
रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनियों (State Power Companies) में पुरानी पेंशन योजना यानी Old Pension Scheme (OPS) की बहाली की मांग को लेकर अधिकारी और कर्मचारी अब आर-पार के मूड में आ गए हैं। अपनी मांगों को मनवाने के लिए बिजली कर्मियों का आंदोलन (Protest) अब बेहद तेज हो चुका है। इसमें खास बात यह है कि अब तक अलग-अलग लड़ाई लड़ रहे कर्मचारी-अधिकारी संगठनों ने एकजुट होकर एक ‘साझा मंच’ (Joint Forum) का गठन कर लिया है।
27 जून को महाबैठक, आंदोलन का शंखनाद
ओपीएस लागू करने के लिए बिजली कंपनियों सक्रिय कई कर्मचारी संगठन एक साथ आए हैं। इस साझा मंच की एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक (Critical Meeting) आगामी 27 जून को प्रस्तावित है। दूसरी तरफ, कर्मचारियों के महासंघ (Federation) ने पहले ही आंदोलन का शंखनाद कर दिया है। बिजली दफ्तरों में अब पुरानी पेंशन बहाली की गूंज साफ सुनाई देने लगी है।
कंपनी प्रबंधन झुका, सरकार को दोबारा भेजा प्रस्ताव
सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, कर्मचारी संगठनों के इस चौतरफा बढ़ते दबाव (Growing Pressure) के आगे आखिरकार बिजली कंपनी प्रबंधन को झुकना पड़ा है। कर्मचारी नेताओं के बीच चल रही चर्चा की मानें तो कंपनी प्रबंधन ने बिजली कंपनी के कर्मचारियों के लिए ओपीएस (OPS implementation) लागू करने की सिफारिश करते हुए राज्य सरकार को एक नया पत्र (Official Proposal) भेजा है। इस पत्र के बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि साय सरकार जल्द ही इस पर कोई बड़ा फैसला ले सकती है।
फ्लैशबैक: आखिर क्यों अधर में लटकी थी पुरानी पेंशन?
जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों (Political Analysts) के अनुसार, यह विवाद आज का नहीं बल्कि पूर्ववर्ती सरकार के समय का है। आइए बिंदुवार समझते हैं कि पिछली बार यह मामला कहां फंसा था:
- भूपेश सरकार का फैसला: तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने जब राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों के लिए ओपीएस बहाल किया था, तब बिजली कंपनी प्रबंधन ने भी इसे लागू करने का प्रस्ताव भेजा था।
- मुख्य सचिव ने लौटाई फाइल: सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन मुख्य सचिव (Chief Secretary) ने उस समय बिजली कंपनी की ओपीएस बहाली वाली फाइल को वापस लौटा दिया था।
- कॉर्पोरेट एरिया का पेंच: दरअसल, राज्य सरकार ने जो ओपीएस बहाली का मुख्य आदेश (Government Order) जारी किया था, उसमें कॉर्पोरेट एरिया (Corporate Entities/Autonomous bodies) को शामिल नहीं किया गया था। इसी तकनीकी पेंच का हवाला देते हुए मुख्य सचिव ने फाइल वापस कर दी थी, जिससे यह मांग अधर में लटक गई।
कर्मचारियों की एकजुटता से बदली परिस्थिति
लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। बिजली कंपनियों के भीतर असंतोष का लावा फूट पड़ा है। साझा मंच बनने के बाद अब प्रबंधन के पास सरकार के पाले में गेंद डालने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। यही वजह है कि प्रबंधन ने कंपनी में ओपीएस लागू करने का प्रस्ताव अनुमोदन (Approval) के लिए फिर से कैबिनेट और मुख्यमंत्री के पास भेजा है।







