Chhattisgarhराजनीति

छत्तीसगढ़ में Smart Meter और महंगी बिजली पर जनता में असंतोष, सरकार ने दी बड़ी सफाई, कहा- कांग्रेस ने किया…

रायपुर (chaturpost.com) छत्तीसगढ़ में बिजली के Smart Meter (स्मार्ट मीटर) और नए टैरिफ (New Tariff Hike) के कारण बिजली उपभोक्‍ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यह मुद्दा इस समय सबसे ज्यादा सुलग रहा है। दरअसल, उपभोक्ताओं की लगातार यह शिकायत आ रही है कि जब से घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, तब से उनका बिजली बिल अप्रत्याशित रूप से ज्यादा आ रहा है। इधर, कोढ़ में खाज यह हुई है कि राज्य में नया बिजली टैरिफ लागू हो गया है, जिसके चलते बिजली महंगी हो गई है। इन दोनों मोर्चों पर घिरी सरकार के खिलाफ अब सूबे में जमकर सियासत (Political Conflict) शुरू हो गई है।

इस मुद्दे को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) आक्रामक रुख अपनाए हुए है। बिजली की बढ़ी हुई दरों और स्मार्ट मीटर के खिलाफ कांग्रेस लगातार तीखी बयानबाजी कर रही है और प्रदेशभर में आंदोलन (Public Protest) छेड़ रखा है। जनता के बीच बढ़ते इसी भारी असंतोष और विपक्ष के हमलों के बीच अब राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग (Energy Department) ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। सरकार ने एक विस्तृत बयान जारी कर अपनी बड़ी सफाई दी है और इस पूरी योजना का ठीकरा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के सिर पर ही फोड़ दिया है।

क्यों आक्रोशित है जनता? क्या हैं मुख्य आरोप? (Public Grievances)

ग्राउंड जीरो से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ताओं का गुस्सा केवल दरों को लेकर नहीं है, बल्कि स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं:

  • 📈 तेजी से भाग रहा है मीटर: कई उपभोक्ताओं का दावा है कि पुराने मीटर की तुलना में नए स्मार्ट मीटर की रीड़िंग बहुत ज्यादा तेजी से भाग रही है, जिससे सामान्य मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
  • 💸 नए टैरिफ की दोहरी मार: हाल ही में लागू हुए नए विद्युत टैरिफ (New Electricity Tariff) के कारण प्रति यूनिट बिजली महंगी हो गई है।
  • 📉 पारदर्शिता का अभाव: उपभोक्ताओं की शिकायत है कि मीटर रीड़िंग में आ रहे इस भारी अंतर को लेकर जब वे बिजली दफ्तरों के चक्कर काटते हैं, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब (No Satisfactory Response) नहीं मिलता।

“हम तो सिर्फ टेंडर आगे बढ़ा रहे हैं…” सरकार ने स्मार्ट मीटर से झाड़ा पल्ला, पूरा ठीकरा कांग्रेस पर फूटा

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते जन-असंतोष (Public Anger) के बीच राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग ने इस पूरे विवाद से अपना पल्ला झाड़ने का प्रयास किया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर सफाई देते हुए इस पूरी योजना की जिम्मेदारी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार (Previous Congress Government) के सिर मढ़ दी है। सरकार का कहना है कि वर्तमान में जो स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, उसकी पूरी पटकथा और कार्यादेश कांग्रेस के शासनकाल में ही लिखे जा चुके थे।

इस विवाद के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े बिंदु हैं जिन्हें सरकार अपनी ढाल बना रही है:

