कर्मचारी हलचल

Chhattisgarh नगरीय निकाय कर्मचारियों की समस्याओं पर सरकार का बड़ा एक्शन, 7 दिनों में बैठक बुलाने का सख्त आदेश!

नवा रायपुर न्‍यूज डेस्‍क। छत्तीसगढ़ के नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में कार्यरत Chhattisgarh Government Employees और अधिकारियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है । राज्य के नगरीय प्रशासन विभाग ने निकायों में कार्यरत अमले की लंबे समय से लंबित और ज्वलंत समस्याओं के निराकरण (Grievance Redressal) की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है । विभाग ने प्रदेश के सभी नगर पालिक निगमों के आयुक्तों और सभी नगर पालिका/नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को एक आधिकारिक पत्र जारी किया है ।

इस जारी आदेश के तहत विभाग ने निर्देशित किया है कि कर्मचारियों की स्थानीय और बिंदुवार समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से परामर्शदात्री समिति की बैठक (Consultative Committee Meeting) आयोजित की जाए । यह आदेश समय-सीमा (T.L.) के प्रकरणों की सूची में दर्ज किया गया है, जिसके कारण इस पर तुरंत अमल करना अनिवार्य होगा ।

📄 विभाग ने क्यों जारी किया यह सख्त निर्देश?

दरअसल, छत्तीसगढ़ कर्मचारी कांग्रेस महासंघ (Chhattisgarh Employee Congress Federation) के प्रांतीय संगठन सचिव श्रवण कुमार ठाकुर और प्रवक्ता व महासचिव संजय शर्मा ने 01 जून 2026 को पत्र क्रमांक 10 के माध्यम से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव महोदया को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा था । इस मांग पत्र में प्रदेश के लगभग 192 नगरीय निकायों के कर्मचारियों की उन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया था, जो उनके दैनिक जीवन और भविष्य को प्रभावित कर रही हैं ।

कर्मचारी संगठन के इसी पत्र का संज्ञान लेते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के उपसचिव श्री भागवत जायसवाल के हस्ताक्षर से 04 जून 2026 को यह आदेश जारी किया गया है । इस आदेश की प्रतिलिपि संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा डाटा सेंटर के प्रोग्रामर को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गई है ।

📋 कर्मचारी महासंघ की वे 18 प्रमुख मांगें, जिन्होंने सरकार को सोचने पर किया मजबूर

छत्तीसगढ़ कर्मचारी कांग्रेस महासंघ द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में कर्मचारियों और पेंशनर्स के हितों से जुड़े कुल 18 बिंदु शामिल हैं । आइए जानते हैं कि इस मांग पत्र में कौन-कौन सी ज्वलंत समस्याएं (Burning Issues) और मांगें उठाई गई हैं:

  • 1. परामर्शदात्री समिति की नियमित बैठक: कर्मचारी समस्याओं पर चर्चा के लिए प्रत्येक 3 महीने में एक बार प्रशासन और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच निकाय स्तर पर बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए ।
  • 2. स्टाइपेंड वेतन की कटौती राशि की वापसी: पूर्ववर्ती सरकार द्वारा अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में 70%, 80% और 90% वेतन देने के नियम के तहत जो कटौती की गई थी, वह रोकी तो जा चुकी है लेकिन काटी गई राशि आज तक वापस नहीं मिली है, जिसे तत्काल वापस किया जाए ।

Also Read नेशनल पेंशन सिस्टम में बड़ा बदलाव! PFRDA ने लॉन्च किया नया ‘StAR NPS’ प्लेटफॉर्म, अब चुटकियों में खुलेगा खाता

  • 3. स्थानांतरित कर्मचारियों की मूल विभाग में वापसी: अलग-अलग निकायों में स्थानांतरित किए गए कुशल अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस लौटाया जाए ताकि उन्हें दोहरे घर-परिवार का खर्च उठाने की मुश्किल से मुक्ति मिल सके ।
  • 4. पेंशनरों को अंतरिम महंगाई राहत (DR): राज्य शासन के कर्मचारियों को 60% महंगाई भत्ता (DA) मिल रहा है, जबकि नगरीय निकाय के पेंशनरों को केवल 53% महंगाई राहत मिल रही है । इसे बढ़ाकर 60% तक किया जाए ।
  • 5. प्रतिमाह 01 तारीख को नियमित वेतन: निकायों की प्रतिदिन की आय को शासन अपने अधिकार क्षेत्र में ले और कर्मचारियों को हर महीने की 1 तारीख को नियमित वेतन भुगतान (Regular Salary) सुनिश्चित करे ।
  • 6. पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ: वर्ष 2004 के बाद सेवा में नियमित हुए सभी नगरीय निकाय कर्मचारियों और अधिकारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने के लिए आदेश प्रसारित किया जाए ।

Also Read पड़ोसी राज्यों में संविदा कर्मियों की चमकी किस्मत, छत्तीसगढ़ में गूंजा सवाल- ‘मोदी की गारंटी’ का 100 दिन का वादा कब होगा पूरा?

