शासकीय आदेश व अधिसूचना

अधिसूचना जारी: छत्तीसगढ़ की VB-G RAM G योजना में हुए बड़े बदलाव, अब रंगीन कार्ड, AI मॉनिटरिंग व पेनाल्टी नियम लागू

नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रोजगार को लेकर 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाली ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारन्टी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G)’ योजना की बहुप्रतीक्षित अधिसूचना अंततः जारी हो गई है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने “25 जून 2026 को छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) प्रकाशित कर दिया है।

इस राजपत्रित अधिसूचना (Gazette Notification) के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि यह योजना पुरानी योजनाओं जैसी बिल्कुल नहीं होगी। इस बार नियमों को बेहद सख्त और आधुनिक बनाया गया है। Furthermore, अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के लिए भारी-भरकम पेनाल्टी (Penalty Guidelines) का भी प्रावधान किया गया है।

अधिसूचना की सबसे बड़ी बात: मिलेंगे ‘विशेष रंगीन जॉब कार्ड’

राजपत्र के अनुसार, सबसे बड़ा बदलाव जॉब कार्ड प्रणाली में किया गया है। अब सभी को एक जैसा कार्ड नहीं मिलेगा। कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए “अलग रंगों का विशेष ग्रामीण रोजगार गारन्टी कार्ड जारी किया जावेगा”। यह विशेष रंगीन कार्ड निम्नलिखित श्रेणियों को मिलेगा:

  • एकल महिला (Single Women)।
  • दिव्यांग व्यक्ति।
  • साठ वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग।
  • मुक्त बंधुआ मजदूर।
  • विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG)।
  • ट्रांसजेंडर व्यक्ति।

इन कार्डों की वैधता 3 वर्ष होगी। In addition to this, महिलाओं को प्राथमिकता देने का कड़ा नियम है, जिसके तहत कार्य की मांग करने वालों में कम-से-कम एक-तिहाई (33%) महिलाएं होनी अनिवार्य हैं।

कृषि के चरम मौसम में 60 दिन बंद रहेंगे काम

खेती-किसानी प्रभावित न हो, इसके लिए एक बिल्कुल नया नियम (New Rule) लाया गया है। राजपत्र में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार बुवाई और कटाई के समय यानी कृषि के चरम मौसमों में “कुल साठ दिवस की अवधि” को अधिसूचित करेगी। Consequently, इन 60 दिनों के दौरान योजना के तहत कोई भी नया कार्य नहीं किया जाएगा, ताकि खेतों में पर्याप्त कृषि श्रमिक उपलब्ध रह सकें।

डिजिटल मॉनिटरिंग और AI का कड़ा पहरा

इस बार काम में लापरवाही या भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म कर दी गई है। योजना को आधुनिक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Public Infrastructure) से जोड़ा गया है। राजपत्र “e-Gazette.pdf” में बताए गए नए तकनीकी नियमों पर एक नजर डालें:

  • कार्यस्थल पर हाजिरी किसी रजिस्टर में नहीं, बल्कि ‘बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली’ (Biometric Attendance) से दर्ज होगी।
  • सभी निर्माण कार्यों की ‘जियो टैगिंग’ (Geo-tagging) और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) से मोबाइल आधारित निगरानी अनिवार्य होगी।
  • धोखाधड़ी को रोकने और संपरीक्षा के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) का उपयोग किया जाएगा।
  • ग्राम पंचायतों के प्लान ‘पीएम गति शक्ति’ (PM Gati Shakti) और जीआईएस (GIS) आधारित उपकरणों के जरिए तैयार होंगे।

भुगतान में देरी पर अफसरों से वसूला जाएगा हर्जाना

मजदूरों के लिए यह सबसे बड़ी राहत की खबर है। नियम 28 के तहत ‘विलंब क्षतिपूर्ति’ (Delay Compensation) को कड़ाई से लागू किया गया है। यदि मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी खाते में नहीं आती है, तो 16वें दिन से प्रतिदिन 0.05% की दर से मुआवजे का भुगतान करना होगा। Moreover, यह मुआवजा राशि किसी और से नहीं, बल्कि भुगतान में विलंब के लिए उत्तरदायी पदाधिकारियों या एजेंसियों से वसूली जाएगी। कंप्यूटर सिस्टम को ऐसे सेट किया जाएगा कि यह क्षतिपूर्ति राशि स्वतः (Auto-calculate) जनरेट हो जाएगी।

बेरोजगारी भत्ता (Unemployment Allowance) के नए स्लैब

अगर किसी पंजीकृत श्रमिक ने काम मांगा और उसे 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिला, तो वह बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा। भत्ते की दर भी राजपत्र में तय कर दी गई है। वित्तीय वर्ष के पहले 30 दिनों के लिए यह न्यूनतम मजदूरी दर का एक-चौथाई (1/4) होगा, और उसके बाद की शेष अवधि के लिए यह मजदूरी दर का आधा (1/2) होगा। यह भत्ता भी 15 दिन के भीतर वितरित करना अनिवार्य होगा।

कठोर प्रतिबंध: ठेकेदारों और मशीनों की नो-एंट्री

योजना के अध्याय 14 के अनुसार, एक बड़ा बदलाव (Major Change) यह है कि किसी भी कार्य के निष्पादन के लिए “किसी ठेकेदार को नियुक्त नहीं किया जाएगा”। सभी काम सीधे कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा किए जाएंगे। Furthermore, श्रम विस्थापित करने वाली भारी मशीनों (Machines) के उपयोग पर रोक लगा दी गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को हस्तचालित श्रम (Manual labor) मिल सके।

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हर 6 महीने में होगा सोशल ऑडिट

पारदर्शिता (Transparency) को चरम पर ले जाते हुए, ग्राम सभा को अत्यधिक शक्तियां दी गई हैं। योजना के तहत हुए सभी कार्यों, खर्चों और गारंटियों का हर छह महीने में कम-से-कम एक बार अनिवार्य ‘सामाजिक अंकेक्षण’ (Social Audit) किया जाएगा। अगर इसमें वित्तीय अनियमितता पाई गई, तो जिला कार्यक्रम समन्वयक (कलेक्टर) एफआईआर (FIR) दर्ज कराएगा और गबन की गई राशि भू-राजस्व वसूली कानून के तहत वसूल की जाएगी।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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