Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ सरकार पर बढ़ा कर्ज? सीधे 22 साल के लिए ले रही है लोन; जानिए क्या हैं इसके मायने और जनता पर असर

रायपुर। न्‍यूज डेस्‍क। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार प्रदेश में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स और विकास योजनाओं (Development Schemes) को रफ्तार देने के लिए बाजार से ₹1000 करोड़ का एक बड़ा कर्ज (Loan) उठाने जा रही है। छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग (Department of Finance) ने इसके लिए बकायदा छत्तीसगढ़ राजपत्र (Chhattisgarh Gazette) में दो अलग-अलग विशिष्ट अधिसूचनाएं (Specific Notifications) जारी कर दी हैं।

इस खबर का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि सरकार इस लोन का एक बड़ा हिस्सा सीधे 22 साल (22-Year Tenure) की लंबी अवधि के लिए ले रही है। यह पूरी वित्तीय प्रक्रिया रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के माध्यम से राज्य सरकार की प्रतिभूतियों (State Government Securities – SGS) के पुनर्निवेश (Re-issuance) के जरिए पूरी की जा रही है। वित्त सचिव रोहित यादव के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश के लिए भारत के संविधान के नियमों के तहत केंद्र सरकार की एडवांस मंजूरी भी ले ली गई है।

₹1000 करोड़ के वित्तीय प्रबंधन (Financial Management) का पूरा गणित

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लिया जा रहा यह मार्केट लोन (Market Borrowings) दो अलग-अलग हिस्सों में ₹500-₹500 करोड़ की किश्तों में विभाजित है। दोनों सरकारी स्टॉक (Government Stock) की मैच्योरिटी अवधि और ब्याज दरों में बड़ा अंतर है:

1. चौंकाने वाला 22 वर्षीय लोन: ₹500 करोड़

  • अधिसूचना संख्या: No./23/R-14-04-2021/B-4/4
  • उच्च ब्याज दर (High Interest Rate): 7.82% वार्षिक
  • परिपक्वता (Tenure): यह सरकारी बॉन्ड सीधे 22 साल की लंबी अवधि के लिए है।
  • कर्ज वापसी (Repayment Year): इस दीर्घकालिक कर्ज का अंतिम भुगतान 29 अप्रैल 2048 को किया जाएगा।
  • ब्याज शेड्यूल: इसका ब्याज हर साल छमाही आधार पर 29 अक्टूबर और 29 अप्रैल को सीधे निवेशकों के खाते में जाएगा।

2. 10 वर्षीय मध्यम अवधि लोन: ₹500 करोड़

  • अधिसूचना संख्या: No./24/R-14-04-2021/B-4/4
  • ब्याज दर (Coupon Rate): 7.68% वार्षिक
  • अवधि (Tenure): यह स्टॉक 10 वर्ष की अवधि के लिए जारी हुआ है।
  • वापसी की तारीख: इस राशि का निपटान 29 अप्रैल 2036 को किया जाएगा।

रिजर्व बैंक (RBI) के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म पर हुई डिजिटल नीलामी

इस सरकारी स्टॉक (Government Stock) को बेचने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुंबई कार्यालय (PDO) ने मल्टीपल प्राइस फॉर्मेट के तहत बोलियां आमंत्रित की थीं। यह पूरी नीलामी ऑनलाइन माध्यम से संचालित की गई।

ई-कुबेर सिस्टम और टाइम स्लॉट (E-Kuber Bidding)

सभी वित्तीय संस्थाओं, कमर्शियल बैंकों और म्यूचुअल फंड कंपनियों ने आरबीआई के कोर बैंकिंग सॉल्यूशन ई-कुबेर (E-Kuber System) पर इलेक्ट्रॉनिक मोड में अपनी बोलियां लगाईं:

  • प्रतिस्पर्धी बोलियां (Competitive Bids): सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे के बीच स्वीकार की गईं।
  • गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियां (Non-Competitive Bids): सुबह 10:30 बजे से 11:00 बजे के बीच दर्ज की गईं।

आरबीआई द्वारा नीलामी के परिणाम (Auction Result) उसी दिन शाम को जारी कर दिए जाते हैं। सफल बोलीदाताओं (Successful Bidders) को अगले ही दिन बैंकिंग समय समाप्त होने से पहले कैश, बैंकर चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए भुगतान करना होता है।

बैंकों और म्यूचुअल फंड्स के लिए क्यों बेस्ट इन्वेस्टमेंट है यह बॉन्ड?

उच्च सीपीसी (High CPC Keywords) वाले इस वित्तीय सेगमेंट में निवेश करने के लिए देश के बड़े बैंकिंग सेक्टर्स और संस्थागत निवेशक सबसे ज्यादा उत्सुक रहते हैं। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:

  • Statutory Liquidity Ratio (SLR) स्टेटस: बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 24 के तहत बैंकों के लिए इस छत्तीसगढ़ सरकारी स्टॉक में निवेश करना एसएलआर (SLR) को मेंटेन करने के लिए पूरी तरह वैध माना जाता है।
  • Ready Forward Facility (रीपो सुविधा): ये सभी सिक्योरिटीज ‘रेडी फॉरवर्ड फैसिलिटी’ के लिए पात्र हैं, यानी जरूरत पड़ने पर बैंक इन बॉन्ड्स को गिरवी रखकर आरबीआई से तुरंत ओवरनाइट लोन (Liquidity) ले सकते हैं।
  • स्मॉल इन्वेस्टर्स के लिए मौका (Retail Investors): कुल लोन अमाउंट का 10% हिस्सा छोटे और व्यक्तिगत निवेशकों के लिए सुरक्षित रखा गया है, ताकि आम जनता भी इस सरकारी गारंटी वाले फिक्स्ड रिटर्न (Fixed Income) का लाभ उठा सके।

बुनियादी ढांचे (Infrastructure Development) और बजट संतुलन पर क्या होगा असर?

वित्तीय विश्लेषकों (Financial Advisors) का कहना है कि 22 साल का लंबा कर्ज लेना इस बात का संकेत है कि सरकार राज्य में कुछ बहुत बड़ी और दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Long-term Infrastructure Projects) जैसे एक्सप्रेस-वे, बड़े पावर प्लांट या सिंचाई बांधों के निर्माण की योजना बना रही है।

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चूंकि छत्तीसगढ़ एक तेजी से बढ़ता हुआ राज्य है, इसलिए विकास कार्यों (Welfare Schemes) को बिना रोके जारी रखने के लिए इस तरह के मार्केट लोन एक सामान्य प्रक्रिया हैं। इससे राज्य के बजट पर तात्कालिक दबाव नहीं पड़ता और लंबे समय में निवेश की गई राशि से राज्य के राजस्व (State Revenue) में वृद्धि होती है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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