इन दोनों महिला सचिवों की रणनीतियां काफी सटीक और असरदार साबित हो रही हैं।
- रीना बाबा साहेब कंगाले (IAS Reena Kangale): इन्हें वाणिज्यिक कर (आबकारी) और खाद्य विभाग जैसे दो बेहद महत्वपूर्ण राजस्व और उपभोक्ता हित से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- शम्मी आबिदी (IAS Shammi Abidi) सचिव, राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग एवं पदेन राहत एवं पुनर्वास आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार, आयुक्त, भू-अभिलेख
- शाहला निगार: (IAS Shahla Nigar) प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अतिरिक्त प्रभार समाज कल्याण विभाग
भविष्य गढ़ने वाली परीक्षा एजेंसियों में भी महिलाओं का ‘एकाधिकार‘
इस पूरे प्रशासनिक परिदृश्य (Administrative Landscape) का सबसे दिलचस्प और भरोसेमंद पहलू यह है कि राज्य के लाखों युवाओं और छात्रों के करियर से जुड़ी जो सबसे बड़ी और जिम्मेदार संस्थाएं (Exam Conducting Bodies) हैं, उनकी चाबी भी इस समय राज्य की सबसे भरोसेमंद महिला अफसरों के पास है। यह दिखाता है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता (Transparency) और जीरो करप्शन के मोर्चे पर सरकार का इनपर कितना अटूट विश्वास है।
- सीजीपीएससी (CGPSC): राज्य की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की कमान रीता शांडिल्य (IAS Reeta Shandilya) के हाथों में सौंपी गई है।
- व्यापम और माध्यमिक शिक्षा मंडल (Vyapam & CGBSE): प्रदेश के लाखों छात्रों और युवाओं के भविष्य का रोडमैप तैयार करने वाले छत्तीसगढ़ व्यापम और बोर्ड परीक्षाओं की बागडोर सीनियर अफसर रेणु पिल्ले (IAS Renu Pillay) संभाल रही हैं।
एक नया ‘छत्तीसगढ़ मॉडल‘: क्यों खास है यह प्रशासनिक बदलाव?
गवर्नेंस के एक्सपर्ट्स (Governance Experts) का कहना है कि जब किसी राज्य में इतनी बड़ी संख्या में महिला कलेक्टर्स और सचिव नियुक्त होती हैं, तो सरकारी योजनाओं (Government Schemes) के क्रियान्वयन में संवेदनशीलता और पारदर्शिता अपने आप बढ़ जाती है।
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महिलाएं जमीनी हकीकत और बुनियादी समस्याओं को बेहतर ढंग से समझती हैं। खासकर बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी अंचलों (Tribal Regions) में, जहां महिलाओं का स्वास्थ्य, बच्चों का कुपोषण दूर करना और शिक्षा का स्तर सुधारना सबसे बड़ी चुनौती है, वहां ये महिला कलेक्टर्स बेहद शानदार काम कर रही हैं। ‘महतारी गौरव वर्ष’ का यह प्रशासनिक रंग आज पूरे देश के लिए एक नजीर बन चुका है कि कैसे आधी आबादी को पूरी ताकत देकर एक नया, सशक्त और समृद्ध छत्तीसगढ़ (Sashakt Chhattisgarh) बनाया जा सकता है।