  • 7. छठवें और सातवें वेतनमान के एरियर्स का भुगतान: छठवें वेतनमान का 64 माह 19 दिन का बकाया और सातवें वेतनमान का 27 माह का बकाया एरियर्स (Salary Arrears) एकमुश्त या 10-15 किश्तों में देने का आदेश जारी हो ।
  • 8. कैशलेस चिकित्सा सुविधा: राज्य शासन के अन्य कर्मचारियों के समान नगरीय निकाय के बीमार पड़ने वाले अमले को भी पूर्णतः कैशलेस चिकित्सा सुविधा (Cashless Healthcare) प्रदान की जाए ।
  • 9. सैलरी पैकेज कर्मचारी बीमा: छत्तीसगढ़ राज्य फेडरेशन के मांग पत्र के आधार पर जो सैलरी पैकेज कर्मचारी बीमा लागू होने जा रहा है, उसे नगरीय निकायों में भी लागू किया जाए ।
  • 10. नवीन सेटअप को अविलंब स्वीकृति: निकायों में नया सेटअप स्वीकृत न होने के कारण कर्मचारी पिछले 30-35 वर्षों से एक ही पद पर काम कर रहे हैं । नया सेटअप मंजूर कर पदोन्नति (Promotion) का मार्ग प्रशस्त किया जाए ।
  • 11. समयमान वेतनमान में संशोधन: पूर्व में स्वीकृत 10, 20 और 30 वर्ष की सेवा के स्थान पर वर्तमान समय में 08, 16, 24 और 32 वर्ष की सेवा के आधार पर संशोधित समयमान वेतनमान आदेश जारी हो ।
  • 12. LSGD डिप्लोमा धारकों को वेतन वृद्धि: लोकल सेल्फ गवर्नमेंट डिप्लोमा (LSGD) प्रशिक्षण उत्तीर्ण करने वाले कर्मचारियों को नियमानुसार दो वेतन वृद्धि का लाभ दिलाया जाए ।

Also Read छत्तीसगढ़ में बुजुर्गों का बड़ा अपमान? मुख्य सचिव से मिलने तरस रहे Chhattisgarh Pensioners, महीनों बाद भी नहीं मिला समय!

  • 13. पेंशनरों के दायित्वों का 90 दिनों में भुगतान: सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को उनके भविष्य निधि (NPS/OPS) और अर्जित अवकाश के नगदीकरण की राशि प्राप्त करने में वर्षों लग जाते हैं, जिसे अधिकतम 90 दिनों के भीतर भुगतान कराया जाए ।
  • 14. अनुकंपा नियुक्ति के लिए विशेष पदों की स्वीकृति: निकायों में पद रिक्त न होने के कारण अनुकंपा नियुक्तियां रुकी हुई हैं । इसके समाधान के लिए प्रत्येक नगर पंचायत में 06 पद, नगर पालिका परिषद में 15 पद और नगर निगमों में 30-30 विशेष पद अनुकंपा नियुक्ति के लिए स्वीकृत किए जाएं ।
  • 15. ट्रेजरी पेमेंट (Treasury Payment) की व्यवस्था: राज्य शासन के कर्मचारियों की तरह ही नगरीय निकाय के कर्मचारियों को भी शासन अपनी ट्रेजरी के माध्यम से वेतन का भुगतान सुनिश्चित करे ।

Also Read 8th Pay Commission के बीच पुरानी पेंशन पर बड़ा खुलासा, खुद कर्मचारी संगठनों ने मानी ये कड़वी हकीकत

  • 16. वर्ष 1997 के बाद नियुक्त कर्मचारियों का नियमितीकरण: वर्तमान में केवल 1997 के पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों को ही नियमित किया गया है, इसी तर्ज पर 1997 के बाद से कार्यरत कर्मचारियों का भी नियमितीकरण (Regularization) किया जाए ।
  • 17. सेवाकाल की गणना में दैनिक वेतन अवधि को शामिल करना: किसी भी कर्मचारी के पूरे सेवाकाल की गणना करते समय उनके नियमितीकरण की अवधि के साथ-साथ उनके पूर्व के दैनिक वेतनभोगी कार्यकाल को भी जोड़ा जाए ।
  • 18. 14 प्रतिशत सरकारी कंट्रीब्यूशन जमा करना: भविष्य निधि खाते में कर्मचारी की 10 प्रतिशत कटौती के साथ शासन की ओर से देय 14 प्रतिशत अंशदान (Contribution) की राशि को नियमानुसार समय पर समायोजित कर जमा किया जाए ।

📝 एक्सपर्ट व्यू और निष्कर्ष

chaturpost.com एनालिसिस डेस्क: छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों के सुचारू संचालन में वहां के अधिकारी और कर्मचारी रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करते हैं। लंबे समय से एरियर्स, समय पर वेतन न मिलने और पुरानी पेंशन जैसी बुनियादी मांगों को लेकर जमीनी स्तर पर असंतोष देखा जा रहा था । नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा समय-सीमा (T.L.) के तहत एक सप्ताह के भीतर परामर्शदात्री समिति की बैठक बुलाने का यह निर्देश दर्शाता है कि शासन इस बार कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर बेहद गंभीर है । निकाय स्तर पर यदि इन मुद्दों का नियमानुसार समाधान निकाला जाता है, तो इससे न केवल हजारों कर्मचारियों को आर्थिक व मानसिक राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार देखने को मिलेगा ।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
Back to top button