Chhattisgarh

छत्‍तीसगढ़ में समयमान वेतन की 18 साल पुरानी सूची होगी ‘री-ओपन’; छूटे संवर्गों के लिए सभी विभागों से मांगे गए नए प्रस्ताव

नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के शासकीय सेवकों (Government Employees) के लिए क्रमोन्नति योजना को समाप्त कर समयमान वेतनमान में समाहित करने के फैसले के बाद अब मंत्रालय स्तर पर एक बड़ी प्रशासनिक कसरत (Administrative Exercise) शुरू हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के नए आदेश के कारण अब राज्य की 18 साल पुरानी पदों की सूची को फिर से खोलने यानी री-ओपन (Re-open) करने की नौबत आ गई है।

इस नीतिगत बदलाव के तहत सरकार ने साफ कर दिया है कि जो संवर्ग या पद अब तक समयमान वेतनमान (Time Scale Pay) के दायरे से बाहर थे, उन्हें इसमें शामिल किया जाएगा। इसके लिए शासन ने सभी विभागों के सचिवों और विभागाध्यक्षों (HODs) से नए विभागीय प्रस्ताव यानी डिपार्टमेंटल प्रपोजल (Departmental Proposal) तलब किए हैं। सरकार के इस कदम से उन हजारों कर्मचारियों में उम्मीद की नई किरण जागी है, जो पिछले डेढ़ दशक से एक ही पद पर काम कर रहे हैं और जिन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था।

📜 साल 2008 की सूची में था पेंच, जानिए क्या है हकीकत

इस पूरे प्रशासनिक फेरबदल की जड़ें वर्ष 2008 के मूल वित्त निर्देश (Finance Instruction 11/2008) से जुड़ी हुई हैं। दरअसल, जब 28 अप्रैल 2008 को राज्य में पहली बार संशोधित समयमान वेतनमान योजना लागू की गई थी, तब उसके ‘परिशिष्ट-2’ (Annexure-2) में एक सीमित सूची जोड़ी गई थी। इस सूची में केवल 98 विशिष्ट संवर्गों (जैसे- उप-अभियंता, कृषि विस्तार अधिकारी, पशु चिकित्सा सर्जन आदि) के पदों का ही उल्लेख था, जिन्हें समयमान का लाभ तय किया गया था।

विगत 18 वर्षों के दौरान छत्तीसगढ़ के शासकीय ढांचे में भारी बदलाव आया है। इस लंबी अवधि में कई नए विभागों का गठन हुआ है, कई पुराने संवर्गों का पुनर्गठन (Restructuring) किया गया है और सैकड़ों नए तकनीकी व गैर-तकनीकी पद सृजित किए गए हैं। चूंकि इन नए पदों का समावेश साल 2008 की उस पुरानी सूची में नहीं था, इसलिए इन संवर्गों के अधिकारी-कर्मचारी समयमान वेतनमान के लाभ से वंचित चल रहे थे।

📁 नए आदेश की कंडिका 7 ने खोला बंद रास्ता

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों (New Directives) की गहराई से समीक्षा करने पर पता चलता है कि सरकार इस विसंगति को दूर करने के मूड में है। नए परिपत्र की कंडिका 7 (Clause 7) में स्पष्ट रूप से निर्देश जारी किए गए हैं कि जिन प्रशासनिक विभागों के अंतर्गत आने वाले पदों या संवर्गों का समावेश वित्त विभाग की वर्ष 2008 वाली सूची में नहीं है, वे विभाग तत्काल कार्रवाई शुरू करें।

नियमों के मुताबिक, अब संबंधित विभागों को अपने छूटे हुए संवर्गों की पूरी जन्मकुंडली तैयार करनी होगी। इसके बाद वे अनिवार्य रूप से वित्त विभाग (Finance Department) को अपना नया विभागीय प्रस्ताव (Departmental Proposal) भेजेंगे। वित्त विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद इन नए संवर्गों को भी समयमान वेतनमान की मुख्यधारा से जोड़ दिया जाएगा।

📌 इन 4 बड़े विभागों में मचेगी हलचल, नए प्रस्तावों की तैयारी शुरू

मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इस नए आदेश के बाद सबसे ज्यादा प्रशासनिक सक्रियता उन विभागों में देखने को मिलेगी जहां पिछले कुछ वर्षों में नए पदों का सृजन बड़े पैमाने पर हुआ है। मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में हलचल तेज होगी:

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग (Health Department): कोरोना काल के बाद से स्वास्थ्य विभाग में कई नए तकनीकी पद और कनिष्ठ प्रशासनिक संवर्ग बनाए गए हैं, जिन्हें सूची में शामिल कराने के लिए नए प्रस्ताव भेजे जाएंगे।
  • स्कूल शिक्षा विभाग (School Education): शिक्षक संवर्ग (Teacher Cadre) के संविलियन और नए सेटअप के बाद कई ऐसे पद हैं, जिनकी विसंगतियों को दूर करने के लिए इस क्लॉज का सहारा लिया जाएगा।
  • गृह एवं पुलिस विभाग (Police Department): सायबर सेल, फॉरेंसिक विंग और नए पुलिस थानों के गठन से बने विशेष संवर्गों के लिए भी नया डिपार्टमेंटल प्रपोजल (Departmental Proposal) तैयार किया जा रहा है।
  • राजस्व एवं आपदा प्रबंधन (Revenue Department): नए जिलों और तहसीलों के गठन के बाद राजस्व विभाग के अमले में हुए बदलावों के अनुसार नई सूची अपडेट की जाएगी।

कर्मचारी संघों की मांग: तय समय सीमा में स्वीकृत हों प्रस्ताव

सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ के विभिन्न कर्मचारी संघों के पदाधिकारियों ने एक नई मांग भी शासन के सामने रख दी है। कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में कई बार विभागों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव सचिवालय स्तर पर लालफीताशाही (Red Tape) और फाइलों के चक्कर में महीनों दबे रह जाते हैं।

चूंकि अब सभी क्रमोन्नति योजनाएं (Upgradation Schemes) 31 मार्च 2026 से पूरी तरह बंद हो चुकी हैं और केवल समयमान वेतनमान ही एकमात्र जरिया बचा है, इसलिए छूटे हुए संवर्गों के लिए प्रस्ताव भेजने और उन्हें वित्त विभाग से मंजूर कराने की प्रक्रिया को समयबद्ध (Time-bound) किया जाना चाहिए। यदि विभागों ने प्रस्ताव भेजने में देरी की, तो नए नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा प्रशासनिक विभाग कितनी मुस्तैदी से अपने कर्मचारियों का पक्ष वित्त विभाग के सामने रखता है।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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