  • 📋 नीतिगत निर्णय और टेंडर कांग्रेस काल के: भाजपा सरकार का साफ कहना है कि छत्तीसगढ़ में करीब 55 लाख उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने का मुख्य नीतिगत निर्णय (Policy Decision) साल 2022 में तत्कालीन भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने लिया था। परियोजना के लिए निविदाएं (Tenders) जारी करना, कंपनियों का चयन करना और उन्हें कार्यादेश (Work Orders) बांटने का पूरा काम कांग्रेस शासन में ही फाइनल हो चुका था।
  • 🤝 अनुबंधों से बंधी है वर्तमान सरकार: सरकार ने तकनीकी पक्ष रखते हुए कहा कि चूंकि पूर्ववर्ती सरकार कंपनियों के साथ कड़े व्यावसायिक अनुबंध (Commercial Contracts) कर चुकी थी, इसलिए वर्तमान सरकार कानूनी तौर पर उन एग्रीमेंट्स को पूरा करने के लिए बाध्य है। वर्तमान प्रशासन केवल पहले से तय की गई प्रक्रिया को ही धरातल पर क्रियान्वित (Implement) कर रहा है, इसमें उनकी तरफ से कोई नई शर्त नहीं जोड़ी गई है।
  • 🏢 यह शुद्ध रूप से केंद्र की योजना: सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कोई राज्य सरकार की निजी योजना नहीं है, बल्कि भारत सरकार की ‘पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना’ (RDSS) है। केंद्र सरकार की इस गाइडलाइन को हूबहू लागू करने की शुरुआत खुद कांग्रेस ने की थी, इसलिए अब उसी योजना को लेकर कांग्रेस का सड़कों पर आंदोलन करना पूरी तरह से उनका दोहरा चरित्र (Double Standard) और राजनीतिक पाखंड है।

सरकार का दावा: “गलत मीटर रीडिंग का खेल होगा खत्म, उपभोक्ता हित में है योजना”

इस राजनीतिक घमासान (Political Conflict) के बीच ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने आंकड़ों के जरिए अपना पक्ष रखा है। विभाग का कहना है कि अब तक प्रदेश के 55 लाख उपभोक्ताओं में से करीब 40 लाख मीटर लगाए जा चुके हैं। अधिकारियों ने इस तकनीक के फायदे गिनाते हुए कहा:

  • 🚫 मानवीय भूलों पर विराम: इस डिजिटल व्यवस्था के बाद मीटर रीडर द्वारा गलत या मनगढ़ंत रीडिंग दर्ज करने की गुंजाइश हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। बिल पूरी तरह से वास्तविक खपत (Actual Consumption) पर ही जनरेट होगा।
  • ⏱️ 30 मिनट का लाइव अपडेट: उपभोक्ता हर आधे घंटे में अपने मोबाइल ऐप के जरिए अपनी बिजली खपत पर पैनी नजर रख सकते हैं, जिससे वे खुद अपनी बिजली का मैनेजमेंट कर सकेंगे।
  • बेहतर वोल्टेज और विश्वसनीय सप्लाई: स्मार्ट मीटर के माध्यम से ग्रिड और लोकल ट्रांसफार्मर के लोड और वोल्टेज का रियल-टाइम डेटा कंट्रोल रूम को मिलता रहेगा। इससे ओवरलोडिंग और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की समस्या का समय रहते समाधान हो जाएगा।

चतुर विचार

छत्तीसगढ़ में इस समय Smart Meter Controversy तकनीकी कम और राजनीतिक व आर्थिक ज्यादा बन चुकी है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो बिजली व्यवस्था का आधुनिकीकरण (Modernization) और पारदर्शिता बेहद जरूरी है, और चूंकि यह केंद्र सरकार की आरडीएसएस (RDSS) गाइडलाइंस के तहत हो रहा है, इसलिए इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

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परंतु, एक जिम्मेदार समाचार माध्यम के रूप में हमें यह भी रेखांकित करना होगा कि यदि नई दरों और नए मीटरों के आते ही जनता का बिल अचानक दोगुना हो रहा है, तो सरकार की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह बिजली दफ्तरों में ‘सत्यापन और शिकायत निवारण कैंप’ (Grievance Camps) लगाए। केवल यह कह देना कि “योजना पिछली सरकार की थी” जनता के गुस्से को शांत नहीं कर सकता। लोकतंत्र में पारदर्शी संवाद ही इस बड़े संकट का एकमात्र हल है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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