
नई दिल्ली (chaturpost.com): भारतीय रेलवे (Indian Railways) में मुकदमों और कानूनी मामलों की पैरवी करने वाले वकीलों के लिए बड़ी खुशखबरी (Breaking News) सामने आई है। रेल मंत्रालय (Ministry of Railways) के अधीन रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने विभिन्न श्रेणियों के केंद्रीय सरकारी वकीलों (Central Government Counsel) और रेलवे पैनल वकीलों (Railway Panel Counsel) को मिलने वाली फीस में एक बड़ा और ऐतिहासिक संशोधन (Revision of Fee) किया है । इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद अब सरकारी वकीलों को मिलने वाले मानदेय में बंपर इजाफा हो गया है ।
रेलवे बोर्ड के विधि सलाहकार (Legal Adviser) एम. सी. प्रुस्टी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पत्र (Official Letter No. 2026/LC/17/01) के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) ने इस फीस संशोधन प्रस्ताव को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है । यह नया नियम न केवल रेलवे के पैनल वकीलों पर लागू होगा, बल्कि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) और रेलवे दावा अधिकरण (RCT) में पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं पर भी समान रूप से प्रभावी होगा ।
कानून मंत्रालय के आदेश को रेलवे ने पूरी तरह अपनाया (Adoption of Law Ministry OM)
इस नए आदेश के तहत रेलवे बोर्ड ने कानून एवं न्याय मंत्रालय (Ministry of Law and Justice) के न्याय विभाग द्वारा बीते 5 फरवरी 2026 को जारी किए गए कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) संख्या J-12011/6/2025-Judicial/E. 158060 को पूरी तरह (In Toto) स्वीकार कर लिया है । इसका सीधा मतलब यह है कि जो फीस संरचना केंद्रीय मंत्रालयों के वकीलों के लिए तय की गई थी, अब वही बढ़ी हुई फीस रेलवे के मामलों को देखने वाले वकीलों को भी मिलेगी ।
CAT और RCT वकीलों के लिए बदली व्यवस्था (New Rules for Tribunals)
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (Central Administrative Tribunal – CAT) और रेलवे दावा अधिकरण (Railway Claims Tribunal – RCT) के वकीलों के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं:
- CAT पैनल में अब सिर्फ दो श्रेणियां: रेलवे बोर्ड के नए नियमों के मुताबिक, कैट (CAT) के लिए रेलवे पैनल में अब केवल दो ही श्रेणियां होंगी । इनमें पहली श्रेणी ‘विशेष वकील’ (Special Counsels) की होगी जिसमें Dy. SG, Sr. CGSC, CGSC और SPC शामिल होंगे । दूसरी श्रेणी ‘पैनल वकील’ (Panel Counsels) की होगी जिसमें CGC, Addl. CGSC और GP शामिल होंगे ।
- रिटेनरशिप फीस का नियम: स्टैंडिंग काउंसिल (Standing Counsel) के रूप में काम करने वाले वकीलों को ‘पैनल काउंसिल’ की श्रेणी में रखा जाएगा और वे रिटेनरशिप फीस (Retainership Fee) के हकदार होंगे । हालांकि, RCT (रेलवे दावा अधिकरण) के पैनल वकीलों को कोई रिटेनरशिप फीस नहीं दी जाएगी ।
- कैट कोलकाता के लिए विशेष व्यवस्था: कोलकाता कैट बेंच (CAT Kolkata Bench) के मौजूदा पैनल के लिए तब तक टेबल-सी (Table-C) की दरें लागू रहेंगी, जब तक कि रेलवे बोर्ड की नीति के अनुसार नया पैनल गठित नहीं हो जाता ।
अदालतों के हिसाब से समझें फीस का पूरा गणित (Revised Fee Structure)
वकीलों के काम और अदालतों के स्तर के हिसाब से फीस को अलग-अलग श्रेणियों (Tables) में विभाजित किया गया है। आइए जानते हैं कि मुख्य अदालतों में पैरवी के लिए अब कितनी फीस मिलेगी:
1. सुप्रीम कोर्ट के वकील (Supreme Court Panel Counsel – Table A)
सुप्रीम कोर्ट में ग्रुप ‘A’, ‘B’ और ‘C’ के पैनल वकीलों के लिए नई दरें इस प्रकार तय की गई हैं:
- नियमित अपील और रिट याचिका (Final Hearing): ग्रुप ‘A’ काउंसिल को ₹21,600 प्रति केस प्रति दिन और ग्रुप ‘B’ व ‘C’ काउंसिल को ₹14,400 प्रति केस प्रति दिन मिलेंगे ।
- एडमिशन मामले (SLP/Writ Petition/Misc): ग्रुप ‘A’ के लिए ₹14,400 और ग्रुप ‘B’ व ‘C’ के लिए ₹7,200 प्रति दिन तय किए गए हैं ।
- प्लीडिंग सेटल करना (Settling of Pleadings): इसके लिए ₹8,400 प्रति केस देय होगा ।
- ड्राफ्टिंग (SLP/Counter Affidavit): इसके लिए ₹4,800 प्रति केस की राशि मिलेगी ।
- कॉन्फ्रेंस फीस (Conference Fee): प्रति कॉन्फ्रेंस ₹1,440 मिलेंगे ।
2. हाई कोर्ट और ट्रिब्यूनल (High Courts & Tribunals – Table B)
मुंबई और कलकत्ता हाई कोर्ट की प्रिंसिपल बेंच को छोड़कर देश के अन्य सभी उच्च न्यायालयों के लिए दरें इस प्रकार हैं:
- इफेक्टिव हियरिंग (Effective Hearing): सीनियर कैटेगरी (Dy.SG, Sr. CGSC) के वकीलों को ₹14,400 प्रति दिन और जूनियर कैटेगरी (CGC) के वकीलों को ₹3,600 प्रति दिन मिलेंगे ।
- नॉन-इफेक्टिव हियरिंग (Non-Effective Hearing): इसके लिए सीनियर को ₹2,400 और जूनियर को ₹720 मिलेंगे (एक केस में अधिकतम 5 बार) ।
- कॉन्फ्रेंस फीस: सीनियर वकीलों को ₹1,440 और जूनियर वकीलों को ₹720 प्रति कॉन्फ्रेंस मिलेंगे 。
3. जिला एवं अधीनस्थ अदालतें (District & Sub-ordinate Courts – Table D)
देशभर की जिला अदालतों में रेलवे के मुकदमों को देखने वाले सरकारी वकीलों को कोई रिटेनरशिप फीस नहीं मिलेगी, लेकिन काम के बदले अच्छा मानदेय मिलेगा:
- इफेक्टिव हियरिंग (Effective Hearing): ₹2,880 प्रति केस प्रति दिन ।
- नॉन-इफेक्टिव हियरिंग: ₹960 प्रति दिन (अधिकतम 5 हियरिंग) ।
- लिखित बयान/अपील ड्राफ्टिंग (Drafting WS): ₹2,400 प्रति प्लीडिंग ।
- कॉन्फ्रेंस फीस: ₹1,440 प्रति कॉन्फ्रेंस (अधिकतम 5 कॉन्फ्रेंस) ।
यात्रा और होटल खर्च के लिए भी शानदार भत्ते (Travel & Hotel Expenses)
मुकदमों के सिलसिले में जब वकीलों को अपने मुख्यालय से बाहर (Out of Headquarters) जाना पड़ेगा, तो उन्हें केंद्र सरकार के सातवें वेतन आयोग (7th CPC) के नियमों के अनुसार यात्रा और ठहरने का खर्च दिया जाएगा:
क्लर्क की फीस (Clerkage) का नया नियम
रेलवे और कानून मंत्रालय के नए आदेशों में क्लर्क की फीस यानी क्लर्कगेज (Clerkage) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। जिला अदालतों (District Courts) और आर्बिट्रेशन मामलों (Arbitration Cases) में वकीलों को कुल फीस का 10% क्लर्कगेज के रूप में अलग से मिलेगा । हालांकि, आर्बिट्रेशन मामलों में यह क्लर्कगेज अधिकतम ₹2,880 प्रति केस तक ही सीमित रहेगा । वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के लिए क्लर्कगेज की राशि शून्य (NIL) रखी गई है ।
वित्त निदेशालय की सहमति से जारी हुआ आदेश (Approval from Finance Directorate)
यह आदेश पूरी तरह से आधिकारिक और प्रामाणिक है क्योंकि इसे रेल मंत्रालय के वित्त निदेशालय (Finance Directorate) की आवश्यक सहमति (Concurrence) मिलने के बाद ही जारी किया गया है । इस पत्र की प्रतियां देश के सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों (General Managers), सभी प्रोडक्शन यूनिट्स (PUs), मुख्य महाप्रबंधकों (कानून), वित्त सलाहकारों (FA&CAO) और भारत के उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Deputy CAG Railways) को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं ।
निश्चित रूप से, लंबे समय से अटकी इस फीस बढ़ोतरी (Legal Fee Revision) से रेलवे और सरकार का पक्ष अदालतों में मजबूती से रखने वाले अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक मुस्तैदी के साथ रेलवे के कानूनी हितों की रक्षा कर सकेंगे।
Disclaimer: This news report is based on the official notification issued by the Railway Board and Ministry of Law & Justice, Government of India.
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